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रसिन बांध की पिचिंग बही
Banda
Updated Sun, 11 Aug 2013 05:35 AM IST
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बदौसा (बांदा)। चौधरी चरण सिंह रसिन बांध के ध्वस्त होने का सिलसिला थम नहीं रहा। रिसाव और दरारों के बाद अब सोमवार को मुख्य फाटक के दक्षिणी सिरे की बाहरी पिचिंग बारिश के पानी में बह गई। बांध को बचाने के लिए 12 मीटर चौड़ी खाई को बांध कर्मियों ने रेत भरी बोरियों से बचाने की कवायद शुर कर दी हैं।
बुंदेलखंड पैकेज से बनाए गए रसिन बांध की लागत 76 करोड़ से अधिक है। इसकी भंडारण क्षमता 16.23 मिलियन घन मीटर है। सोमवार को दोपहर पत्थरों से बंधी पिचिंग तेज बारिश में पत्थरों समेत बह गई। खबर मिलने पर सिंचाई विभाग अभियंताओं ने कर्मचारियों को हुक्म दिया की बालू भरी बोरियों से ध्वस्त पिचिंग को पाटकर बांध को बचाएं। कर्मचारियों ने लगभग 600 बालू भरी बोरियां क्षतिग्रस्त पिचिंग पर लगाई हैं। इसके बाद भी गड्ढा भरा नहीं जा सका है। अधिशासी अभियंता लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि बरसात बाद इसका पुन: निर्माण कराया जाएगा।
गौरतलब है कि बांध का मुख्य फाटक बंद होने के बाद भी पानी के फौव्वारे छूटते रहते हैं। कड़ैली नदी डायवर्जन जल नियंत्रक खंड पिछले साल बह गए थे। कड़ैली नदी का पानी रोकने के लिए बांध में बड़ी सुरंग बनाई गई है। ग्राम प्रधान देवेंद्र श्रीवास ने बताया कि आए दिन बांध की पिचिंग धंस रही है। अभियंता सूचना के बाद भी यहां नहीं आते।
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बुंदेलखंड पैकेज से बनाए गए रसिन बांध की लागत 76 करोड़ से अधिक है। इसकी भंडारण क्षमता 16.23 मिलियन घन मीटर है। सोमवार को दोपहर पत्थरों से बंधी पिचिंग तेज बारिश में पत्थरों समेत बह गई। खबर मिलने पर सिंचाई विभाग अभियंताओं ने कर्मचारियों को हुक्म दिया की बालू भरी बोरियों से ध्वस्त पिचिंग को पाटकर बांध को बचाएं। कर्मचारियों ने लगभग 600 बालू भरी बोरियां क्षतिग्रस्त पिचिंग पर लगाई हैं। इसके बाद भी गड्ढा भरा नहीं जा सका है। अधिशासी अभियंता लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि बरसात बाद इसका पुन: निर्माण कराया जाएगा।
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गौरतलब है कि बांध का मुख्य फाटक बंद होने के बाद भी पानी के फौव्वारे छूटते रहते हैं। कड़ैली नदी डायवर्जन जल नियंत्रक खंड पिछले साल बह गए थे। कड़ैली नदी का पानी रोकने के लिए बांध में बड़ी सुरंग बनाई गई है। ग्राम प्रधान देवेंद्र श्रीवास ने बताया कि आए दिन बांध की पिचिंग धंस रही है। अभियंता सूचना के बाद भी यहां नहीं आते।
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