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एनआरएचएम घोटाले में चार्जशीट से विभाग में खलबली

Thu, 26 Oct 2017 11:47 PM IST
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:47 PM IST
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एनआरएचएम घोटाले में चार्जशीट से विभाग में खलबली
अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। एनआरएचएम घोटाले में फंसे यहां के पूर्व सीएमओ, चीफ फार्मेसिस्ट और दवाएं आपूर्ति करने वाली फर्म पर सीबीआई अदालत में आरोप तय होने के बाद यहां स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। सीबीआई कोर्ट 28 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी। यहां के दस्तावेज कई माह पहले ही सीबीआई अपने कब्जे में ले चुकी है। 12 लाख 96 हजार रुपये की दवाओं की खरीद में घोटाले की जांच हुई है।

सीबीआई ने इसी हफ्ते गाजियाबाद में स्थित सीबीआई की विशेष कोर्ट में बांदा के तत्कालीन सीएमओ (परिवार कल्याण) डा.रामकृपाल आर्य, एसीएमओ (स्टोर) डा. जगदीश प्रसाद और चीफ फार्मासिस्ट ओमकारनाथ सिंह यादव सहित आपूर्तिकर्ता फर्म मेसर्स डैफोड्रिल्स फार्मेसी लिमिटेड और इस फर्म के डायरेक्टर सुरेंद्र चौधरी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है। बताते हैं कि आरोप पत्र में उपरोक्त अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग करते हुए साजिश रच करके दवा कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए लगभग 6 लाख रुपये का घोटाला करने की बात कही गई है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी सुनवाई कर रहे हैं।
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यह घोटाला वर्ष 2011 में हुआ। तब बसपा की सरकार थी। बांदा के बाबू सिंह कुशवाहा स्वास्थ्य विभाग के मंत्री थे। (वह भी इस मामले में फंसे हुए हैं)। उस समय बसपा सरकार ने सीएमओ के दो पद सृजित कर दिए थे। एक सीएमओ (परिवार कल्याण) का पद अलग बना दिया था। उसमें उन दिनों डा.आरके आर्या सीएमओ थे। अपर सीएमओ (स्टोर) पद पर डा.जगदीश प्रसाद तैनात थे। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत करीब 12 लाख 96 हजार रुपये की दवाएं आयरन फोलिस एसिड टेबलेट व एल्बेंडा जायल टेबलेट खरीदी गईं थीं।
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आरोप था कि यह बाजार से अधिक दरों पर खरीदी गईं। मेरठ की डेफोड्रिल्स कंपनी ने दवाओं की आपूर्ति की थी। यह दवाएं सभी ब्लाकों के पीेएचसी के जरिए स्कूलों में बंटवाई जानी थी। उस समय चीफ फार्मेसिस्ट ओमकारनाथ सिंह यादव थे। पिछले वर्ष सीबीआई टीम ने यहां आकर सीएमओ कार्यालय में जांच-पड़ताल की थी और संबंधित अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए थे।

अब चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद माना जा रहा है कि सीबीआई कोर्ट का शिकंजा एनआरएचएम के इन आरोपियों पर कस सकता है। उधर, यह भी कहा जा रहा है कि बांदा सीएमओ कार्यालय में कुछ लिपिक आदि भी इसमें शामिल थे। फिलहाल वह बचे हुए हैं।

-बांदा के दो पूर्व सीएमओ और फार्मेसिस्ट फंसे
-वर्ष 2011 में खरीदी गई थीं 12.96 लाख की दवाएं
-सीबीआई जांच में अब दाखिल हुए आरोप पत्र
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