रोजी की तलाश में 14,000 का पलायन

Banda Updated Wed, 23 Oct 2013 05:41 AM IST
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बांदा। रोजी-रोटी की तलाश में अपना घर छोड़कर महानगरों को पलायन पर रोक नहीं लग पा रही। सरकार की तमाम योजनाएं भी गरीबों को उनके ही गांव या बस्ती में रोजगार देने में फ्लाप साबित हुई हैं। साढ़े छह सौ से ज्यादा परिवार बरसात में भी घर वापस नहीं लौटे। बारिश खत्म होते ही लगभग 14 हजार परिवार फिर बड़े शहरों को पलायन कर गए हैं। हालांकि दीवाली के मद्देनजर इनके इसी माह लौटने के आसार हैं।
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कमाई के लिए महानगरों में पलायन बुंदेलखंड और खासकर बांदा का पुराना रोग है। दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि में लाखों बुंदेलखंडी मजदूर मजदूरी करके परिवार पाल रहे हैं। बारिश में काम बंद हो जाने से यह वापस घर-गांव लौट आते हैं। लेकिन अबकी बारिश में भी साढ़े छह सैकड़ा से भी ज्यादा परिवार नहीं लौटे। हाल ही में सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के तहत घर-घर गई टीमों की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ। टीमों की रिपोर्ट के मुताबिक पूरे जनपद में 659 मकानों में ताले पड़े मिले। इसके अलावा 14,293 घरों में भी परिवार बाहर गए हुए हैं। हालांकि इनके इसी माह लौट आने की संभावना जताई गई है। ताला जडे़ मकानों में नरैनी क्षेत्र में 141, बबेरू में 102, जसपुरा में 55, महुआ में 70, जौरही में 78, बिसंडा में 99, कमासिन में 33, तिंदवारी में 56, अतर्रा में नौ और बांदा में 16 मकान शामिल हैं। इनके अलावा इसी माह लौटने की संभावना वाले परिवारों में नरैनी में 2422, बबेरू में 2059, जसपुरा में 1125, महुआ में 1157, जौरही में 1420, बिसंडा में 1916, कमासिन में 1564, तिंदवारी में 1477, बांदा में 992 और अतर्रा में 161 घर शामिल हैं।
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