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विवेचना में विलंब पर सीजेएम का एसपी को आदेश
Updated Wed, 29 Aug 2018 11:53 PM IST
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बांदा। विवेचनाओं में अत्यधिक लेट लतीफी पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक बार फिर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर आपत्ति जताई है। पूर्व में दिए गए आदेश का पालन कर 5 सितंबर तक न्यायालय को आख्या भेजने के लिए कहा है।
बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खलीकुज्जमां ने पुलिस अधीक्षक बांदा को भेजे पत्र में कहा है कि इसके पूर्व 2 अगस्त 2018 को इस न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर अनुपालन के लिए कहा गया था। संबंधित केस में विवेचना 9 साल से अब तक पूरी नहीं हुई है।
विवेचक ने वर्ष 2009 में शहर कोतवाली में दर्ज एनसीआर केस का पहला पर्चा 10 नवंबर 2017 को काटा। दूसरा पर्चा एक अगस्त 18 को काटा। कहा है कि न्यायालय वर्ष 2015 से इस केस की प्रगति आख्या तलब कर रहा है, लेकिन विवेचना में कोई प्रगति नहीं हुई है। न ही आख्या भेजी गई है।
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इस पर न्यायालय ने आदेश दिया था कि जांच गठित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करके न्यायालय को कृत कार्रवाई से अवगत कराया जाए। पर एक माह का समय बीत जाने के बाद भी न्यायालय को अनुपालन आख्या नहीं भेजी गई है। यह आपत्तिजनक है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा है कि दो अगस्त को जारी हुए आदेश का अनुपालन करके आख्या 5 सितंबर तक उनके न्यायालय को प्रेषित करें।
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बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खलीकुज्जमां ने पुलिस अधीक्षक बांदा को भेजे पत्र में कहा है कि इसके पूर्व 2 अगस्त 2018 को इस न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर अनुपालन के लिए कहा गया था। संबंधित केस में विवेचना 9 साल से अब तक पूरी नहीं हुई है।
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विवेचक ने वर्ष 2009 में शहर कोतवाली में दर्ज एनसीआर केस का पहला पर्चा 10 नवंबर 2017 को काटा। दूसरा पर्चा एक अगस्त 18 को काटा। कहा है कि न्यायालय वर्ष 2015 से इस केस की प्रगति आख्या तलब कर रहा है, लेकिन विवेचना में कोई प्रगति नहीं हुई है। न ही आख्या भेजी गई है।
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इस पर न्यायालय ने आदेश दिया था कि जांच गठित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करके न्यायालय को कृत कार्रवाई से अवगत कराया जाए। पर एक माह का समय बीत जाने के बाद भी न्यायालय को अनुपालन आख्या नहीं भेजी गई है। यह आपत्तिजनक है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा है कि दो अगस्त को जारी हुए आदेश का अनुपालन करके आख्या 5 सितंबर तक उनके न्यायालय को प्रेषित करें।