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गर्भपात और एससीएसटी एक्ट में फंसे डॉक्टर दंपति
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:23 PM IST
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बांदा। अधिवक्ता की गर्भवती पत्नी का गलत इलाज और गर्भपात कराने के मामले में अदालत के आदेश पर शहर कोतवाली में महिला डाक्टर और उसके डाक्टर पति के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट और धारा 504 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना की जा रही है।
शहर के बंगालीपुरा निवासी अधिवक्ता चंद्रभूषण वर्मा ने एससी/एसटी एक्ट विशेष न्यायालय में धारा 156(3) के तहत दी अर्जी में कहा है कि पत्नी सरोज वर्मा 3 माह की गर्भवती थी। अधिक रक्तस्राव होने पर 25 जुुलाई 2016 को उसने पत्नी को डॉ. प्रज्ञा उपाध्याय और उनके डाक्टर पति को दिखाया।
उनकी सलाह पर उनके अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद दोनों डाक्टरों ने गर्भ पूर्णरूप से खराब होने की बात कहकर गर्भपात कराने की सलाह दी। 30 हजार रुपये खर्च बताए। इंजेक्शन लगाकर अस्पताल से छुट्टी कर दी। रक्तस्राव बंद न होने पर उसने पुन: 6 अगस्त 2016 को दिखाया और जेवर बेचकर जुटाए 30 हजार रुपये दिए। दोनों डाक्टर ने उसके और उसकी पत्नी के सादे कागज में हस्ताक्षर करवा लिए। गर्भपात करने के बाद अपने अस्पताल से छुट्टी दे दी। परंतु इसके बाद भी रक्तस्राव बंद न होने पर उसने डॉ. मनोरमा श्रीवास्तव को दिखाया।
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उन्होंने जांच रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि गर्भ की स्थिति खराब नहीं थी। गलत इलाज किया गया है। सोमवार को एससी/एसटी न्यायालय के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र कुमार सैलट ने कोतवाली प्रभारी को इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं। उधर, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी डाक्टर दंपति के विरुद्ध धारा 504 और एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
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शहर के बंगालीपुरा निवासी अधिवक्ता चंद्रभूषण वर्मा ने एससी/एसटी एक्ट विशेष न्यायालय में धारा 156(3) के तहत दी अर्जी में कहा है कि पत्नी सरोज वर्मा 3 माह की गर्भवती थी। अधिक रक्तस्राव होने पर 25 जुुलाई 2016 को उसने पत्नी को डॉ. प्रज्ञा उपाध्याय और उनके डाक्टर पति को दिखाया।
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उनकी सलाह पर उनके अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद दोनों डाक्टरों ने गर्भ पूर्णरूप से खराब होने की बात कहकर गर्भपात कराने की सलाह दी। 30 हजार रुपये खर्च बताए। इंजेक्शन लगाकर अस्पताल से छुट्टी कर दी। रक्तस्राव बंद न होने पर उसने पुन: 6 अगस्त 2016 को दिखाया और जेवर बेचकर जुटाए 30 हजार रुपये दिए। दोनों डाक्टर ने उसके और उसकी पत्नी के सादे कागज में हस्ताक्षर करवा लिए। गर्भपात करने के बाद अपने अस्पताल से छुट्टी दे दी। परंतु इसके बाद भी रक्तस्राव बंद न होने पर उसने डॉ. मनोरमा श्रीवास्तव को दिखाया।
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उन्होंने जांच रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि गर्भ की स्थिति खराब नहीं थी। गलत इलाज किया गया है। सोमवार को एससी/एसटी न्यायालय के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र कुमार सैलट ने कोतवाली प्रभारी को इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं। उधर, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी डाक्टर दंपति के विरुद्ध धारा 504 और एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।