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किशोरी को अगवाकर दुष्कर्म में 20 वर्ष की कैद
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बांदा। किशोरी को कई दिनों तक बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के दोषी महिला-पुरुष को अदालत ने जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है। युवक को दुष्कर्म में 20 वर्ष की कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना व महिला को बहला-फुसलाकर ले जाने के जुर्म में सात साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
किशोरी के पिता ने नरैनी कोतवाली में तीन अप्रैल 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव की महिला ने उसकी 13 वर्षीय पुत्री को 30 मार्च 2018 की शाम बहला-फुसलाकर कहीं भिजवा दिया है। पुलिस ने महिला से पूछताछ की तो इसमें शामिल युवक इंद्रकरण यादव का नाम सामने आया। वह देहात कोतवाली क्षेत्र के जौरही गांव का रहने वाला है। पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया और उसी के कब्जे से किशोरी को मुक्त कराया। पुलिस ने दुष्कर्म (376) की धारा बढ़ाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन ने सात गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) अनु सक्सेना ने फैसला सुनाया। इंद्रकरण यादव को 20 वर्ष की कैद और 50 हजार जुर्माना की सजा सुनाई। वहीं, महिला को सात साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा होगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी। अभियोजन की ओर से सुनील गुप्ता, शिवपूजन पटेल, रामसुफल सिंह व वीरेंद्र द्विवेदी ने पैरवी की।
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पति की जमानत अर्जी खारिज
बांदा। कमासिन थाना क्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी विजय पाल ने गिरवां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पुत्री बबिता की शादी सामूहिक विवाह योजना में तीन फरवरी 2019 को की थी। बरसड़ा गांव के पति कैलाश दो लाख रुपये दहेज में न लाने पर प्रताड़ित कर रहा था। 16 अप्रैल 2020 को प्रताड़ना से तंग आकर ससुराल में बबिता ने फांसी लगाकर जान दे दी। आरोपी पति कैलाश की जमानत अर्जी सोमवार को सेशन न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने खारिज कर दी। आरोपी ससुर की जमानत अर्जी पहले खारिज हो चुकी है। अभियोजन से पैरवी डीजीसी विजय बहादुर सिंह परिहार ने की। (संवाद)
एसटीएफ हत्याकांड की सुनवाई जारी
बांदा। एसटीएफ सामूहिक हत्याकांड के चर्चित मामले में सोमवार को आरोपियों के अधिवक्ता डॉ. विचित्रवीर सिंह ने विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) की अदालत में बहस की। चित्रकूट की जेल से 10 आरोपी पुलिस सुरक्षा में अदालत लाए गए थे। अन्य अधिवक्ता उपस्थित नहीं रहे। अगली सुनवाई मंगलवार (12 अप्रैल) को होगी। (संवाद)
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किशोरी के पिता ने नरैनी कोतवाली में तीन अप्रैल 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव की महिला ने उसकी 13 वर्षीय पुत्री को 30 मार्च 2018 की शाम बहला-फुसलाकर कहीं भिजवा दिया है। पुलिस ने महिला से पूछताछ की तो इसमें शामिल युवक इंद्रकरण यादव का नाम सामने आया। वह देहात कोतवाली क्षेत्र के जौरही गांव का रहने वाला है। पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया और उसी के कब्जे से किशोरी को मुक्त कराया। पुलिस ने दुष्कर्म (376) की धारा बढ़ाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया।
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अभियोजन ने सात गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) अनु सक्सेना ने फैसला सुनाया। इंद्रकरण यादव को 20 वर्ष की कैद और 50 हजार जुर्माना की सजा सुनाई। वहीं, महिला को सात साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा होगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी। अभियोजन की ओर से सुनील गुप्ता, शिवपूजन पटेल, रामसुफल सिंह व वीरेंद्र द्विवेदी ने पैरवी की।
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पति की जमानत अर्जी खारिज
बांदा। कमासिन थाना क्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी विजय पाल ने गिरवां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पुत्री बबिता की शादी सामूहिक विवाह योजना में तीन फरवरी 2019 को की थी। बरसड़ा गांव के पति कैलाश दो लाख रुपये दहेज में न लाने पर प्रताड़ित कर रहा था। 16 अप्रैल 2020 को प्रताड़ना से तंग आकर ससुराल में बबिता ने फांसी लगाकर जान दे दी। आरोपी पति कैलाश की जमानत अर्जी सोमवार को सेशन न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने खारिज कर दी। आरोपी ससुर की जमानत अर्जी पहले खारिज हो चुकी है। अभियोजन से पैरवी डीजीसी विजय बहादुर सिंह परिहार ने की। (संवाद)
एसटीएफ हत्याकांड की सुनवाई जारी
बांदा। एसटीएफ सामूहिक हत्याकांड के चर्चित मामले में सोमवार को आरोपियों के अधिवक्ता डॉ. विचित्रवीर सिंह ने विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) की अदालत में बहस की। चित्रकूट की जेल से 10 आरोपी पुलिस सुरक्षा में अदालत लाए गए थे। अन्य अधिवक्ता उपस्थित नहीं रहे। अगली सुनवाई मंगलवार (12 अप्रैल) को होगी। (संवाद)