{"_id":"41-184187","slug":"Banda-184187-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़े बेटियों के कदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़े बेटियों के कदम
Banda
Updated Tue, 03 Jun 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उर्दू तालीम के लिए मुस्लिम बाहुल्य विश्व प्रसिद्ध हथौरा बना मिशाल
बांदा। शिक्षक की कड़ी मेहनत, लगन और प्रेरणा मुस्लिम बाहुल्य गांव हथौरा के लिए मिशाल बन गई। उर्दू तालीम के लिए देश-विदेश में मशहूर हथौरा गांव में जहां आजादी के बाद से लड़कियां बोर्ड परीक्षा देने स्कूल तक नहीं पहुंची। वहीं इस साल राजकीय हाईस्कूल के 73 फीसदी रिजल्ट ने ग्रामीणों का दामन खुशियों से भर दिया। 40 में 37 छात्राओं ने सर्वोच्च अंक के साथ हाईस्कूल उत्तीर्ण की तो अभिभावकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब सभी ने अपनी बेटियों को ऊंची तालीम देने की ठान ली है।
बड़ोखर ब्लाक में बबेरू रोड पर शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हथौरा गांव शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत पिछड़े क्षेत्र में आता है। हालांकि यहां स्थित दारुल उलूम जामिया अरबिया विश्वविद्यालय उर्दू तामील के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। यहां अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, केन्या, कनाडा समेत देश के कोने-कोने से छात्र उर्दू की तालीम हासिल कर रहे हैं। मुस्लिम बाहुल्य गांव होने के नाते यहां ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को उर्दू तालीम के बाद घर बैठा देते हैं। बच्चे पांचवीं या आठवीं के बाद मां-बाप के साथ काम में हाथ बंटाने लगते हैं। हथौरा में वर्ष 2012-13 में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना हुई। प्रधानाचार्य के रूप में कुसुम स्वामी और सहायक अध्यापकों में नागेंद्र, उम्मे तमीम और प्रशांत द्विवेदी की तैनाती हुई।
टीचर प्रशांत द्विवेदी ने घर-घर जाकर छात्र-छात्राओं को स्कूल भेजने की गुजारिश की। लगातार आठ-आठ घंटे कड़ी मेहनत कर छात्र-छात्राओं को इस तरह गढ़ दिया कि उन्होंने यहां नया इतिहास रच दिया। विद्यालय का रिजल्ट पहली बार 73 फीसदी गया। यहां अध्ययनरत 65 छात्र-छात्राओं में 48 ने हाईस्कूल परीक्षा सम्मान के साथ उत्तीर्ण की। टीचर की मेहनत का मान रखते हुए 40 छात्राओं में 37 ने बोर्ड परीक्षा में अपनी प्रतिभा साबित कर दिखाई। 20 छात्राएं प्रथम श्रेणी में पास हुईं। पहले जहां अभिभावक छात्राओं को स्कूल भेजना जरूरी नहीं समझते थे। इस परिणाम से उनके भी विचारों में बदलाव आ गया। अब सभी अपनी लाड़लियों को उच्च शिक्षा के लिए स्कूल भेजना चाहते हैं।
विज्ञापन
ये हैं मेधावी छात्राएं
निरंजना (73 फीसदी के साथ टॉपर), रुक्सार अंजुम (71), रूबा खातून (70), असरा खातून (67), आरिफा (67.5), गुड़िया (66), पुष्पा (67.8), अंजना (64.5), निशा (61), करीहा (66) तथा छात्रों में असाद, खुब्बू, तस्लीम, सलमान, संदीप ने 70 फीसदी के ऊपर अंक अर्जित किया।
बेटियों को दिलाएंगे उच्च शिक्षा
बांदा। विद्यालय प्रबंधक समिति अध्यक्ष संतोष कुमार, अभिभावक अय्याज भाई, एजाज अहमद व अतीक अंसारी बेटियों की सफलता पर गौराविन्त महसूस कर रहे हैं। कहा कि वे संकुचित मानसिकता के चलते बच्चियों को ज्यादा से ज्यादा आठवीं के बाद घरों पर बैठा देते थे। लेकिन शिक्षकों की मेहनत उनके लिए प्रेरणा बन गई है। अब वे बेटियों को हर हालत में ऊंची तामील दिलाएंगे।
प्रेरणा लें सभी टीचर : डीआईओएस
बांदा। डीआईओएस एनडी वर्मा ने शिक्षकों की मेहनत और छात्र-छात्राओं की सफलता पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए बच्चों को प्रेरित करने वाले टीचरों व अभिभावकों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अन्य टीचरों को भी इससे प्रेरणा लेने की नसीहत दी।
विज्ञापन
बांदा। शिक्षक की कड़ी मेहनत, लगन और प्रेरणा मुस्लिम बाहुल्य गांव हथौरा के लिए मिशाल बन गई। उर्दू तालीम के लिए देश-विदेश में मशहूर हथौरा गांव में जहां आजादी के बाद से लड़कियां बोर्ड परीक्षा देने स्कूल तक नहीं पहुंची। वहीं इस साल राजकीय हाईस्कूल के 73 फीसदी रिजल्ट ने ग्रामीणों का दामन खुशियों से भर दिया। 40 में 37 छात्राओं ने सर्वोच्च अंक के साथ हाईस्कूल उत्तीर्ण की तो अभिभावकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब सभी ने अपनी बेटियों को ऊंची तालीम देने की ठान ली है।
बड़ोखर ब्लाक में बबेरू रोड पर शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हथौरा गांव शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत पिछड़े क्षेत्र में आता है। हालांकि यहां स्थित दारुल उलूम जामिया अरबिया विश्वविद्यालय उर्दू तामील के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। यहां अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, केन्या, कनाडा समेत देश के कोने-कोने से छात्र उर्दू की तालीम हासिल कर रहे हैं। मुस्लिम बाहुल्य गांव होने के नाते यहां ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को उर्दू तालीम के बाद घर बैठा देते हैं। बच्चे पांचवीं या आठवीं के बाद मां-बाप के साथ काम में हाथ बंटाने लगते हैं। हथौरा में वर्ष 2012-13 में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना हुई। प्रधानाचार्य के रूप में कुसुम स्वामी और सहायक अध्यापकों में नागेंद्र, उम्मे तमीम और प्रशांत द्विवेदी की तैनाती हुई।
विज्ञापन
टीचर प्रशांत द्विवेदी ने घर-घर जाकर छात्र-छात्राओं को स्कूल भेजने की गुजारिश की। लगातार आठ-आठ घंटे कड़ी मेहनत कर छात्र-छात्राओं को इस तरह गढ़ दिया कि उन्होंने यहां नया इतिहास रच दिया। विद्यालय का रिजल्ट पहली बार 73 फीसदी गया। यहां अध्ययनरत 65 छात्र-छात्राओं में 48 ने हाईस्कूल परीक्षा सम्मान के साथ उत्तीर्ण की। टीचर की मेहनत का मान रखते हुए 40 छात्राओं में 37 ने बोर्ड परीक्षा में अपनी प्रतिभा साबित कर दिखाई। 20 छात्राएं प्रथम श्रेणी में पास हुईं। पहले जहां अभिभावक छात्राओं को स्कूल भेजना जरूरी नहीं समझते थे। इस परिणाम से उनके भी विचारों में बदलाव आ गया। अब सभी अपनी लाड़लियों को उच्च शिक्षा के लिए स्कूल भेजना चाहते हैं।
विज्ञापन
ये हैं मेधावी छात्राएं
निरंजना (73 फीसदी के साथ टॉपर), रुक्सार अंजुम (71), रूबा खातून (70), असरा खातून (67), आरिफा (67.5), गुड़िया (66), पुष्पा (67.8), अंजना (64.5), निशा (61), करीहा (66) तथा छात्रों में असाद, खुब्बू, तस्लीम, सलमान, संदीप ने 70 फीसदी के ऊपर अंक अर्जित किया।
बेटियों को दिलाएंगे उच्च शिक्षा
बांदा। विद्यालय प्रबंधक समिति अध्यक्ष संतोष कुमार, अभिभावक अय्याज भाई, एजाज अहमद व अतीक अंसारी बेटियों की सफलता पर गौराविन्त महसूस कर रहे हैं। कहा कि वे संकुचित मानसिकता के चलते बच्चियों को ज्यादा से ज्यादा आठवीं के बाद घरों पर बैठा देते थे। लेकिन शिक्षकों की मेहनत उनके लिए प्रेरणा बन गई है। अब वे बेटियों को हर हालत में ऊंची तामील दिलाएंगे।
प्रेरणा लें सभी टीचर : डीआईओएस
बांदा। डीआईओएस एनडी वर्मा ने शिक्षकों की मेहनत और छात्र-छात्राओं की सफलता पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए बच्चों को प्रेरित करने वाले टीचरों व अभिभावकों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अन्य टीचरों को भी इससे प्रेरणा लेने की नसीहत दी।