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मीसा बंदियों का मांगा ‘इतिहास’
Banda
Updated Fri, 04 Jan 2013 05:30 AM IST
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बांदा। सम्मान राशि (पेंशन) न मिलने पर मीसा बंदी लोकतंत्र रक्षक सेनानी की आत्मदाह की धमकी और आंदोलन के बाद सेनानियों को पेंशन देने की प्रक्रिया ने तेजी पकड़ ली है। पेंशन की राह में रोड़ा बनी थानों की पुलिस को अपर जिला मजिस्ट्रेट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि मीसा बंदियों का आपराधिक इतिहास अगर है तो तत्काल भेजें। साथ ही शस्त्र संबंधित मुकदमों की आख्या भी तत्काल तलब की है। बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में अपर जिलाधिकारी केएन सिंह ने सभी थानाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में लोकतंत्र रक्षक निवास कर रहे हैं उनका वर्ष 2006 से आपराधिक इतिहास संबंधी रिपोर्ट तत्काल प्रशासन को भेजें। यह चरित्र आख्या मिलने के बाद भी पेंशन का भुगतान किया जाना है। अपर जिलाधिकारी ने थानाध्यक्षों से यह भी कहा है कि शस्त्र लाइसेंस से संबंधित जो मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चल रहे हैं उनके बारे में भी बिंदुवार आख्या तत्काल भेजें। ताकि उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल किया जा सके। ब्यूरो
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