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दीपक की गिरफ्तारी के बाद रफा दफा की गुपचुप कोशिशें
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तिंदवारी/बांदा। जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की आत्महत्या के बाद मुख्य आरोपी पति भाजपा नेता डॉ. दीपक सिंह गौर की नाटकीय ढंग से दूसरे दिन गिरफ्तारी के बाद इस हाई प्रोफाइल घटना को ठंडा करने की गुपचुप कोशिशें शुरू हो गईं हैं। मृतका और आरोपी दोनों ही सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े होने के चलते बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दखल दे रहीं हैं। पति की गिरफ्तारी के बाद आरोपी ससुर, सास और जेठ को फिलहाल गिरफ्तारी से बचाने की कवायदें चल रहीं हैं।
शहर के इंदिरा नगर निवासी भाजपा नेत्री श्वेता सिंह गौर ने घर में ही बंद कमरे में फांसी लगा ली थी। हालांकि उसके पिता और भाई ने हत्या बताते हुए पति दीपक सहित ससुर रिटायर्ड डीआईजी राजबहादुर सिंह, सास पुष्पा देवी और जेठ अधिवक्ता धनंजय सिंह पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। शुक्रवार को आरोपी पति को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर जेल भेज दिया।
उधर, भाजपा के कई माननीय इसे ठंडा करने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें कुछ हद तक सफलता भी मिली है। शनिवार को यह चर्चा रही कि आरोपी ससुर, सास व जेठ को जेल जाने से बचाने के लिए श्वेता के मायके वालों की ओर से हलफनामा देने की तैयारी है। हालांकि इसकी पुष्टि फिलहाल किसी पक्ष ने नहीं की है। इस घराने से मित्रता रखने वाले कुछ बसपा नेता भी मामले को ठंडा करने में अपना किरदार निभा रहे हैं। उधर, इस बारे में श्वेता के भाई ओमकार सिंह ने शनिवार को शाम फोन पर कुछ भी स्पष्ट बताने से परहेज किया।
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बांदा/तिंदवारी। मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद तीनों बेटियां अविष्का, गौरी और मिट्टो फिलहाल इंदिरा नगर स्थित अपने घर पर ही ननिहाल और अन्य खानदानियों के साथ हैं। हालांकि बेटियों का गुस्सा पिता पर अभी भी ठंडा नहीं हुआ है।
मां का साया छीन लेने का दोष पिता और बाबा पर ही लगा रहीं हैं। ननिहाल के लोग उनको लगातार सामान्य करने में जुटे हुए हैं। सदमें में डूबीं तीनों बेटियां फिलहाल स्कूल भी नहीं जा रहीं। उधर, सबसे छोटी बेटी अविष्का को दोनों बड़ी बहनें और माता-पिता बेटे की तरह लाड़ दुलार देते थे। भइया दूज पर प्रतीकात्मक रूप में दोनों बड़ी बहनें अविष्का को टीका लगातीं थीं।
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शहर के इंदिरा नगर निवासी भाजपा नेत्री श्वेता सिंह गौर ने घर में ही बंद कमरे में फांसी लगा ली थी। हालांकि उसके पिता और भाई ने हत्या बताते हुए पति दीपक सहित ससुर रिटायर्ड डीआईजी राजबहादुर सिंह, सास पुष्पा देवी और जेठ अधिवक्ता धनंजय सिंह पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। शुक्रवार को आरोपी पति को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर जेल भेज दिया।
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उधर, भाजपा के कई माननीय इसे ठंडा करने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें कुछ हद तक सफलता भी मिली है। शनिवार को यह चर्चा रही कि आरोपी ससुर, सास व जेठ को जेल जाने से बचाने के लिए श्वेता के मायके वालों की ओर से हलफनामा देने की तैयारी है। हालांकि इसकी पुष्टि फिलहाल किसी पक्ष ने नहीं की है। इस घराने से मित्रता रखने वाले कुछ बसपा नेता भी मामले को ठंडा करने में अपना किरदार निभा रहे हैं। उधर, इस बारे में श्वेता के भाई ओमकार सिंह ने शनिवार को शाम फोन पर कुछ भी स्पष्ट बताने से परहेज किया।
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बांदा/तिंदवारी। मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद तीनों बेटियां अविष्का, गौरी और मिट्टो फिलहाल इंदिरा नगर स्थित अपने घर पर ही ननिहाल और अन्य खानदानियों के साथ हैं। हालांकि बेटियों का गुस्सा पिता पर अभी भी ठंडा नहीं हुआ है।
मां का साया छीन लेने का दोष पिता और बाबा पर ही लगा रहीं हैं। ननिहाल के लोग उनको लगातार सामान्य करने में जुटे हुए हैं। सदमें में डूबीं तीनों बेटियां फिलहाल स्कूल भी नहीं जा रहीं। उधर, सबसे छोटी बेटी अविष्का को दोनों बड़ी बहनें और माता-पिता बेटे की तरह लाड़ दुलार देते थे। भइया दूज पर प्रतीकात्मक रूप में दोनों बड़ी बहनें अविष्का को टीका लगातीं थीं।