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बांदा : अक्तूबर में 156 मिमी बारिश ने 10 साल का रिकार्ड तोड़ा
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फोटो 10 बीएनडीपी 22- अतर्रा की चूड़ी गली में जल भराव से निकलता बाइक सवार। संवाद
- फोटो : BANDA
बांदा। अक्तूबर के चार दिनों में हुई बारिश ने 10 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इन चार दिनों में 156.29 मिलीमीटर बारिश हुई है। पिछले 24 घंटे में 65 मिमी बारिश हो चुकी है। लगातार बारिश होने से तिलहन की फकी फसलें सड़ने लगी हैं। धान की फसल को भी नुकसान की आशंका है। जिला प्रशासन ने फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए टीमें गठित कर सर्वे कराने की बात कही है।
2013 में जनपद में अक्तूबर में 106 मिली मीटर बारिश हुई थी। चार दिनों से हो रही लगातार बारिश और सर्द हवाओं से गर्मी काफूर हो गई। जिले में खरीफ की फसल तिल, बाजरा, मूंग, उर्द तैयार है।
खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर उत्पादन होगा, लेकिन बारिश से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। धान की फसल खेतों में पसर गई है। अन्य फसलें तकरीबन चौपट हो गई हैं। खेतों में पानी भर जाने से फसलें सड़ रही हैं। उधर, जिन किसानों ने रबी की बुआई कर दी है, वहां बीजमारी हो गई है या पौध सड़ गए।
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मौसम न खुला तो फसलें हो जाएंगी बर्बाद
मौसम वैज्ञानिक आशुतोष का कहना है कि बारिश बंद न हुई तो धान सहित दलहन और तिलहन की फसलों को भारी नुकसान होगा। खेत जलमग्न हो जाने से तिल, बाजरा, मूंग, उर्द की फसल सड़ जाएंगी। धान भी पसर गया है। आसमान न खुला तो धान खेतों में ही समाप्त हो जाएगा। अक्तूबर से रबी की बुआई शुरू हो जाती है। जिन किसानों ने बुआई की थी, उसमें बीजमारी का खतरा बढ़ गया है।
दस सालों में अक्तूबर में हुई बारिश (एमएम)
वर्ष बारिश
2014 49.00
2015 09.92
2016 13.90
2017 02.00
2018 10.40
2019 54.00
2020 72.94
2021 47.78
2022 156.29
दो दिन और होगी बारिश
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मानसून लौट रहा है। ऐसे में अभी दो दिनों तक कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश होगी। आसमान में बादल छाये रहेंगे। आठ से 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलेगी।
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2013 में जनपद में अक्तूबर में 106 मिली मीटर बारिश हुई थी। चार दिनों से हो रही लगातार बारिश और सर्द हवाओं से गर्मी काफूर हो गई। जिले में खरीफ की फसल तिल, बाजरा, मूंग, उर्द तैयार है।
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खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर उत्पादन होगा, लेकिन बारिश से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। धान की फसल खेतों में पसर गई है। अन्य फसलें तकरीबन चौपट हो गई हैं। खेतों में पानी भर जाने से फसलें सड़ रही हैं। उधर, जिन किसानों ने रबी की बुआई कर दी है, वहां बीजमारी हो गई है या पौध सड़ गए।
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मौसम न खुला तो फसलें हो जाएंगी बर्बाद
मौसम वैज्ञानिक आशुतोष का कहना है कि बारिश बंद न हुई तो धान सहित दलहन और तिलहन की फसलों को भारी नुकसान होगा। खेत जलमग्न हो जाने से तिल, बाजरा, मूंग, उर्द की फसल सड़ जाएंगी। धान भी पसर गया है। आसमान न खुला तो धान खेतों में ही समाप्त हो जाएगा। अक्तूबर से रबी की बुआई शुरू हो जाती है। जिन किसानों ने बुआई की थी, उसमें बीजमारी का खतरा बढ़ गया है।
दस सालों में अक्तूबर में हुई बारिश (एमएम)
वर्ष बारिश
2014 49.00
2015 09.92
2016 13.90
2017 02.00
2018 10.40
2019 54.00
2020 72.94
2021 47.78
2022 156.29
दो दिन और होगी बारिश
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मानसून लौट रहा है। ऐसे में अभी दो दिनों तक कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश होगी। आसमान में बादल छाये रहेंगे। आठ से 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलेगी।