{"_id":"41-208250","slug":"Banda-208250-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेतन में करोड़ों खर्च ‘वन’ जहां के तहां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेतन में करोड़ों खर्च ‘वन’ जहां के तहां
Banda
Updated Sun, 30 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। वन विभाग हर साल यहां अपने अफसरों और कर्मचारियों पर वेतन के रूप मेें भारी भरकम पैसा खर्च कर रहा है, लेकिन जनपद में वन क्षेत्र जहां के तहां हैं। वनों का प्रतिशत मात्र 1.22 है। लगभग इतना ही प्रतिशत एक दशक पूर्व भी था।
जनसूचना अधिकार अधिनियम में प्रभागीय वनाधिकारी ने प्रवास सोसाइटी निदेशक/सचिव आशीष सागर को उपलब्ध कराई सूचना मेें यह जानकारी दी है। बताया है कि वर्ष 2013-14 मेें बांदा वन प्रभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर कुल 3,61,52 ,875 रुपये खर्च हुए हैं। यह भी बताया है कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 (अक्तूबर तक) में जैव विविधता कार्यक्रम पर 75 हजार रुपये खर्च कर डाले गए हैं, लेकिन वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने की मंशा से मनाए जाने वाले वन्य जीव सप्ताह के लिए शासन ने धेला बराबर बजट नहीं दिया। आशीष सागर ने कहा कि पर्यावरण दिवस मनाना तभी सार्थक होगा जब हरेक आदमी कम से कम 16 पौधे लगाए क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन मेें इतने ही पौधों की आक्सीजन ले लेता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये सालाना वेतन खर्च के बाद भी बांदा जनपद में वन्य क्षेत्र 1.22 फीसदी से आगे नहीं बढ़े हैं।
विज्ञापन
जनसूचना अधिकार अधिनियम में प्रभागीय वनाधिकारी ने प्रवास सोसाइटी निदेशक/सचिव आशीष सागर को उपलब्ध कराई सूचना मेें यह जानकारी दी है। बताया है कि वर्ष 2013-14 मेें बांदा वन प्रभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर कुल 3,61,52 ,875 रुपये खर्च हुए हैं। यह भी बताया है कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 (अक्तूबर तक) में जैव विविधता कार्यक्रम पर 75 हजार रुपये खर्च कर डाले गए हैं, लेकिन वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने की मंशा से मनाए जाने वाले वन्य जीव सप्ताह के लिए शासन ने धेला बराबर बजट नहीं दिया। आशीष सागर ने कहा कि पर्यावरण दिवस मनाना तभी सार्थक होगा जब हरेक आदमी कम से कम 16 पौधे लगाए क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन मेें इतने ही पौधों की आक्सीजन ले लेता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये सालाना वेतन खर्च के बाद भी बांदा जनपद में वन्य क्षेत्र 1.22 फीसदी से आगे नहीं बढ़े हैं।
विज्ञापन