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और गहराया पानी-बिजली का संकट
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 03 May 2018 10:57 PM IST
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पानी भरने के लिए कुशवाहा नगर के हैंडपंप लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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मौसम की मार ने चित्रकूटधाम मंडल के बाशिंदों को चौथे दिन भी बिजली और पानी के संकट से निजात नहीं मिलने दी। सबसे खराब स्थिति मंडल मुख्यालय बांदा की है। बुधवार की आधी रात आई भीषण आंधी और बारिश ने एक बार फिर बिजली और पानी की व्यवस्थाओं को तहस-नहस कर दिया। 24 घंटे बाद शुरू हुई बिजली आठ घंटे बाद फिर ध्वस्त हो गई। शहर में पानी का संकट गुरुवार को भी रहा। इसके बावजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि प्रभावित इलाकों में नजर नहीं आए। पानी के लिए तरस और तड़प रहे लोग कोसते रहे।
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सोमवार को शाम आई भीषण आंधी से पूरे शहर की बिजली और पेयजल आपूर्ति तहस-नहस हो गई थी। गांव भी अंधेरे में डूब गए थे। जल संस्थान के नलकूपों को बिजली देने वाले फीडर भी चौपट हो गए थे। बिजली कर्मियों ने रात-दिन की मशक्कत के बाद बुधवार शाम चार बजे इन्हें दुरुस्त किया था। बृहस्पतिवार को पानी और बिजली मिलने की उम्मीद जागी थी, लेकिन रात करीब साढ़े 11 बजे आई भीषण आंधी और तेज बारिश ने सारी तैयारियों को फिर तहस-नहस कर दिया।
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पेयजल आपूर्ति से जुड़े भूरागढ़ फीडर के 12 खंभे मटौंध के पास धराशायी हो गए। बिजली के भूरागढ़ फीडर पर नदी के उस पार लाइनों पर दो जगह पेड़ गिर गए। इससे बांबेश्वर, संकट मोचन, कालूकुआं फीडर भी ठप हो गए। पूरी रात शहर अंधेरे में रहा। जलापूर्ति भी लगातार चौथे दिन ठप रही। बृहस्पतिवार को शाम 4 बजे कुछ फीडर चालू हो पाए। जल संस्थान के सहायक अभियंता उमेश कुमार ने बताया कि शहर को पानी देने वाले अतर्रा रोड के दो ट्यूबवेल अभी भी नहीं चालू हुए हैं। इस रोड पर छह ट्यूबवेल हैं। बबेरू, तिंदवारी रोड के नलकूप और केन नदी का इंटेकवेल को चालू करने का काम चल रहा था। ट्यूबवेल न चलने से टैंकरों को आज भी पानी नहीं मिला। गिने-चुने स्थानों पर ही पानी के टैंकर पहुंचाए गए।
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