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एलआईसी पर 60 हजार रुपये जुर्माना

Mon, 25 Oct 2021 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 11:42 PM IST
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60 thousand rupees fine on LIC
बांदा। बीमा कंपनी द्वारा प्रीमियम लेना बंद कर देने के मामले में जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने एलआईसी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना किया है। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि शहर के विकास भवन के पीछे स्थित कॉलोनी निवासी राकेश कुमार जैन (जिला बचत अधिकारी) ने जुलाई 2013 में कैलाश नाथ सोनकर, शाखा प्रबंधक एलआईसी, मिथलेश कुमार वरिष्ठ मंडल प्रबंधक एलआईसी सिविल लाइंस, प्रयागराज आदि को पक्षकार बनाते हुए उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था।
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इसमें बताया कि उसने एलआईसी, बांदा से अनमोल जीवन पॉलिसी 20 वर्षों की ली थी। 3470 रुपये प्रतिवर्ष प्रीमियम था। बदले में जीवन का बीमा सामान्य मौत पर पांच लाख रुपये और दुर्घटना में 10 लाख रुपये बीमा कंपनी उत्तराधिकारी को देगी।
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आरोप था कि बीमा कंपनी ने 2009 से प्रीमियम लेना बंद कर दिया। उसे 2011 को मौखिक रूप से बताया कि कंप्यूटर डाटा में त्रुटि से डाटा बदल गया है और 20 वर्ष के स्थान पर 18 वर्ष हो गई। कंपनी का यह कृत्य गैर जिम्मेदाराना है।
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याचिका में चार लाख रुपये का मानसिक तनाव और 2024 तक पॉलिसी को अनवरत चालू रखने का अनुरोध किया। उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष तूफानी प्रसाद और अनिल कुमार चतुर्वेदी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद एलआईसी को पॉलिसी को प्रीमियम की राशि 3470 लेकर 24 दिसंबर 2024 तक जारी रखने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक तनाव के लिए 50 हजार रुपये और 10 हजार रुपये मुकदमा दायर करने पर हुए खर्च के लिए एक माह के अंदर अदा करने को कहा।
बीमित कार के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर ऑन डैमेज से संबंधित क्लेम देने में एचडीएफसी इर्गो जनरल इंश्योरेंस आनाकानी कर रही थी। इस पर जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग अध्यक्ष ने नोटिस जारी की तो कंपनी ने 10,000 का चेक फोरम में जमा कर सुलह कर लिया। बांदा शहर की सुधा पुरवार ने दिसंबर 2015 में एचडीएफसी इर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पक्षकार बनाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

इसमें कहा था कि उनकी कार इयान हुडंई मोटर्स वाहन संख्या यूपी 90, 9500 कंप्रिहेंसिव बीमा से बीमित थी, जो 20 सितंबर 2014 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई। ऑन डैमेज से संबंधित क्लेम देने में कंपनी आनाकानी कर रही थी। फोरम द्वारा नोटिस किया गया तो कंपनी ने 10,000 रुपये का चेक जमा कर सुलह कर ली। रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि अध्यक्ष तूफानी प्रसाद व सदस्य अनिल चतुर्वेदी की सहमति से अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह चौधरी को चेक दे दिया गया।
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