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प्रचार में पिछड़ रही भाजपा, नेताओं में बेचैनी
Banda
Updated Tue, 25 Mar 2014 05:31 AM IST
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बांदा। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने में सिर्फ एक हफ्ता रहने के बाद भी भाजपा हाईकमान द्वारा बांदा-चित्रकूट के लिए प्रत्याशी घोषित न किए जाने से अन्य दलों के साथ भाजपा नेताओं में भी बेचैनी है। आए दिन बाहरी नेताओं के नाम की अफवाहें उड़ने से टिकट की लाइन में लगे स्थानीय भाजपा नेता और बेचैन हैं।
सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सपा और बसपा तो महीनोें पूर्व ही उम्मीदवार तय कर चुके थे। उनके प्रत्याशियों ने दो जनपदों मेें बिखरे संसदीय क्षेत्र में प्रचार और भ्रमण का एक चरण पूरा भी कर लिया है। दूसरी तरफ प्रमुख दल भाजपा का प्रत्याशी अब तक तय न हो पाने से चुनाव प्रचार परवान नहीं चढ़ पा रहा। राजनीति के पंडित अपनी गणित की गोटें भी नहीं बिठा पा रहे।
प्रत्याशी की घोषणा में हो रही लेट-लतीफी पर भाजपा जिलाध्यक्ष बालमुकुंद शुक्ल की दलील है कि हाईकमान सोच समझकर प्रत्याशी का चयन कर रहा है। उन्होेंने स्वीकारा की हम प्रचार में पिछड़ रहे हैं। लेकिन जो भी प्रत्याशी आएगा वह मतदाताओं का पसंदीदा होगा। जिलाध्यक्ष ने बेबाकी से स्वीकारा कि बाहरी प्रत्याशी हुआ तो टिकट की लाइन मेें लगे स्थानीय नेताओं को तकलीफ होगी। लेकिन हाईकमान का फैसला सर्वोपरि मानकर प्रचार में सब जुट जाएंगे।
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भाजपा से टिकट के एक और दावेदार पूर्व विधायक राजकुमार शिवहरे का कहना है कि बाहरी हो या स्थानीय। प्रत्याशी जोरदार होगा। हाईकमान जिसे तय करेगा कार्यकर्ता उसके साथ चलेंगे। उनका कहना है कि प्रचार और जनसंपर्क के लिए एक माह की अवधि काफी है।
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सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सपा और बसपा तो महीनोें पूर्व ही उम्मीदवार तय कर चुके थे। उनके प्रत्याशियों ने दो जनपदों मेें बिखरे संसदीय क्षेत्र में प्रचार और भ्रमण का एक चरण पूरा भी कर लिया है। दूसरी तरफ प्रमुख दल भाजपा का प्रत्याशी अब तक तय न हो पाने से चुनाव प्रचार परवान नहीं चढ़ पा रहा। राजनीति के पंडित अपनी गणित की गोटें भी नहीं बिठा पा रहे।
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प्रत्याशी की घोषणा में हो रही लेट-लतीफी पर भाजपा जिलाध्यक्ष बालमुकुंद शुक्ल की दलील है कि हाईकमान सोच समझकर प्रत्याशी का चयन कर रहा है। उन्होेंने स्वीकारा की हम प्रचार में पिछड़ रहे हैं। लेकिन जो भी प्रत्याशी आएगा वह मतदाताओं का पसंदीदा होगा। जिलाध्यक्ष ने बेबाकी से स्वीकारा कि बाहरी प्रत्याशी हुआ तो टिकट की लाइन मेें लगे स्थानीय नेताओं को तकलीफ होगी। लेकिन हाईकमान का फैसला सर्वोपरि मानकर प्रचार में सब जुट जाएंगे।
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भाजपा से टिकट के एक और दावेदार पूर्व विधायक राजकुमार शिवहरे का कहना है कि बाहरी हो या स्थानीय। प्रत्याशी जोरदार होगा। हाईकमान जिसे तय करेगा कार्यकर्ता उसके साथ चलेंगे। उनका कहना है कि प्रचार और जनसंपर्क के लिए एक माह की अवधि काफी है।