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सरकार को सिर्फ 4500, माफिया हो रहे मालामाल
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 03 Nov 2016 11:27 PM IST
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बांदा के नरैनी क्षेत्र में ओवरलोड बालू ट्रकों की लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। माफिया के मकड़जाल में फंसकर केन नदी की बालू अब ‘लाल सोना’ बन गई है। बालू कारोबारी दिन-रात मालामाल हो रहे हैं। सरकारी खजाना कंगाल हो रहा है। मात्र 4500 रुपये रॉयल्टी वाली 30 घन मीटर बालू खदान पर ही 28 हजार रुपये की बेची जा रही है, यानी छह गुना से भी ज्यादा वसूला जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ खदान का रजिस्टर इसका मूक गवाह है। इसका बंटवारा अफसर, पुलिस, परिवहन और सिंडीकेट से लेकर लखनऊ तक हो रहा है।
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किसी जमाने में बालू कौड़ियों के भाव मिलती थी। पिछली बसपा सरकार के बाद इसमें शुरू हुई अंधेरगर्दी थामे नहीं थमी। मौजूदा सरकार में इसे और पंख लगे हैं। बांदा जिले की सभी खदानों पर पट्टे की अवधि पूरी हो जाने से बालू के खनन पर रोक लगी है।
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बाधित अवधि वाले पट्टों पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। ऐसे में वैध ढंग से बालू के खनन पर पूरी तरह रोक है। इसके बाद भी रात-दिन अंधाधुंध खनन जारी है। अफसर, पुलिस, खनिज और परिवहन विभाग अपने हिस्से की एकमुश्त हिस्सेदारी वसूल लेने के बाद धड़ल्ले से अवैध खनन और शहर से निकल रहे ओवरलोड ट्रकों की ओर से आंखें मूंदे हैं।
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उधर, अफसरों की जेब भरकर उनका मुंह बंद कर देने के बाद बालू माफिया मनचाही दरों पर बालू बेच रहे हैं। खदान के रजिस्टर से खुलासा हुआ है कि यहां प्रत्येक दस चक्का ट्रक से 28 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। एक ट्रक में करीब 30 घन मीटर बालू आती है।
रकों के नंबर और ली जा रही रकम रजिस्टर में दर्ज है। उधर, सरकारी रॉयल्टी 150 रुपये प्रति घन मीटर है। इस हिसाब से दस चक्का ट्रक में मात्र 4500 रुपये की बालू आती है, लेकिन वसूली 28 हजार हो रही है। प्रभारी जिलाधिकारी गंगाराम का कहना है कि बांदा जिले में कोई खनन नहीं हो रहा। सीमा से जुड़े मध्य प्रदेश से बालू आ रही है।