{"_id":"41-156073","slug":"Banda-156073-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"दीवाली आते ही ‘शगुन’ का शौक तेज! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दीवाली आते ही ‘शगुन’ का शौक तेज!
Banda
Updated Wed, 23 Oct 2013 05:41 AM IST
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बांदा। जुआ कई अपराधों की जननी माना जाता है लेकिन दीवाली आते ही इस ‘शगुन’ का शौक तेज हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, समूचे जनपद में एक सैकड़ा से ज्यादा जुए की ऐसी फड़ें रोज जमती हैं जिनमें दो करोड़ रुपये से ज्यादा की हार-जीत होती है। बांदा शहर और उसके इर्द-गिर्द लगने वाली लगभग दो दर्जन फड़ाें में एक करोड़ से ज्यादा के दांव लगाए जाते हैं।
चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा शहर में जुआ खेलने और खिलाने में तमाम ऐसी हस्तियां गुपचुुुुप ढ़ग से शामिल हैं जिन्हें आमतौर पर प्रतिष्ठित समझा जाता है। वकील, व्यापारी, कर्मचारी, मजदूर, छात्र सभी इस रोग में जकड़े हैं। कुछ ने तो इसे अपना पेशा बना लिया है।
उधर, पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) आशुतोष शुक्ल ने कहा कि जुए की फड़ें जिन क्षेत्रों में होंगी वहां के चौकी/थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। फड़ों में छापे मारकर जुआरियों को दबोचा जाएगा। उन्हें जेल भेजा जाएगा। पुलिस लगातार छापे मारेगी।
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बांदा शहर में कुछ प्रमुख जुए की फड़ें
1. कंचनपुरवा- यहां खेत और नदी किनारे फड़ जमती है। कुुछ घर भी जुआखाना है। पड़ोसी जनपदों से भी जुआरी यहां आते हैं। व्यापारी और अन्य वर्ग के बड़े जुआरियों की यह पसंदीदा फड़ है। 10 से 15 लाख रुपये रोजाना के दांव लगते हैं।
2. कचहरी परिसर- छुट्टी के समय सन्नाटे में वकीलों के सूने पड़े बस्ते जुए की फड़ से आबाद हो जाते हैं। कुछ वकील भी इसके शौकीन हैं। शिक्षक, मजदूर पेशा और कुछ कर्मचारी भी यहां रोज दांव आजमाते हैं। लगभग 10 लाख रुपये की हार-जीत होती है।
3. मुचियाना- इस फड़ में व्यापारी, सर्राफ और बर्तन व्यापारी इत्यादि जुआ खेलते हैं। फड़ का अड्डा रोजाना आसपास कहीं बदल दिया जाता है। 5 से 10 लाख रुपये के दांव लगते हैं।
4. खुटला राजघाट- यहां मध्यम वर्गी और पेशेवर जुआरियों का जमघट होता है। दुकानदार और आसपास के बिगडै़ल युवक भी दांव आजमाते हैं। लगभग एक लाख रुपये की हार-जीत होती है।
5. पुलिस लाइन रोड- पुलिस की नाक तले यहां कई स्थानों पर जुए की फड़े सजती हैं। विकास भवन और औद्योगिक आस्थान में कर्मचारी भी हाथ आजमाते हैं। लगभग दो लाख रुपये के दांव लगते हैं।
6. रेवई (कबरई थाना क्षेत्र)- यह जुए की चर्चित और बड़ी फड़ है। जुआ माफिया और पुराने पेशेवरोें की निगरानी में चल रही इस फड़ में व्यापारी, कारोबारी, किसान इत्यादि आते हैं और भारी भरकम रकमों के दांव लगाते हैं पड़ोसी जनपद महोबा और छतरपुर के जुआरी भी इस फड़ के मुरीद हैं। लगभग 50 लाख रुपये की हार-जीत होती है।
इसके अलावा शहर सीमा के नजदीक चमरौटी, पोड़ाबाग, गुलाब बाग, प्रागी तालाब रामलीला मैदान, मंडी समिति परिसर, धीरज नगर, निम्नीपार (कांशीराम कालोनी), गंछा गांव में मोबाइल टावर के पास भी जुआ होता है।
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फड़ों के ‘तक्का’
फड़ संचालन में तक्कों का बड़ा महत्वपूर्ण रोल है। फड़ संचालक मामूली पढ़े-लिखे और बेरोजगार युवकों को इस काम में लगाते हैं। उन्हें पगार के साथ मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराते हैं। यह तक्का फड़ से काफी दूर उस मार्ग पर कहीं अड्डा जमा लेते हैं जहां से फड़ तक पुलिस के पहुंचने का अंदेशा होता है। पुलिस वाहन आता देख मोबाइल फोन के जरिए फड़ संचालक को सूचना दे देते हैं। नतीजे में जब तक पुलिस फड़ तक पहुंची है तब तक वहां सब कुछ सिमट चुका होता है। पुलिस की दबिश से पहले सटीक सूचना देने पर तक्का को अक्सर इनाम भी मिलता है।
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जुआरियों के कोड वर्ड
चिड़िया आ रही है- यानि दो सिपाही धूम रहे हैं।
बाज दिखाई दे रहा है- यानि चौकी इंचार्ज या कोतवाल आ रहा है।
शेर आ रहा है- यानि पुलिस फोर्स दबिश देने आ रही है।
पूजा शुरू हो गई- यानि जुआ चालू हो गया।
कीर्तन में चलना है- यानि जुआ खेलने चलना है।
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चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा शहर में जुआ खेलने और खिलाने में तमाम ऐसी हस्तियां गुपचुुुुप ढ़ग से शामिल हैं जिन्हें आमतौर पर प्रतिष्ठित समझा जाता है। वकील, व्यापारी, कर्मचारी, मजदूर, छात्र सभी इस रोग में जकड़े हैं। कुछ ने तो इसे अपना पेशा बना लिया है।
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उधर, पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) आशुतोष शुक्ल ने कहा कि जुए की फड़ें जिन क्षेत्रों में होंगी वहां के चौकी/थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। फड़ों में छापे मारकर जुआरियों को दबोचा जाएगा। उन्हें जेल भेजा जाएगा। पुलिस लगातार छापे मारेगी।
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बांदा शहर में कुछ प्रमुख जुए की फड़ें
1. कंचनपुरवा- यहां खेत और नदी किनारे फड़ जमती है। कुुछ घर भी जुआखाना है। पड़ोसी जनपदों से भी जुआरी यहां आते हैं। व्यापारी और अन्य वर्ग के बड़े जुआरियों की यह पसंदीदा फड़ है। 10 से 15 लाख रुपये रोजाना के दांव लगते हैं।
2. कचहरी परिसर- छुट्टी के समय सन्नाटे में वकीलों के सूने पड़े बस्ते जुए की फड़ से आबाद हो जाते हैं। कुछ वकील भी इसके शौकीन हैं। शिक्षक, मजदूर पेशा और कुछ कर्मचारी भी यहां रोज दांव आजमाते हैं। लगभग 10 लाख रुपये की हार-जीत होती है।
3. मुचियाना- इस फड़ में व्यापारी, सर्राफ और बर्तन व्यापारी इत्यादि जुआ खेलते हैं। फड़ का अड्डा रोजाना आसपास कहीं बदल दिया जाता है। 5 से 10 लाख रुपये के दांव लगते हैं।
4. खुटला राजघाट- यहां मध्यम वर्गी और पेशेवर जुआरियों का जमघट होता है। दुकानदार और आसपास के बिगडै़ल युवक भी दांव आजमाते हैं। लगभग एक लाख रुपये की हार-जीत होती है।
5. पुलिस लाइन रोड- पुलिस की नाक तले यहां कई स्थानों पर जुए की फड़े सजती हैं। विकास भवन और औद्योगिक आस्थान में कर्मचारी भी हाथ आजमाते हैं। लगभग दो लाख रुपये के दांव लगते हैं।
6. रेवई (कबरई थाना क्षेत्र)- यह जुए की चर्चित और बड़ी फड़ है। जुआ माफिया और पुराने पेशेवरोें की निगरानी में चल रही इस फड़ में व्यापारी, कारोबारी, किसान इत्यादि आते हैं और भारी भरकम रकमों के दांव लगाते हैं पड़ोसी जनपद महोबा और छतरपुर के जुआरी भी इस फड़ के मुरीद हैं। लगभग 50 लाख रुपये की हार-जीत होती है।
इसके अलावा शहर सीमा के नजदीक चमरौटी, पोड़ाबाग, गुलाब बाग, प्रागी तालाब रामलीला मैदान, मंडी समिति परिसर, धीरज नगर, निम्नीपार (कांशीराम कालोनी), गंछा गांव में मोबाइल टावर के पास भी जुआ होता है।
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फड़ों के ‘तक्का’
फड़ संचालन में तक्कों का बड़ा महत्वपूर्ण रोल है। फड़ संचालक मामूली पढ़े-लिखे और बेरोजगार युवकों को इस काम में लगाते हैं। उन्हें पगार के साथ मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराते हैं। यह तक्का फड़ से काफी दूर उस मार्ग पर कहीं अड्डा जमा लेते हैं जहां से फड़ तक पुलिस के पहुंचने का अंदेशा होता है। पुलिस वाहन आता देख मोबाइल फोन के जरिए फड़ संचालक को सूचना दे देते हैं। नतीजे में जब तक पुलिस फड़ तक पहुंची है तब तक वहां सब कुछ सिमट चुका होता है। पुलिस की दबिश से पहले सटीक सूचना देने पर तक्का को अक्सर इनाम भी मिलता है।
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जुआरियों के कोड वर्ड
चिड़िया आ रही है- यानि दो सिपाही धूम रहे हैं।
बाज दिखाई दे रहा है- यानि चौकी इंचार्ज या कोतवाल आ रहा है।
शेर आ रहा है- यानि पुलिस फोर्स दबिश देने आ रही है।
पूजा शुरू हो गई- यानि जुआ चालू हो गया।
कीर्तन में चलना है- यानि जुआ खेलने चलना है।