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ग्रामीण बैंकों को जो भी मिला सुप्रीम कोर्ट की देन
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बांदा। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन में बैंककर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं और भत्ते का श्रेय सुप्रीम कोर्ट को दिया गया। कहा कि जो भी मिल रहा है, उसी की बदौलत। भारत सरकार प्रवर्तक बैंकों की भूमिका नकारात्मक रही है। पहली मार्च से पेंशन नहीं स्वीकृत होती तो केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की जाएगी। प्रदर्शन और घेराव होगा।
शनिवार को ऑफीसर्स/एसोसिएशन की संयु़क्त बैठक में एनएफआरआरबीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सगुण शुक्ला ने अरेबिया के संघर्ष और एनआईटी अवार्ड से लेकर पेंशन सुविधा तक प्राप्त करने के सफर का विस्तृत ब्यौरा दिया। कहा कि ग्रामीण बैंकों की स्थापना से लेकर आज तक जो भी ग्रामीण बैंक कर्मियों को सुविधाएं, भत्ते, वेतन समानता या पेंशन का हक मिला है वह सुप्रीम कोर्ट से ही मिला है।
प्रवर्तन बैंकों की भूमिका नकारात्मक रही है। अभी भी पेंशन देने में देरी हो रही है। यह सिर्फ प्रवर्तन बैंकों की लापरवाही और ईर्ष्या को दर्शाती है। कहा कि पहली मार्च से पेंशन सुविधा न दिए जाने पर ग्रामीण बैंकों के सामने सेवानिवृत्त स्टाफ प्रदर्शन व घेराव करेगा।
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बैठक का संचालन संरक्षक उमाकांत अवस्थी ने किया। कार्यकारिणी सदस्य आरके मिश्रा, स्टेट फेडरेशन महामंत्री विमल शुक्ला, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के पीके चौरसिया, एसपी शुक्ला, बिंदा प्रसाद, कृष्णानंद त्रिपाठी, चैन सिंह रावत ने भी संबोधित किया।
महेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह, आशीष त्रिपाठी, चतुर सिंह, आरएस परमार, पुलकित सचान, बालेंद्र, रविकेश शुक्ला, राकेश पाल, अरुण यादव, सीमाराम यादव आदि शामिल रहे। हाल ही में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी रामबाबू श्रीवास्तव, एसपी सिंह और अजय को सम्मानित कर विदाई दी गई। बांदा यूनिक अध्यक्ष आरएस परमार ने सभी का आभार जताते हुए प्रमुख छह मांगों की जानकारी दी।
एक अप्रैल से ग्रामीण बैंकों का विलय
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक और आर्यावर्त ग्रामीण बैंक का 1 अप्रैल को विलय हो जाएगा। उस दिन से यह बैंक आर्यावर्त बैंक कहलाएगा। शनिवार को बैंक ऑफीसर्स/इंप्लाइज यूनियन की संयुक्त बैठक में दोनों ग्रामीण बैंकों की ट्रेड यूनियनों के आपसी तालमेल और भावी रणनीति पर चर्चा हुई।
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शनिवार को ऑफीसर्स/एसोसिएशन की संयु़क्त बैठक में एनएफआरआरबीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सगुण शुक्ला ने अरेबिया के संघर्ष और एनआईटी अवार्ड से लेकर पेंशन सुविधा तक प्राप्त करने के सफर का विस्तृत ब्यौरा दिया। कहा कि ग्रामीण बैंकों की स्थापना से लेकर आज तक जो भी ग्रामीण बैंक कर्मियों को सुविधाएं, भत्ते, वेतन समानता या पेंशन का हक मिला है वह सुप्रीम कोर्ट से ही मिला है।
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प्रवर्तन बैंकों की भूमिका नकारात्मक रही है। अभी भी पेंशन देने में देरी हो रही है। यह सिर्फ प्रवर्तन बैंकों की लापरवाही और ईर्ष्या को दर्शाती है। कहा कि पहली मार्च से पेंशन सुविधा न दिए जाने पर ग्रामीण बैंकों के सामने सेवानिवृत्त स्टाफ प्रदर्शन व घेराव करेगा।
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बैठक का संचालन संरक्षक उमाकांत अवस्थी ने किया। कार्यकारिणी सदस्य आरके मिश्रा, स्टेट फेडरेशन महामंत्री विमल शुक्ला, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के पीके चौरसिया, एसपी शुक्ला, बिंदा प्रसाद, कृष्णानंद त्रिपाठी, चैन सिंह रावत ने भी संबोधित किया।
महेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह, आशीष त्रिपाठी, चतुर सिंह, आरएस परमार, पुलकित सचान, बालेंद्र, रविकेश शुक्ला, राकेश पाल, अरुण यादव, सीमाराम यादव आदि शामिल रहे। हाल ही में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी रामबाबू श्रीवास्तव, एसपी सिंह और अजय को सम्मानित कर विदाई दी गई। बांदा यूनिक अध्यक्ष आरएस परमार ने सभी का आभार जताते हुए प्रमुख छह मांगों की जानकारी दी।
एक अप्रैल से ग्रामीण बैंकों का विलय
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक और आर्यावर्त ग्रामीण बैंक का 1 अप्रैल को विलय हो जाएगा। उस दिन से यह बैंक आर्यावर्त बैंक कहलाएगा। शनिवार को बैंक ऑफीसर्स/इंप्लाइज यूनियन की संयुक्त बैठक में दोनों ग्रामीण बैंकों की ट्रेड यूनियनों के आपसी तालमेल और भावी रणनीति पर चर्चा हुई।