{"_id":"680e72045802b257b00cd0d7","slug":"285-crores-were-spent-on-cleaning-the-model-villages-but-the-filth-remained-as-it-was-banda-news-c-212-1-sknp1008-125633-2025-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: मॉडल गांवों की सफाई में खर्च हुए साढ़े 28 करोड़, गंदगी ज्यों की त्यों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: मॉडल गांवों की सफाई में खर्च हुए साढ़े 28 करोड़, गंदगी ज्यों की त्यों
विज्ञापन
गांव में फैली गंदगी।
- फोटो : संवाद
बांदा। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत माॅडल गांवों में साढ़े 28 करोड़ से अधिक खर्च कर दिए गए। इसके बाद भी सफाई व्यवस्था धड़ाम है। डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन के लिए खरीदे गए रिक्शा आरआरसी सेंटर में महीनों से खड़े हैं। कूडा कलेक्शन न होने से आरआरसी सेंटर भी शोपीस बने हुए हैं। माॅडल गांवों की गलियों में गंदगी का अंबार है।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2022-23 में 89 ग्राम पंचायतों को माॅडल बनाने के लिए चयनित किया गया था। शासन ने यहां पर नाली निर्माण, कूड़ा कलेक्शन के लिए ई-रिक्शा, आरआरसी सेंटर का निर्माण आदि के लिए 28.51 करोड़ बजट जारी किया था। ग्राम पंचायतों ने बजट को तो ठिकाने लगा दिया, लेकिन ग्राम पंचायतों में न कूड़ा उठ रहा और न ही उसका निस्तारण। कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा आरआरसी सेंटर में खड़े हैं।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि शासन ने ई-रिक्शा संचालकों के मानदेय की कोई व्यवस्था नहीं की है। गांव वाले ई-रिक्शा संचालकों को 50 रुपये महीना भी नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कुछ दिन चलने के बाद ई-रिक्शा बंद हो गए। जब कूडा का उठान ही नहीं हो रहा है तो आरआरसी सेंटर में कूड़े का निस्तारण कहां से होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2022-23 में 89 ग्राम पंचायतों को माॅडल बनाने के लिए चयनित किया गया था। शासन ने यहां पर नाली निर्माण, कूड़ा कलेक्शन के लिए ई-रिक्शा, आरआरसी सेंटर का निर्माण आदि के लिए 28.51 करोड़ बजट जारी किया था। ग्राम पंचायतों ने बजट को तो ठिकाने लगा दिया, लेकिन ग्राम पंचायतों में न कूड़ा उठ रहा और न ही उसका निस्तारण। कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा आरआरसी सेंटर में खड़े हैं।
विज्ञापन
ग्राम प्रधानों का कहना है कि शासन ने ई-रिक्शा संचालकों के मानदेय की कोई व्यवस्था नहीं की है। गांव वाले ई-रिक्शा संचालकों को 50 रुपये महीना भी नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कुछ दिन चलने के बाद ई-रिक्शा बंद हो गए। जब कूडा का उठान ही नहीं हो रहा है तो आरआरसी सेंटर में कूड़े का निस्तारण कहां से होगा।
विज्ञापन