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42 दिनों में मौत हो तो मेडिकल डेथ
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 06 Jan 2016 11:38 PM IST
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बांदा। मातृ मृत्यु समीक्षा कार्यशाला में मातृ
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मृत्यु दर कम करने के लिए सरकारी सुविधाओं के साथ गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
दिया गया। एडी ने मंडल में मातृ मृत्यु दर में कमी का दावा किया।
स्वास्थ्य अपर निदेशक कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में एडी स्वास्थ्य डॉ. शिव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि यदि प्रसूता की प्रसव होने के बाद 42 दिनों में मृत्यु होती है तो इसे मेडिकल डेथ माना जाएगा।
मातृ मृत्यु पर निगरानी रखने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण से प्रसव होने के बाद तक मृत्यु की सूचना देने पर आशा बहू को दो सौ रुपये दिए जाएंगे।
आशा व एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताआ हर माह मातृ मृत्यु के संबंध में रिपोर्ट कर जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजें। मंडलीय परियोजना प्रबंधक डॉ. शिव प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक डॉ. एनडी शर्मा, डॉ. राजन प्रसाद सिंह, सीएमओ बांदा डॉ. एके सिंह समेत चारो जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी व चिकित्सक मौजूद रहे।
स्वास्थ्य अपर निदेशक कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में एडी स्वास्थ्य डॉ. शिव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि यदि प्रसूता की प्रसव होने के बाद 42 दिनों में मृत्यु होती है तो इसे मेडिकल डेथ माना जाएगा।
मातृ मृत्यु पर निगरानी रखने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण से प्रसव होने के बाद तक मृत्यु की सूचना देने पर आशा बहू को दो सौ रुपये दिए जाएंगे।
आशा व एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताआ हर माह मातृ मृत्यु के संबंध में रिपोर्ट कर जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजें। मंडलीय परियोजना प्रबंधक डॉ. शिव प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक डॉ. एनडी शर्मा, डॉ. राजन प्रसाद सिंह, सीएमओ बांदा डॉ. एके सिंह समेत चारो जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी व चिकित्सक मौजूद रहे।