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बांदा : 1.25 करोड़ के घपले की फाइलें अलमारी में बंद
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बांदा। मनरेगा में पांच साल में सोशल ऑडिट के दौरान पकड़ी गई 1.25 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं की फाइलें अलमारियों में बंद हैं। इस मामले में शासन ने संबंधित सचिव, प्रधान और तकनीकी सहायकों से घोटाले की रकम भू-राजस्व की तर्ज पर वसूलने के आदेश दिए हैं, लेकिन अधिकारी पांच साल में केवल 15 लाख की ही वसूली कर पाए हैं। शासन ने फिर रिमाइंडर भेजकर वसूली के आदेश दिए हैं।
जनपद में प्रति वर्ष करीब एक अरब का श्रम बजट आता है। निर्माण में 30 फीसदी और मजदूरी में 70 फीसदी धन खर्च किया जाता है। कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए शासन से सोशल ऑडिट होता है। साल 2016-17 से 2021-22 में विकास खंड बबेरू के 27 गांवों में 17,41,669 रुपये, बड़ोखर खुर्द के 13 गांवों में 33,11,664 रुपये, बिसंडा के 41 गांवों में 12,99,420 रुपये, जसपुरा के 15 गांवों में 12,39,400 रुपये, कमासिन के 14 गांवों में 10,65,650 रुपये, महुआ के 42 गांवों में 16,65,153 रुपये, नरैनी के 28 गांवों में 21,38,174 रुपये, तिंदवारी के 20 गांवों में 15,80,747 रुपये की सोशल ऑडिट में मेड़बंदी, तालाब, सड़क निर्माण आदि कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं थीं।
शासन ने वित्तीय अनियमितताओं में संबंधित प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायकों से वसूली के आदेश दिए थे, लेकिन पांच साल से अनियमितताओं की फाइलें अधिकारियों की अलमारियों में बंद हैं। हालांकि शासन स्तर पर कई बार वसूली के आदेश दिए गए, लेकिन पांच सालों में विभाग महज 14,78,153 रुपये की ही वसूली कर सका है। अधिकारियों का तर्क है कि मामला पुराना है। कई सचिवों के स्थानांतरण हो गए हैं। नए प्रधान वसूली कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे वसूली में दिक्कतें आ रही हैं।
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खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह रिकवरी के कार्य में तेजी लाएं। कई ग्राम पंचायतों में रिकवरी की गई है। - राघवेंद्र तिवारी, उपायुक्त मनरेगा, बांदा
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जनपद में प्रति वर्ष करीब एक अरब का श्रम बजट आता है। निर्माण में 30 फीसदी और मजदूरी में 70 फीसदी धन खर्च किया जाता है। कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए शासन से सोशल ऑडिट होता है। साल 2016-17 से 2021-22 में विकास खंड बबेरू के 27 गांवों में 17,41,669 रुपये, बड़ोखर खुर्द के 13 गांवों में 33,11,664 रुपये, बिसंडा के 41 गांवों में 12,99,420 रुपये, जसपुरा के 15 गांवों में 12,39,400 रुपये, कमासिन के 14 गांवों में 10,65,650 रुपये, महुआ के 42 गांवों में 16,65,153 रुपये, नरैनी के 28 गांवों में 21,38,174 रुपये, तिंदवारी के 20 गांवों में 15,80,747 रुपये की सोशल ऑडिट में मेड़बंदी, तालाब, सड़क निर्माण आदि कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं थीं।
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शासन ने वित्तीय अनियमितताओं में संबंधित प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायकों से वसूली के आदेश दिए थे, लेकिन पांच साल से अनियमितताओं की फाइलें अधिकारियों की अलमारियों में बंद हैं। हालांकि शासन स्तर पर कई बार वसूली के आदेश दिए गए, लेकिन पांच सालों में विभाग महज 14,78,153 रुपये की ही वसूली कर सका है। अधिकारियों का तर्क है कि मामला पुराना है। कई सचिवों के स्थानांतरण हो गए हैं। नए प्रधान वसूली कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे वसूली में दिक्कतें आ रही हैं।
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खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह रिकवरी के कार्य में तेजी लाएं। कई ग्राम पंचायतों में रिकवरी की गई है। - राघवेंद्र तिवारी, उपायुक्त मनरेगा, बांदा