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Banda News: 115 साल पुराना गंगऊ बांध बचाने के लिए 3.34 करोड़ खर्च

Thu, 20 Jun 2024 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jun 2024 12:33 AM IST
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3.34 crore spent to save 115 year old Gangau Dam
बांदा। 115 साल पुराने जर्जर हो चुके बुंदेलखंड के महत्वपूर्ण गंगऊ बांध को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने तीन करोड़ 34 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। मानसून से पहले बांध के जर्जर फाटकों (गेट) को दुरुस्त किया गया है। इसके साथ ही अन्य मरम्मत के कार्य भी कराए गए हैं। विभाग का दावा है कि अब बांध के गेट से पानी का रिसाव नहीं होगा। बाढ़ में फाटक टूटने का खतरा नहीं रहेगा।
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केन नदी की मुख्य जल धारा में बेहद मजबूत आरपार दीवार ( क्रेस्ट वाल) खड़ी करके उस पर लोहे के आठ फीट ऊंचे फाटक लगाए गए हैं। मानसून के समय गेटों को दीवार पर गिरा (लिटा) दिया जाता है। नदी का पानी कस्टवाल के ऊपर से गुजरकर केन नदी में गिरता रहता है। वर्षा काल खत्म होते ही अक्टूबर के दूसरे पखवारे में यह फाटक पुनः खड़े कर दिए जाते हैं। इससे बांध में पानी का भंडार हो जाता है। बांध के फाटकों की मरम्मत वर्ष 2005 के बाद नहीं हुई। यह काफी जर्जर हो गए थे। बाढ़ में टूट कर बह जाने का अंदेशा था।
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सिंचाई विभाग ने सभी फालिंग और स्लूइस गेट की मरम्मत कराई है। कुछ बदल कर नए लगाए हैं। इसके अलावा क्रस्टवाल के नीचे नदी में लगभग 700 मीटर लंबी कंक्रीट जर्जर हो गई दीवार की मरम्मत की गई है। सिंचाई विभाग का दावा है कि अब फाटकों से पानी का रिसाव नहीं होगा और पानी का स्टोर सुरक्षित रहेगा।
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बुंदेलखंड की जीवनरेखा है यह बांध
सीमावर्ती मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित गंगऊ बांध की देखरेख, संचालन और मरम्मत आदि बांदा के सिंचाई विभाग प्रखंड- तृतीय के जिम्मे है। इस बांध का निर्माण वर्ष 1915 में हुआ था। केन नदी में बने बांध में आरपार कुल 262 फालिंग गेट और पांच स्लूइस गेट हैं। इन्ही गेटों से नदी का पानी रोका और स्टोर किया जाता है। इसके पानी से बांदा जनपद के 77 से ज्यादा गांवों में केन नहर से सिंचाई होती है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के पन्ना जनपद में बरकोला, महुवा पुरवा, बोरा आदि नहर व राजबहों को पानी मिलता है। यहीं से एमपी के सतना जिले कई गांवों को पानी कि दिया जा रहा है। पूरे वर्ष समय-समय पर मस्टर रोल के अनुसार गेट खोलकर नहर के जरिए बांदा, छत्तरपुर व पन्ना जिलों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।

सिल्ट से घट रही भंडारण क्षमता


गंगऊ बांध की तलहटी पर लगातार जमती जा रही सिल्ट से बांध की भंडारण क्षमता लगातार घटती जा रही है। स्थापना के समय इसकी क्षमता लगभग 3550 लाख घन फीट( क्यूबिक ) पानी थी। अब यह घटकर आधी के आसपास रह गई है। यही स्थिति केन पर बने दूसरे बांध रनगंवा की भी है। इसी तरह 1906 में बना बरियारपुर बांध भी सिल्ट जमा होने से काफी कम क्षमता का रह गया है।


वर्ष 2005 से गेटों की मरम्मत नहीं हुई थी। इस वर्ष विभागीय मद से यह कार्य कराया गया है। बांध में पांच स्लूइस गेट और 262 फालिंग शटर गेट हैं। कंक्रीट दीवार और पिचिंग कार्य भी कराए गए हैं।

वेद प्रकाश गौड़, गंगऊ बांध प्रभारी
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