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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष
Updated Mon, 05 Jun 2017 12:07 AM IST
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बांदा। ‘मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की’। बुंदेलखंड में वन संरक्षण को लेकर हालात ऐसे ही हैं। वननीति के तहत 33 फीसदी भूभाग पर वन होने चाहिए। लेकिन पूरे बुंदेलखंड में यह मानक पूरा नहीं है। जबकि पिछले एक दशक में सूबे की सरकारों ने वृक्षारोपण अभियान के नाम पर लगभग छह करोड़ पौधे लगवा डाले। इसमें लगभग 20 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए हैं। लगाए गए पौधे नदारद हो गए। कहीं हरित क्रांति नहीं आई।
बुंदेलखंड में हरियाली लगातार घट रही है। जनसूचना अधिकार अधिनियम में कुछ वर्षों पहले समाजसेवी आशीष सागर को मिली सूचना के मुताबिक बांदा में मात्र 1.21 प्रतिशत महोबा में 5.45 प्रतिशत चित्रकूट में 21.8 प्रतिशत, हमीरपुर में 3.06 प्रतिशत, जालौन में 5.6 प्रतिशत, झांसी में 6.66 प्रतिशत और ललितपुर मेें 7.8 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। यह मानक से बेहद कम है।
प्रदेश की विभिन्न दलों की सरकारें रहीं। सभी बुंदेलखंड में हरियाली का ढिंढोरा पीटती रहीं। बसपा सरकार में यहा मनरेगा से एक करोड़ पौधे लगवा डाले। इसमें करीब 90 करोड़ रुपये खर्च हुए। बाद में इसमें घोटाला समझ में आया तो सीबीआई जांच शुरू हो गई। यह अभी भी लंबित है।
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सपा सत्ता में आई तो वर्ष 2016-17 में बुंदेलखंड में हर जिले में 5-5 लाख पौधे लगवा डाले। इसमें भी जमकर कागजी आंकड़ों की बाजीगरी हुई। लेकिन कहीं भी हरियाली नजर नहीं आ रही। आरटीआई जानकारी की मुताबिक वर्ष 2012-13 में बुंदेलखंड में 13 लाख 21 हजार 425 पौधे रोपे गए और एक करोड़ 11 लाख 59 हजार रुपये खर्च हुए।
वर्ष 2013-14 में 13 लाख 77 हजार 374 पौधे रोपे गए और एक करोड़ एक लाख 6 हजा रुपये खर्च हुए। वर्ष 2014-15 में 14 लाख 41 हजार 670 पौधे रोपने का दावा हुआ और 5 करोड़ 8 लाख 66 हजार रुपये खर्च हुए। वर्ष 2015-16 में 19 लाख 68 हजार 933 पौधे रोपकर 8 करोड़ 4 लाख 67 हजार रुपये खर्च बता दिए गए। चालू वर्ष 2016-17 में 18 लाख 72 हजार 282 पौधे रोपने के आंकड़े पेश करते हुए। 4 करोड़ 67 लाख 12 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
-5 वर्षों मेें 20 करोड़ खर्च, कहीं नहीं आई हरित क्रांति
-किसी भी जनपद में मानक के मुताबिक नहीं हैं जंगल
-बसपा ने एक करोड़ तो सपा ने 35 लाख पौधे लगवाए
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बुंदेलखंड में हरियाली लगातार घट रही है। जनसूचना अधिकार अधिनियम में कुछ वर्षों पहले समाजसेवी आशीष सागर को मिली सूचना के मुताबिक बांदा में मात्र 1.21 प्रतिशत महोबा में 5.45 प्रतिशत चित्रकूट में 21.8 प्रतिशत, हमीरपुर में 3.06 प्रतिशत, जालौन में 5.6 प्रतिशत, झांसी में 6.66 प्रतिशत और ललितपुर मेें 7.8 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। यह मानक से बेहद कम है।
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प्रदेश की विभिन्न दलों की सरकारें रहीं। सभी बुंदेलखंड में हरियाली का ढिंढोरा पीटती रहीं। बसपा सरकार में यहा मनरेगा से एक करोड़ पौधे लगवा डाले। इसमें करीब 90 करोड़ रुपये खर्च हुए। बाद में इसमें घोटाला समझ में आया तो सीबीआई जांच शुरू हो गई। यह अभी भी लंबित है।
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सपा सत्ता में आई तो वर्ष 2016-17 में बुंदेलखंड में हर जिले में 5-5 लाख पौधे लगवा डाले। इसमें भी जमकर कागजी आंकड़ों की बाजीगरी हुई। लेकिन कहीं भी हरियाली नजर नहीं आ रही। आरटीआई जानकारी की मुताबिक वर्ष 2012-13 में बुंदेलखंड में 13 लाख 21 हजार 425 पौधे रोपे गए और एक करोड़ 11 लाख 59 हजार रुपये खर्च हुए।
वर्ष 2013-14 में 13 लाख 77 हजार 374 पौधे रोपे गए और एक करोड़ एक लाख 6 हजा रुपये खर्च हुए। वर्ष 2014-15 में 14 लाख 41 हजार 670 पौधे रोपने का दावा हुआ और 5 करोड़ 8 लाख 66 हजार रुपये खर्च हुए। वर्ष 2015-16 में 19 लाख 68 हजार 933 पौधे रोपकर 8 करोड़ 4 लाख 67 हजार रुपये खर्च बता दिए गए। चालू वर्ष 2016-17 में 18 लाख 72 हजार 282 पौधे रोपने के आंकड़े पेश करते हुए। 4 करोड़ 67 लाख 12 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
-5 वर्षों मेें 20 करोड़ खर्च, कहीं नहीं आई हरित क्रांति
-किसी भी जनपद में मानक के मुताबिक नहीं हैं जंगल
-बसपा ने एक करोड़ तो सपा ने 35 लाख पौधे लगवाए