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बांदा: 16.23 करोड़ प्रीमियम वसूला, क्लेम सिर्फ 3.25 करोड़, फसल बीमा योजना कंपनियों के लिए फायदे का सौदा

Thu, 21 Jul 2022 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो अनुभव अवस्थी, बांदा
अनुभव अवस्थी, बांदा Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Thu, 21 Jul 2022 12:07 AM IST
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Banda: 16.23 crore premium collected, claim only 3.25 crore
फसल खराब होने पर किसानों को मुआवजा देने के लिए लागू की गई फसल बीमा योजना कंपनियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। चित्रकूट धाम मंडल में बीमा कंपनियों ने सत्र 2019-20 और 2021-22 में 2 लाख 36 हजार 379 किसानों और सरकार से फसल बीमा के नाम पर 16 करोड़ 23 लाख रुपये प्रीमियम वसूला है। किसानों को क्लेम के रूप में सिर्फ तीन करोड़ 25 लाख रुपये दिए गए।
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बीमा कंपनी के नियमों और अफसरों की लापरवाही के कारण किसान क्लेम से वंचित हो रहे हैं। इसकी वजह बुंदेलखंड में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार क्लेम के नियम नहीं बने हैं। बांदा और चित्रकूट जिलों में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड किसानों की फसल का बीमा कर रही है।
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किसानों का आरोप है कि मौसम खराब होने के दौरान कंपनियों के टोल फ्री नंबर बंद हो जाते हैं। इसके चलते ज्यादातर किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। बीमा कंपनियों ने करीब 1.57 लाख से ज्यादा पॉलिसी धारक किसानों को कोई क्लेम जारी नहीं किया। इससे कंपनी ने मंडल के सभी जिलों में 13 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमा लिया। 
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ऐसे समझिए बीमा कंपनियों की मनमानी
- बैंकों से फसली लोन लेने वाले किसानों का फसल का बीमा किया जाता है। बीमा कंपनी की ओर से प्रत्येक किसान के खसरे के अनुसार पॉलिसी तैयार कर प्रीमियम वसूला जाता है। लेकिन क्लेम प्रत्येक खेत के बजाय गिरदावर सर्किल के आधार पर होने वाले नुकसान से तय किया जा रहा है।
- राज्य सरकार ने पाला पड़ने पर क्षतिपूर्ति दिए जाने को हटा दिया है। जबकि केंद्र सरकार की गाइड लाइन में पाले से होने वाले नुकसान पर क्लेम का प्रावधान है।
- अपने प्रतिनिधियों की सूचना के आधार पर ही बीमा कंपनियां बारिश होना मानती हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में बारिश का पैटर्न तेजी से बदला है। एक ही तहसील या गिरदावर सर्किल के कुछ हिस्सों में ज्यादा और कुछ हिस्सों में कम बारिश दर्ज की जा रही है।

किसानों के साथ हो रहा धोखा
तिंदवारी क्षेत्र के रहने वाले किसान देवी दयाल का कहना है कि 2020 में उड़द व चना की फसल का बीमा करवाया। इसके लिए लिए 960 रुपये बतौर प्रीमियम दिया। फसल सूखने की सूचना के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर पर सूचना दर्ज करवाना चाहा, लेकिन सात दिन तक फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, किसान रामदीन ने बताया कि उसने 2021 में सरसों व जौ की फसल का बीमा करवाया था। उसने 2280 रुपये प्रीमियम भरा। पानी समय से नहीं मिलने पर फसल में काफी खराब हुई। सूचना के बाद भी बीमा कंपनी को कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। किसान को महज 273 रुपये क्लेम दिया गया। यह एक तरह से धोखा है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सूखे को जोखिम में शामिल करके हो क्लेम का आकलन
कृषि विभाग के रिटायर्ड अधिकारी एसके सिंह बताते हैं कि फसली बीमा में बुंदेलखंड की जलवायु को देखते हुए उत्पादन का आकलन एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना के मापदंड लागू होने चाहिए। इसके लिए सरकार को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल सूखा को जोखिम में शामिल करते हुए क्लेम तय करना चाहिए। इससे किसानों को बीमा का पूरा फायदा मिलेगा।

किसानों के साथ होता भेदभाव
मौसम की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र में फसलों में मौसम से हुई खराबी की वास्तविकता सामने आ जाती है। उत्पादन आकलन में किसानों के साथ भेदभाव होता है। जहां नुकसान नहीं होता वहां पैदावार अच्छी होती है। जिसके आधार पर कमजोर पैदावार वाले इलाकों के किसानों का भी उत्पादन टारगेट पूरा हो जाता है।

30 जुलाई तक बैंक में दें सूचना
फसल बीमा कंपनी के मापदंडों के अनुसार जो किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहते हैं उन्हें 30 जुलाई तक संबंधित बैंक में जाकर लिखित सूचना देनी होगी। जिन किसानों ने बैंक में फसल बीमा से नाम कटवाने के लिए लिखित में सूचना नहीं दी तो उनके खाते से बैंक खुद प्रीमियम की कटौती कर बीमा कंपनी के खाते में जमा करवा देगा।

बीमा पॉलिसी विवरण 2019-20
जनपद पॉलिसी धारक किसान प्रीमियम जमा क्लेम
बांदा 43 हजार 194 265 लाख 54 लाख
चित्रकूट 17 हजार 77 129 लाख 32 लाख
महोबा 32 हजार 719 285 लाख 56 लाख
हमीरपुर 35 हजार 800 173 लाख 54 लाख
बीमा पॉलिसी का विवरण 2021-22
जनपद पॉलिसी धारक किसान प्रीमियम क्लेम
बांदा 43 हजार 535 297 लाख 56 लाख
चित्रकूट 06 हजार 646 48.00 लाख 11 लाख
महोबा 29 हजार 05 274 लाख 26 लाख
हमीरपुर 28 हजार 402 152 लाख 36 लाख

किसानों को प्रीमियम से इतना कम क्लेम क्यों मिला। इस संबंध में बीमा कंपनी ही कुछ बता सकती है। बीमा पॉलिसी को सरकार ही तय करती है। यदि कहीं किसान को नुकसान हो रहा है तो उच्च स्तर से ही बदलाव किया जा सकता है।- विजय कुमार, कृषि उपनिदेशक

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