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Banda News: थोक दवा लाइसेंस में अनुभव की शर्त, इसी ढील का उठाया फायदा
Tue, 08 Sep 2026 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:51 PM IST
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बांदा। दवाओं के थोक विक्रय लाइसेंस के लिए दूसरे मेडिकल स्टोर से अनुभव प्रमाणपत्र हासिल कर थोक दवा बिक्री का लाइसेंस लिया जाता है।
इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कोडीनयुक्त सिरप की अवैध बिक्री के मामले में मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता समेत उसके साथियों और रिश्तेदारों के नाम पर थोक दवा बिक्री के लाइसेंस जारी कराए गए। इनमें प्रियांशु के हमीरपुर निवासी बहनोई रविंद्र गुप्ता के नाम जारी लाइसेंस भी शामिल है।
तीन सितंबर को बिसंडा थाना क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे कट के पास एसटीएफ और पुलिस ने 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद किया था। इसे अतर्रा ले जाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि सिरप की खेप हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर निवासी रविंद्र गुप्ता के नाम संचालित ओम मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस पर मंगाई गई थी। रविंद्र मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता का बहनोई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम अतर्रा में श्याम मेडिकल एजेंसी का थोक दवा बिक्री लाइसेंस है। सह आरोपी रोहित और प्रवीण उर्फ लकी के परिवारीजनों के नाम भी थोक दवा बिक्री के लाइसेंस होने की बात सामने आई है। पुलिस और औषधि विभाग अब इन लाइसेंसों और इनके जरिए हुई दवाओं की खरीद-बिक्री की जांच कर रहे हैं।
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थोक दवा बिक्री का लाइसेंस हासिल करने में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता के साथ दवा कारोबार में अनुभव को आधार बनाया जाता है। आरोप है कि इसी व्यवस्था में दूसरे मेडिकल स्टोर से अनुभव हासिल कर लाइसेंस बनवाने का रास्ता निकाला जा रहा है। ऐसे में बिना खुद फार्मासिस्ट हुए भी थोक दवा कारोबार का लाइसेंस हासिल किया जा सकता है।
मामले में औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने बताया कि जो भी नियम हैं, उन्हीं के अनुसार मेडिकल स्टोर के लाइसेंस पर अपनी आख्या देते हैं। लाइसेंस जारी करने का अधिकार ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी यानी डीएलए के पास है।
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फुटकर लाइसेंस में फार्मासिस्ट जरूरी
दवा बिक्री के लिए मुख्य रूप से फुटकर और थोक विक्रय के अलग-अलग लाइसेंस जारी होते हैं। फुटकर मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता होती है। नियम के मुताबिक संबद्ध फार्मासिस्ट को दवा बिक्री के दौरान मौजूद रहना चाहिए।
हालांकि, कई मेडिकल स्टोरों पर संचालकों द्वारा खुद दवाएं बेचने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। वहीं थोक दवा बिक्री के लाइसेंस पर सीधे मरीजों को फुटकर दवा बेचने की अनुमति नहीं होती।
थोक विक्रेता केवल वैध फुटकर दवा विक्रय लाइसेंस रखने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों को दवाएं बेच सकता है। अब कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद थोक लाइसेंस व्यवस्था की निगरानी और उसके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कोडीनयुक्त सिरप की अवैध बिक्री के मामले में मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता समेत उसके साथियों और रिश्तेदारों के नाम पर थोक दवा बिक्री के लाइसेंस जारी कराए गए। इनमें प्रियांशु के हमीरपुर निवासी बहनोई रविंद्र गुप्ता के नाम जारी लाइसेंस भी शामिल है।
तीन सितंबर को बिसंडा थाना क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे कट के पास एसटीएफ और पुलिस ने 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद किया था। इसे अतर्रा ले जाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि सिरप की खेप हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर निवासी रविंद्र गुप्ता के नाम संचालित ओम मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस पर मंगाई गई थी। रविंद्र मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता का बहनोई है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम अतर्रा में श्याम मेडिकल एजेंसी का थोक दवा बिक्री लाइसेंस है। सह आरोपी रोहित और प्रवीण उर्फ लकी के परिवारीजनों के नाम भी थोक दवा बिक्री के लाइसेंस होने की बात सामने आई है। पुलिस और औषधि विभाग अब इन लाइसेंसों और इनके जरिए हुई दवाओं की खरीद-बिक्री की जांच कर रहे हैं।
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थोक दवा बिक्री का लाइसेंस हासिल करने में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता के साथ दवा कारोबार में अनुभव को आधार बनाया जाता है। आरोप है कि इसी व्यवस्था में दूसरे मेडिकल स्टोर से अनुभव हासिल कर लाइसेंस बनवाने का रास्ता निकाला जा रहा है। ऐसे में बिना खुद फार्मासिस्ट हुए भी थोक दवा कारोबार का लाइसेंस हासिल किया जा सकता है।
मामले में औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने बताया कि जो भी नियम हैं, उन्हीं के अनुसार मेडिकल स्टोर के लाइसेंस पर अपनी आख्या देते हैं। लाइसेंस जारी करने का अधिकार ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी यानी डीएलए के पास है।
फुटकर लाइसेंस में फार्मासिस्ट जरूरी
दवा बिक्री के लिए मुख्य रूप से फुटकर और थोक विक्रय के अलग-अलग लाइसेंस जारी होते हैं। फुटकर मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता होती है। नियम के मुताबिक संबद्ध फार्मासिस्ट को दवा बिक्री के दौरान मौजूद रहना चाहिए।
हालांकि, कई मेडिकल स्टोरों पर संचालकों द्वारा खुद दवाएं बेचने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। वहीं थोक दवा बिक्री के लाइसेंस पर सीधे मरीजों को फुटकर दवा बेचने की अनुमति नहीं होती।
थोक विक्रेता केवल वैध फुटकर दवा विक्रय लाइसेंस रखने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों को दवाएं बेच सकता है। अब कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद थोक लाइसेंस व्यवस्था की निगरानी और उसके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।