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09 बीएनडीजे-5
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:08 AM IST
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बांदा। स्कूल न जाने वाली किशोरियों और बच्चों को ही बाल विकास विभाग पोषाहार देगा। पोषाहार चार माह से बंद था। अब इसे नए सिरे से शुरू किया जा रहा है।
दिल्ली की कंपनी ने ब्लाकों में स्थित परियोजना कार्यालय में लड्डूू और दलिया की खेप पहुंचा दी है। इसी माह में ही कुपोषित बच्चों और किशोरियों समेत धात्री व गर्भवती महिलाओं को नए मेन्यू के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार का वितरण होगा।
जिले में 1570 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार वितरित होता है। पिछले चार माह से पोषाहार की आपूर्ति ठप थी। सरकार ने अब इसे फिर शुरू किया है। इस बार पंजीरी व अन्य सामग्री नहीं है।
नए मेन्यू में प्रीमिक्स लड्डूू, नमकीन व मीठा दलिया दिया जाएगा। इसकी आपूर्ति के लिए दिल्ली की फूड प्रोडेक्टस कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरतजहां ने पोषाहार आपूर्ति करने वाली संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि पोषाहार वितरण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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उन्होंने यह भी बताया कि अब पोषाहार उन्हीं 14 साल तक के बच्चों व किशोरियों को मिलेगा, जो स्कूल न जाते हों, यानी ड्राप आउट बच्चों को ही यह पोषाहार मिलेगा। पहले इस उम्र के सभी बच्चों और किशोरियों को पोषाहार मिलता था।
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दिल्ली की कंपनी ने ब्लाकों में स्थित परियोजना कार्यालय में लड्डूू और दलिया की खेप पहुंचा दी है। इसी माह में ही कुपोषित बच्चों और किशोरियों समेत धात्री व गर्भवती महिलाओं को नए मेन्यू के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार का वितरण होगा।
जिले में 1570 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार वितरित होता है। पिछले चार माह से पोषाहार की आपूर्ति ठप थी। सरकार ने अब इसे फिर शुरू किया है। इस बार पंजीरी व अन्य सामग्री नहीं है।
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नए मेन्यू में प्रीमिक्स लड्डूू, नमकीन व मीठा दलिया दिया जाएगा। इसकी आपूर्ति के लिए दिल्ली की फूड प्रोडेक्टस कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरतजहां ने पोषाहार आपूर्ति करने वाली संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि पोषाहार वितरण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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उन्होंने यह भी बताया कि अब पोषाहार उन्हीं 14 साल तक के बच्चों व किशोरियों को मिलेगा, जो स्कूल न जाते हों, यानी ड्राप आउट बच्चों को ही यह पोषाहार मिलेगा। पहले इस उम्र के सभी बच्चों और किशोरियों को पोषाहार मिलता था।