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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   20 mm of heavy rain caused the infuriating Kafur

30 मिनट में 20 मिमी झमाझम बारिश से उमस हुई काफूर

Sun, 14 Jun 2020 11:22 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2020 11:22 PM IST
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20 mm of heavy rain caused the infuriating Kafur
झमाझम बारिश का नजारा। - फोटो : BANDA
बांदा। जबरदस्त उमस और गर्मी से पसीने में तरबतर लोगों को रविवार को हुई तेज बारिश ने बड़ी राहत दी। पारे में भी 4 डिग्री की गिरावट आ गई। देर रात तक बादल और ठंडी हवाओं से मौसम खुशगवार रहा। लगभग आधा घंटा में तकरीबन 20 मिमी बारिश हुई। शहरी व ग्रामीण कई इलाकों में जगह-जगह घंटों आवागमन प्रभावित रहा। आकाशीय गाज के कई बार हुए धमाकों से लोग सहम गए।
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कई दिनों से मौसम में भीषण उमस थी। अधिकतम पारा भी बढ़कर 38 डिग्री के आसपास आ गया था। दिन-रात लोग पसीने में भीग रहे थे। मौसम में आर्दता लगभग 40 प्रतिशत थी। रविवार को सुबह से तेज धूप रही। दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और पश्चिम की ओर से घने बादल आ गए।
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करीब ढाई बजे घनघोर बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान दो बार आकाशीय बिजली की तेज गर्जना हुई। मूसलाधार बारिश से उमस और गर्मी में भारी गिरावट आ गई। लोगों के चेहरों पर राहत नजर आई। लगभग आधा घंटा मूसलाधार बारिश हुई। शहर के सिविल लाइन, कालूकुआं, आजाद नगर, आवास विकास, न्यू मार्केट, गूलरनाका, छावनी, छोटी बाजार, कैलाशपुरी, कटरा आदि इलाकों में नाले-नालियां उफना गईं।
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गंदा पानी सड़क व गलियों में भर गया। तेज बारिश से मुख्यालय की बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। बारिश थमने के बाद बादल छाए रहे। हालांकि देर रात हल्की उमस फिर शुरू हो गई। इस बार को प्री मानसून वर्षा के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल मानसून आने की सूचना नहीं है। हालांकि मानसूनी मौसम 15 जून से यहां माना जाता है।
बारिश ने बढ़ाया केन का जलस्तर, सब्जी डूबी, खदानें रुकीं
बांदा। पिछले 24 घंटों में मप्र की घाटियों में हुई बारिश से केन नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। लगभग एक मीटर पानी की वृद्धि हुई इससे केन नदी की तलहटी पर किसानों द्वारा बोई गई सैकड़ों बीघा सब्जी की खेती डूब गई।

किसानों को खासी चपत लगी। दूसरी तरफ जलस्तर बढने से बालू खदानों को भी चपत लगी। पानी भर जाने से कई खदानों में खनन रुक गया। खदानों के कच्चे रास्तों में दलदल हो जाने ट्रकों की आवाजाही थम गई। हालांकि नदी का जलस्तर जल्दी घट जाने की बात कही गई है। बांध फिलहाल सूखे पड़े हैं।
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