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Banda News: दो दशक में 155 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरे हैं सीवर
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बांदा। शहर को स्वच्छ रखने के लिए चार दशक पूर्व शुरू की गई सीवर योजना 155 करोड़ रुपये खपाने के बाद भी अधूरी है। इसे पूरा करने के लिए विभाग ने अमृत योजना में शामिल कर चार अरब से अधिक का प्रस्ताव शासन को भेजकर बजट मांगा है।
वर्ष 1979 में शहर को दो जोन में बांटकर फेस-एक के तहत शहर के आधा दर्जन मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने की शुरुआत की गई थी। 11 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाई गई थी। कनवारा में ट्रीटमेंट प्लांट व कटरा में पंप हाउस बनाया गया था। करीब 155 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद सीवर योजना के फेस-एक का काम पूरा नहीं हो सका।
हर साल इस्टीमेट बढ़ता रहा और अधिकारी मालामाल होते रहे। कई बार निर्माण में अनियमितताओं को लेकर उंगली उठी और जांच हुई। गड़बड़ झाला मिलने पर कई अवर अभियंताओं पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद बीमार पड़ी सीवर योजना वेंटिलेटर से बाहर नहीं आ सकी।
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जल निगम सोलहवीं शाखा के एक्सईएन रोहत चौरसिया का कहना है कि अब सीवर योजना को अमृत योजना में शामिल कर केंद्र सरकार को 406 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें फेस-एक के अनुरक्षण के अतिरिक्त फेस-टू के तहत शहर के बचे मोहल्लों में डेढ़ किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। तीन नए पंप स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।
सिंचाई के लिए मिलेगा पानी
केन नदी के पास 34 एमएलडी का एसटीपी टैंक बनाकर शोधनयंत्र लगाया जाएगा। पानी को साफ करके सिंचाई के उपयोग लायक बनाया जाएगा। किसानों को इसे सिंचाई के लिए दिया जाएगा।
मल से बनाई जाएगी खाद
शोधन यंत्र में मल को पानी से अलग कर उससे खाद बनाने का काम किया जाएगा। इसका सरकार से बाकायदा ठेका दिया जाएगा। यहीं पर खाद बनने से किसानों को लाभ होगा।
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वर्ष 1979 में शहर को दो जोन में बांटकर फेस-एक के तहत शहर के आधा दर्जन मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने की शुरुआत की गई थी। 11 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाई गई थी। कनवारा में ट्रीटमेंट प्लांट व कटरा में पंप हाउस बनाया गया था। करीब 155 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद सीवर योजना के फेस-एक का काम पूरा नहीं हो सका।
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हर साल इस्टीमेट बढ़ता रहा और अधिकारी मालामाल होते रहे। कई बार निर्माण में अनियमितताओं को लेकर उंगली उठी और जांच हुई। गड़बड़ झाला मिलने पर कई अवर अभियंताओं पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद बीमार पड़ी सीवर योजना वेंटिलेटर से बाहर नहीं आ सकी।
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जल निगम सोलहवीं शाखा के एक्सईएन रोहत चौरसिया का कहना है कि अब सीवर योजना को अमृत योजना में शामिल कर केंद्र सरकार को 406 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें फेस-एक के अनुरक्षण के अतिरिक्त फेस-टू के तहत शहर के बचे मोहल्लों में डेढ़ किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। तीन नए पंप स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।
सिंचाई के लिए मिलेगा पानी
केन नदी के पास 34 एमएलडी का एसटीपी टैंक बनाकर शोधनयंत्र लगाया जाएगा। पानी को साफ करके सिंचाई के उपयोग लायक बनाया जाएगा। किसानों को इसे सिंचाई के लिए दिया जाएगा।
मल से बनाई जाएगी खाद
शोधन यंत्र में मल को पानी से अलग कर उससे खाद बनाने का काम किया जाएगा। इसका सरकार से बाकायदा ठेका दिया जाएगा। यहीं पर खाद बनने से किसानों को लाभ होगा।