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ग्रामीणों को प्रेरित कर रोकेंगे खुले में शौच
Updated Tue, 20 Jun 2017 12:19 AM IST
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बांदा। ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए अब ‘स्वच्छाग्राही’ की मदद ली जाएगी। बिना किसी मानदेय या शुल्क के यह स्वयंसेवी ग्रामीणों को खुले में शौच से रोकेंगे। अलबत्ता प्रेरित करके शौचालय बनवाने पर उन्हें 75 रुपये प्रति शौचालय प्रेरणा राशि दी जाएगी। मुक्त गांवों में ‘गौरव यात्रा’ का आयोजन होगा।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में शौचालय बनवाने और खुले में शौच से ग्रामीणों को रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘स्वच्छाग्राही’ नियुक्त होंगे। पंचायती राज निदेशालय (उत्तर प्रदेश शासन) व मिशन निदेशक विजय किरन आनंद ने सभी ग्राम प्रधानों से स्वच्छाग्रहियों की नियुक्ति के लिए कहा है।
इसमें ढिलाई न बरतने को खबरदार किया है। सरकारी, अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी व्यक्ति भी स्वच्छाग्राही की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। निदेशक ने बताया है कि अशुद्ध पेयजल, मानव मल का अनुचित ढंग से निस्तारण व गंदे वातावरण से जल-जनित बीमारियां पैदा होती हैं। लाखों व्यक्ति अकाल मृत्यु को प्राप्त करते हैं।
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इनमें सबसे ज्यादा संख्या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। गांधी जयंती यानी दो अक्तूबर 2014 से शुरू हुए मिशन के तहत दो अक्तूबर 2018 तक पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त घोषित करने का सरकार ने निर्णय लिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने में ग्राम प्रधान सक्रिय भूमिका निभाएं।
निदेशक ने कहा कि शौच मुक्त ग्राम घोषित कर ‘गौरव यात्रा’ का भी आयोजन कराएं। उधर, अर्थ एवं संख्याधिकारी आरडी यादव ने बताया कि स्वच्छाग्राही समाजसेवा पद है। इन्हें प्रति शौचालय बनवाने पर 75 रुपये भुगतान किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए निगरानी समितियां भी गठित होंगी। पुरुष, महिलाओं और बच्चों की अलग-अलग टोलियां बनेंगी।
-गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराएंगे ‘स्वच्छाग्राही’
-शौचालय बनवाने पर 75 रुपये मिलेगी प्रेरणा राशि
-मुक्त गांवों में निकाली जाएगी ‘गौरव यात्रा’
अमर उजाला ब्यूरो
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में शौचालय बनवाने और खुले में शौच से ग्रामीणों को रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘स्वच्छाग्राही’ नियुक्त होंगे। पंचायती राज निदेशालय (उत्तर प्रदेश शासन) व मिशन निदेशक विजय किरन आनंद ने सभी ग्राम प्रधानों से स्वच्छाग्रहियों की नियुक्ति के लिए कहा है।
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इसमें ढिलाई न बरतने को खबरदार किया है। सरकारी, अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी व्यक्ति भी स्वच्छाग्राही की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। निदेशक ने बताया है कि अशुद्ध पेयजल, मानव मल का अनुचित ढंग से निस्तारण व गंदे वातावरण से जल-जनित बीमारियां पैदा होती हैं। लाखों व्यक्ति अकाल मृत्यु को प्राप्त करते हैं।
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इनमें सबसे ज्यादा संख्या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। गांधी जयंती यानी दो अक्तूबर 2014 से शुरू हुए मिशन के तहत दो अक्तूबर 2018 तक पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त घोषित करने का सरकार ने निर्णय लिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने में ग्राम प्रधान सक्रिय भूमिका निभाएं।
निदेशक ने कहा कि शौच मुक्त ग्राम घोषित कर ‘गौरव यात्रा’ का भी आयोजन कराएं। उधर, अर्थ एवं संख्याधिकारी आरडी यादव ने बताया कि स्वच्छाग्राही समाजसेवा पद है। इन्हें प्रति शौचालय बनवाने पर 75 रुपये भुगतान किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए निगरानी समितियां भी गठित होंगी। पुरुष, महिलाओं और बच्चों की अलग-अलग टोलियां बनेंगी।
-गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराएंगे ‘स्वच्छाग्राही’
-शौचालय बनवाने पर 75 रुपये मिलेगी प्रेरणा राशि
-मुक्त गांवों में निकाली जाएगी ‘गौरव यात्रा’
अमर उजाला ब्यूरो