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खेतों में खोदे गए तालाबों की होगी जांच
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:38 PM IST
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बांदा। एक करोड़ से अधिक लागत वाले तालाबों के बाद अब चित्रकूटधाम मंडल में पिछले दो वर्षों में खेत तालाब योजना से बने तालाबों की भी जांच होगी। शासन के आदेश पर मंडलायुक्त ने मंडल के सभी मुख्य विकास अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट एक पखवारे के अंदर शासन ने मांगी है।
चित्रकूटधाम मंडल में बारिश के पानी को संरक्षित कर सिंचाई के उपयोग में लाने और लगातार गिर रहे भूगर्भ जलस्तर को सुधारने के लिए शासन ने वर्ष 2015-16 में खेत तालाब योजना शुरू की थी। 20 वर्ग मीटर लंबे-चौड़े और डेढ़ मीटर गहराई वाले इन तालाबों की लागत एक लाख 10 हजार रुपये है।
इसमें किसान और सरकार का 50-50 फीसदी अंशदान है। पक्के घाट व नालियां भी बनाई जानी थीं। तालाबों के लिए किसानों के चयन का जिम्मा भूमि संरक्षण विभाग को मिला था। बांदा में 367 तालाब खुदवाने का लक्ष्य था। इसी में 60 तालाब कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में खोदे जाने थे।
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चित्रकूट जनपद में भूमि संरक्षण इकाई प्रथम, द्वितीय और चित्रकूट इकाई तृतीय को 80-80 तालाब बनाने का जिम्मा मिला था। हमीरपुर और महोबा जिले में भी करीब 300-300 तालाब खुदवाए गए। अधिकारियों ने खेतों का चयन कर लिया, लेकिन उनके किसानों का अंशदान नहीं दिया।
दबाव के चलते भूमि संरक्षण व कृषि विभाग के अधिकारियों ने शासन से मिली धनराशि से जितनी खुदाई हो पाई उतनी करा दी। किसानों से अंशदान न मिलने से ज्यादातर तालाबों में पक्का काम नहीं हुआ। लेकिन शासन को भेजी गई रिपोर्ट में ज्यादातर तालाब पूरे बता दिए गए।
जून माह में जिले में हुई जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री के सामने जनप्रतिनिधियों व जिला पंचायत सदस्यों ने यह मामला उठाया और जांच कराने का अनुरोध किया। मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्देश पर शासन ने मंडलायुक्त को तालाबों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
मंडलायुक्त ने चारों जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को हफ्ते भर के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा है। चित्रकूटधाम मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त शिवकुमार मिश्रा ने कहा कि खेत तालाब योजना की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारियों से कहा गया है।
चारों जिलों में जिला स्तरीय टीम से तालाबों का सत्यापन कराया जा रहा है। करीब 50 फीसदी तालाबों की जांच हो गई है। दो दिन बाद चारों जिलों की रिपोर्ट आ जाएगी। मंडलायुक्त के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-खेत तालाब योजना के दो वर्षों के खेत शामिल
-चारों जिलों में जांच के लिए जिला स्तरीय समितियां गठित
-प्रभारी मंत्री से जनप्रतिनिधियों ने की थी शिकायतें
अमर उजाला ब्यूरो
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चित्रकूटधाम मंडल में बारिश के पानी को संरक्षित कर सिंचाई के उपयोग में लाने और लगातार गिर रहे भूगर्भ जलस्तर को सुधारने के लिए शासन ने वर्ष 2015-16 में खेत तालाब योजना शुरू की थी। 20 वर्ग मीटर लंबे-चौड़े और डेढ़ मीटर गहराई वाले इन तालाबों की लागत एक लाख 10 हजार रुपये है।
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इसमें किसान और सरकार का 50-50 फीसदी अंशदान है। पक्के घाट व नालियां भी बनाई जानी थीं। तालाबों के लिए किसानों के चयन का जिम्मा भूमि संरक्षण विभाग को मिला था। बांदा में 367 तालाब खुदवाने का लक्ष्य था। इसी में 60 तालाब कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में खोदे जाने थे।
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चित्रकूट जनपद में भूमि संरक्षण इकाई प्रथम, द्वितीय और चित्रकूट इकाई तृतीय को 80-80 तालाब बनाने का जिम्मा मिला था। हमीरपुर और महोबा जिले में भी करीब 300-300 तालाब खुदवाए गए। अधिकारियों ने खेतों का चयन कर लिया, लेकिन उनके किसानों का अंशदान नहीं दिया।
दबाव के चलते भूमि संरक्षण व कृषि विभाग के अधिकारियों ने शासन से मिली धनराशि से जितनी खुदाई हो पाई उतनी करा दी। किसानों से अंशदान न मिलने से ज्यादातर तालाबों में पक्का काम नहीं हुआ। लेकिन शासन को भेजी गई रिपोर्ट में ज्यादातर तालाब पूरे बता दिए गए।
जून माह में जिले में हुई जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री के सामने जनप्रतिनिधियों व जिला पंचायत सदस्यों ने यह मामला उठाया और जांच कराने का अनुरोध किया। मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्देश पर शासन ने मंडलायुक्त को तालाबों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
मंडलायुक्त ने चारों जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को हफ्ते भर के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा है। चित्रकूटधाम मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त शिवकुमार मिश्रा ने कहा कि खेत तालाब योजना की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारियों से कहा गया है।
चारों जिलों में जिला स्तरीय टीम से तालाबों का सत्यापन कराया जा रहा है। करीब 50 फीसदी तालाबों की जांच हो गई है। दो दिन बाद चारों जिलों की रिपोर्ट आ जाएगी। मंडलायुक्त के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-खेत तालाब योजना के दो वर्षों के खेत शामिल
-चारों जिलों में जांच के लिए जिला स्तरीय समितियां गठित
-प्रभारी मंत्री से जनप्रतिनिधियों ने की थी शिकायतें
अमर उजाला ब्यूरो