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72 मीसा बंदियों को पुलिस की क्लीन चिट
Banda
Updated Tue, 08 Jan 2013 05:30 AM IST
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बांदा। आत्मदाह की चेतावनी और तमाम हाय तौबा के बाद फिलहाल मीसा बंदी लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन भुगतान नहीं हो पा रहा। हालांकि पुलिस ने जनपद के 72 मीसा बंदियों को उनका अपराधिक इतिहास न होने की क्लीन चिट देते हुए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।
मीसा/डीआईआर बंदियों को प्रदेश सरकार ने 3000 रुपए प्रति माह पेंशन दिए जाने की घोषणा की थी। बांदा जनपद में 80 से अधिक लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं। प्रदेश में सपा सरकार गठन हुए 10 माह बीत गए, लेकिन इन सेनानियों को अब तक पेंशन का धेला नहीं मिला है। पिछले हफ्ते लोकतंत्र रक्षक सेनानी नौशाद अली भारतीय ने पेंशन न मिलने पर आत्मदाह की कोशिश की थी। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने समझा-बुझाकर उन्हें मना लिया था। साथ ही आश्वासन दिया था कि बहुत जल्द सेनानियों की पेंशन उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी।
लेकिन आश्वासन को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी पेंशन राशि सेनानियों के खाते में नहीं पहुंची। प्रशासन अभी तक यह कहता रहा कि पुलिस से सेनानियों के अपराधिक इतिहास संबंधी आख्या नहीं मिली है। लेकिन पुलिस अधीक्षक ने पिछले माह जिलाधिकारी को 72 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की सूची के साथ रिपोर्ट भेजी है कि इन राजनीतिक बंदियों के विरुद्ध कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। इस सूची में आत्मदाह की चेतावनी देने वाले नौशाद अली भारतीय और पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस सहित 72 लोग शामिल हैं। सेनानियों ने प्रशासन के इस रवैए को सपा विरोधी बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के विरुद्ध अधिकारी काम कर रहे हैं।
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मीसा/डीआईआर बंदियों को प्रदेश सरकार ने 3000 रुपए प्रति माह पेंशन दिए जाने की घोषणा की थी। बांदा जनपद में 80 से अधिक लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं। प्रदेश में सपा सरकार गठन हुए 10 माह बीत गए, लेकिन इन सेनानियों को अब तक पेंशन का धेला नहीं मिला है। पिछले हफ्ते लोकतंत्र रक्षक सेनानी नौशाद अली भारतीय ने पेंशन न मिलने पर आत्मदाह की कोशिश की थी। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने समझा-बुझाकर उन्हें मना लिया था। साथ ही आश्वासन दिया था कि बहुत जल्द सेनानियों की पेंशन उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी।
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लेकिन आश्वासन को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी पेंशन राशि सेनानियों के खाते में नहीं पहुंची। प्रशासन अभी तक यह कहता रहा कि पुलिस से सेनानियों के अपराधिक इतिहास संबंधी आख्या नहीं मिली है। लेकिन पुलिस अधीक्षक ने पिछले माह जिलाधिकारी को 72 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की सूची के साथ रिपोर्ट भेजी है कि इन राजनीतिक बंदियों के विरुद्ध कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। इस सूची में आत्मदाह की चेतावनी देने वाले नौशाद अली भारतीय और पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस सहित 72 लोग शामिल हैं। सेनानियों ने प्रशासन के इस रवैए को सपा विरोधी बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के विरुद्ध अधिकारी काम कर रहे हैं।
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