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7 माह में 7 करोड़ खा गए अन्ना पशु, बदहाली बरकरार
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Anna animals ate 7 crores in 7 months, plight continues
- फोटो : BANDA
बांदा। चालू वर्ष के शुरुआती सात महीनों में सात करोड़ से ज्यादा रुपये चित्रकूटधाम मंडल के अन्ना मवेशियों पर खर्च कर दिए गए, लेकिन सड़कों और गांवों में अन्ना पशुओं के झुंड जस के तस नजर आ रहे हैं। अस्थाई गोशालाओं में भूख-प्यास से जर्जर होकर पशुओं की मौत का सिलसिला भी नहीं थम रहा।
चित्रकूटधाम मंडल में कुल 892 पशु आश्रय केंद्र हैं। इनके लिए प्रदेश सरकार चालू वर्ष में जुलाई माह तक 7 करोड़ 11 लाख रुपये दे चुकी है। पशु पालन विभाग ने इसे खर्च भी कर दिया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इन दिनों इन आश्रय केंद्रों में 92,744 अन्ना पशु बताए गए हैं।
जुलाई तक इन पर 7 करोड़ 11 लाख 55 हजार 597 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आश्रय केंद्रों में 11 पशुओं की मौत पशु पालन विभाग ने स्वीकारी है। लेकिन यह आंकड़ा पूरी तरह गुमराह करने वाला है। आश्रय केंद्रों में गायों की मौत को छिपाने और सुर्खियों में आने से बचाने की पूरी कवायदें की जा रही हैं। अतर्रा में हुई गायों की मौत की ताजी घटना इसकी बानगी है। हालांकि इन मौतों को पशु पालन विभाग अपने अभिलेखों में दर्ज नहीं कर रहा।
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सात माह में पिशु आश्रय केंद्रों में खर्च राशि
जनपद आश्रय केंद्र संरक्षित पशु खर्च राशि
बांदा 144 19052 54,42,547
चित्रकूट 271 27495 1,17,13,050
महोबा 159 24685 3,90,00,000
हमीरपुर 318 21512 1,50,00,000
योग 892 92744 7,11,55,597
900 मासिक मदद भी नहीं लुभा पा रही ग्रामीणों को
बांदा। अन्ना पशु को पालने पर प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही प्रति मवेशी 900 रुपये मासिक आर्थिक मदद की योजना भी लोगों को अन्ना गायों के प्रति लुभा नहीं रही। इसी का नतीजा है कि मंडल में अब तक मात्र 2191 किसानों ने ही इस योजना में रुचि ली है। इन किसानों ने 4928 गोवंशों को अपनी सुपुर्दगी में लिया है। इनमें बांदा में 118 ग्रामीणों या किसानों ने 276 पशु अपने जिम्मे लिए हैं। चित्रकूट में 85 ग्रामीणों ने 155, हमीरपुर में 1958 ग्रामीणों ने 4497 मवेशियों को अपने संरक्षण में लिया है।
प्राकृतिक और सामान्य हैं गायों की मौत
बांदा। कान्हा आश्रय केंद्रों में गायों की मौतों को चित्रकूटधाम मंडल के पशु पालन अपर निदेशक मनोज अवस्थी सामान्य और प्राकृतिक मौत मानते हैं। उनका कहना है कि इन पशुओं का समय-समय पर नियमित रूप से टीकाकरण होता है। बीमार होने पर उनका इलाज कराया जाता है। बूढ़े पशुओं की मौत सामान्य और प्राकृतिक है।
डेढ़ लाख मिले थे, भूसे में खर्च कर दिए
अतर्रा। नगर पालिका ईओ रामसिंह ने बताया कि पालिका द्वारा संचालित किए जा रहे कान्हा पशु आश्रय केंद्र के लिए अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये का भूसा खरीदा जा चुका है। इतना ही इसके लिए बजट मिला था। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने और भूसा भेजा तो बजट न होने से उसका भुगतान नहीं हो पा रहा। इसलिए और भूसा देने से उसने इनकार कर दिया है। उधर, एसडीएम सौरभ शुक्ला का कहना है कि समाजसेवियों ने भी 25 क्विंटल भूसा दिया था। वह गोशाला का निरीक्षण करेंगे और गायों की मौत की जांच करेंगे।
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चित्रकूटधाम मंडल में कुल 892 पशु आश्रय केंद्र हैं। इनके लिए प्रदेश सरकार चालू वर्ष में जुलाई माह तक 7 करोड़ 11 लाख रुपये दे चुकी है। पशु पालन विभाग ने इसे खर्च भी कर दिया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इन दिनों इन आश्रय केंद्रों में 92,744 अन्ना पशु बताए गए हैं।
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जुलाई तक इन पर 7 करोड़ 11 लाख 55 हजार 597 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आश्रय केंद्रों में 11 पशुओं की मौत पशु पालन विभाग ने स्वीकारी है। लेकिन यह आंकड़ा पूरी तरह गुमराह करने वाला है। आश्रय केंद्रों में गायों की मौत को छिपाने और सुर्खियों में आने से बचाने की पूरी कवायदें की जा रही हैं। अतर्रा में हुई गायों की मौत की ताजी घटना इसकी बानगी है। हालांकि इन मौतों को पशु पालन विभाग अपने अभिलेखों में दर्ज नहीं कर रहा।
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सात माह में पिशु आश्रय केंद्रों में खर्च राशि
जनपद आश्रय केंद्र संरक्षित पशु खर्च राशि
बांदा 144 19052 54,42,547
चित्रकूट 271 27495 1,17,13,050
महोबा 159 24685 3,90,00,000
हमीरपुर 318 21512 1,50,00,000
योग 892 92744 7,11,55,597
900 मासिक मदद भी नहीं लुभा पा रही ग्रामीणों को
बांदा। अन्ना पशु को पालने पर प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही प्रति मवेशी 900 रुपये मासिक आर्थिक मदद की योजना भी लोगों को अन्ना गायों के प्रति लुभा नहीं रही। इसी का नतीजा है कि मंडल में अब तक मात्र 2191 किसानों ने ही इस योजना में रुचि ली है। इन किसानों ने 4928 गोवंशों को अपनी सुपुर्दगी में लिया है। इनमें बांदा में 118 ग्रामीणों या किसानों ने 276 पशु अपने जिम्मे लिए हैं। चित्रकूट में 85 ग्रामीणों ने 155, हमीरपुर में 1958 ग्रामीणों ने 4497 मवेशियों को अपने संरक्षण में लिया है।
प्राकृतिक और सामान्य हैं गायों की मौत
बांदा। कान्हा आश्रय केंद्रों में गायों की मौतों को चित्रकूटधाम मंडल के पशु पालन अपर निदेशक मनोज अवस्थी सामान्य और प्राकृतिक मौत मानते हैं। उनका कहना है कि इन पशुओं का समय-समय पर नियमित रूप से टीकाकरण होता है। बीमार होने पर उनका इलाज कराया जाता है। बूढ़े पशुओं की मौत सामान्य और प्राकृतिक है।
डेढ़ लाख मिले थे, भूसे में खर्च कर दिए
अतर्रा। नगर पालिका ईओ रामसिंह ने बताया कि पालिका द्वारा संचालित किए जा रहे कान्हा पशु आश्रय केंद्र के लिए अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये का भूसा खरीदा जा चुका है। इतना ही इसके लिए बजट मिला था। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने और भूसा भेजा तो बजट न होने से उसका भुगतान नहीं हो पा रहा। इसलिए और भूसा देने से उसने इनकार कर दिया है। उधर, एसडीएम सौरभ शुक्ला का कहना है कि समाजसेवियों ने भी 25 क्विंटल भूसा दिया था। वह गोशाला का निरीक्षण करेंगे और गायों की मौत की जांच करेंगे।