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Banda News: 96 पदों पर की थी 143 आशा कार्यकर्ताओं की भर्ती
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डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव
- फोटो : संवाद
बांदा। जिले में तैनात रहे तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने अपात्रों को पात्र दिखाकर 96 के स्थान पर 143 आशा कार्यकर्ता की भर्ती कर दी। आशा कार्यकर्ता चयन प्रक्रिया में की गई अनियमितता की जांच में वह दोषी पाए गए हैं।
नगर पंचायत नरैनी के पूर्व सदस्य रामबाबू श्रीवास ने जिलाधिकारी से आशा कार्यकर्ता भर्ती में अनियमितता की शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि गरीब लाभार्थियों की पात्रता के बाद अपात्रों से एक लाख रुपये लेकर भर्ती कर दी थी। इसमें विभाग के डीपीएम और डीसीपीएम भी शामिल हैं। आशा कार्यकर्ताओं को चयन के बाद सात दिन की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, लेकिन नहीं दी गई। प्रशिक्षण की धनराशि का भी बंदरबांट कर लिया था।
इस मामले में अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा चित्रकूटधाम मंडल डॉ. रेखा रानी ने जांच कर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्राचार किया था। मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल ने भी जांच के आदेश दिए थे। जांच में तत्कालीन सीएमओ ने कुछ ब्लॉकों के ही अभिलेख उपलब्ध कराए थे। इन अभिलेखों की जांच में कई अनियमितताएंमिलीं। इस संबंध में उनसे लगातार पत्राचार किया गया लेकिन उन्होंने आशा भर्ती से संबंधित शेष ब्लॉकों की पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई। वहीं डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि भर्ती नियमानुसार कराई गई थी। रुपये लेकर भर्ती कराने का आरोप निराधार है। (संवाद)
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कम योग्यता वाली माया का हो गया चयन, शशि रह गई वंचित
जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत उतरवा में पांच आवेदन आए जबकि चार अभ्यर्थियों का सहमति पत्र भरा गया। कमासिन ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुसींवा में माया देवी का चयन किया गया जबकि शशि देवी की योग्यता माया देवी से ज्यादा थी। ग्राम पंचायत इटरा बड़ौली आशा आवेदन फार्म प्रिंटेड दिए गए जो नियमावली के विरुद्ध है। विकास खंड जसपुरा के गौरी कला में मात्र तीन आवेदन आए। बिना प्रचार प्रसार के 29 जुलाई को बैठक की। उसी दिन चयन का प्रस्ताव रख दिया। तीन आवेदन आए लेकिन सर्व सम्मति से नियम विरुद्ध रश्मि देवी का चयन कर दिया गया।
छह माह से सूचना नहीं दे रहे सीएमओ
- इस मामले को लेकर मौजूदा सीएमओ भी सवालों के घेरे में हैं। मामले की पत्रावलियां और सूचना अपर निदेशक को नहीं दे रहे। इसको लेकर उनके द्वारा लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रेखा रानी ने 24 जुलाई 2025 को फिर से सीएमओ को पत्र भेजकर सूचना मांगी है। जिससे जांच आगे बढ़ सके। पत्र में कहा है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपके द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की जा रही है।
संयुक्त निदेशक ने भर्ती निरस्त करने की संस्तुति की थी
संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश मोहन की जांच में यह सामने आया था कि कमासिन, जसपुरा, महुआ, नरैनी ब्लाक की पत्रावलियों में सामने आया कि गाइडलाइन के अनुसार आशाओं का चयन नहीं किया गया। बिना प्रचार प्रसार के अचानक एक दिन बैठक कर उसी दिन आशा का चयन प्रस्तावित कर मनमानी की गई। इसमें आरक्षण का भी पालन नहीं किया गया। मामले की पूरी भर्ती निरस्त करने की संस्तुति की थी।
माननीयों ने भी लिखे पत्र
भाजपा विधायक ओममणि वर्मा के सदन में मामला उठाने के साथ अन्य नेताओं ने सीएमओ के खिलाफ पत्र लिखा है। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल, हमीरपुर महोबा लोकसभा सांसद अजेंद्र लोधी इनकी कार्यप्रणाली को लेकर पत्राचार कर चुके हैं।
विभागीय कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे तत्कालीन सीएमओ
- तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव विभागीय कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे है। शासन की ओर से 12 दिसंबर 2024 को जारी पत्र के अनुसार गैर संचारी कार्यक्रम, मातृत्व वंदना योजना, परिवार नियोजन कार्यक्रम असंतोषजनक स्थिति रही। इसी तरह टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत 25 फीसदी बजट खर्च कर सके। ई संजीवनी पोर्टल पर 6 फीसदी ही सीएचओ सक्रिय मिले। गोल्डन कार्ड को लेकर सत्यापन रैकिंग 51 रही। जो कि मंडल की सबसे खराब स्थिति रही। इसी तरह अन्य कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे।
- इस प्रकरण का उनसे कोई संबंध नहीं है। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने उनसे कोई सूचना मांगी है, ऐसा कोई पत्र उनके संज्ञान में नहीं है। - विजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी बांदा
यह पूरा मामला
जिले में तैनात रहे सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मौजूदा में जिला चिकित्सालय बदांयू में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनके कार्यकाल में आशा चयन भर्ती को लेकर अनियमितता का आरोप लगा शिकायत हुई थी।
आशा चयन की भर्ती को लेकर नरैनी से भाजपा विधायक ओममणि वर्मा ने सदन में मुद्दा उठाया था। मामले को लेकर अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा चित्रकूटधाम मंडल डॉ. रेखा रानी ने जांच कर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्राचार किया था। इस संबंध में मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल ने भी जांच के आदेश दिए थे। बृहस्पतिवार को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने मामले में उन्हें दोषी कराकर देकर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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नगर पंचायत नरैनी के पूर्व सदस्य रामबाबू श्रीवास ने जिलाधिकारी से आशा कार्यकर्ता भर्ती में अनियमितता की शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि गरीब लाभार्थियों की पात्रता के बाद अपात्रों से एक लाख रुपये लेकर भर्ती कर दी थी। इसमें विभाग के डीपीएम और डीसीपीएम भी शामिल हैं। आशा कार्यकर्ताओं को चयन के बाद सात दिन की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, लेकिन नहीं दी गई। प्रशिक्षण की धनराशि का भी बंदरबांट कर लिया था।
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इस मामले में अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा चित्रकूटधाम मंडल डॉ. रेखा रानी ने जांच कर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्राचार किया था। मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल ने भी जांच के आदेश दिए थे। जांच में तत्कालीन सीएमओ ने कुछ ब्लॉकों के ही अभिलेख उपलब्ध कराए थे। इन अभिलेखों की जांच में कई अनियमितताएंमिलीं। इस संबंध में उनसे लगातार पत्राचार किया गया लेकिन उन्होंने आशा भर्ती से संबंधित शेष ब्लॉकों की पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई। वहीं डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि भर्ती नियमानुसार कराई गई थी। रुपये लेकर भर्ती कराने का आरोप निराधार है। (संवाद)
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कम योग्यता वाली माया का हो गया चयन, शशि रह गई वंचित
जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत उतरवा में पांच आवेदन आए जबकि चार अभ्यर्थियों का सहमति पत्र भरा गया। कमासिन ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुसींवा में माया देवी का चयन किया गया जबकि शशि देवी की योग्यता माया देवी से ज्यादा थी। ग्राम पंचायत इटरा बड़ौली आशा आवेदन फार्म प्रिंटेड दिए गए जो नियमावली के विरुद्ध है। विकास खंड जसपुरा के गौरी कला में मात्र तीन आवेदन आए। बिना प्रचार प्रसार के 29 जुलाई को बैठक की। उसी दिन चयन का प्रस्ताव रख दिया। तीन आवेदन आए लेकिन सर्व सम्मति से नियम विरुद्ध रश्मि देवी का चयन कर दिया गया।
छह माह से सूचना नहीं दे रहे सीएमओ
- इस मामले को लेकर मौजूदा सीएमओ भी सवालों के घेरे में हैं। मामले की पत्रावलियां और सूचना अपर निदेशक को नहीं दे रहे। इसको लेकर उनके द्वारा लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रेखा रानी ने 24 जुलाई 2025 को फिर से सीएमओ को पत्र भेजकर सूचना मांगी है। जिससे जांच आगे बढ़ सके। पत्र में कहा है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपके द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की जा रही है।
संयुक्त निदेशक ने भर्ती निरस्त करने की संस्तुति की थी
संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश मोहन की जांच में यह सामने आया था कि कमासिन, जसपुरा, महुआ, नरैनी ब्लाक की पत्रावलियों में सामने आया कि गाइडलाइन के अनुसार आशाओं का चयन नहीं किया गया। बिना प्रचार प्रसार के अचानक एक दिन बैठक कर उसी दिन आशा का चयन प्रस्तावित कर मनमानी की गई। इसमें आरक्षण का भी पालन नहीं किया गया। मामले की पूरी भर्ती निरस्त करने की संस्तुति की थी।
माननीयों ने भी लिखे पत्र
भाजपा विधायक ओममणि वर्मा के सदन में मामला उठाने के साथ अन्य नेताओं ने सीएमओ के खिलाफ पत्र लिखा है। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल, हमीरपुर महोबा लोकसभा सांसद अजेंद्र लोधी इनकी कार्यप्रणाली को लेकर पत्राचार कर चुके हैं।
विभागीय कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे तत्कालीन सीएमओ
- तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव विभागीय कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे है। शासन की ओर से 12 दिसंबर 2024 को जारी पत्र के अनुसार गैर संचारी कार्यक्रम, मातृत्व वंदना योजना, परिवार नियोजन कार्यक्रम असंतोषजनक स्थिति रही। इसी तरह टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत 25 फीसदी बजट खर्च कर सके। ई संजीवनी पोर्टल पर 6 फीसदी ही सीएचओ सक्रिय मिले। गोल्डन कार्ड को लेकर सत्यापन रैकिंग 51 रही। जो कि मंडल की सबसे खराब स्थिति रही। इसी तरह अन्य कार्यक्रमों में भी फिसड्डी रहे।
- इस प्रकरण का उनसे कोई संबंध नहीं है। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने उनसे कोई सूचना मांगी है, ऐसा कोई पत्र उनके संज्ञान में नहीं है। - विजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी बांदा
यह पूरा मामला
जिले में तैनात रहे सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मौजूदा में जिला चिकित्सालय बदांयू में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनके कार्यकाल में आशा चयन भर्ती को लेकर अनियमितता का आरोप लगा शिकायत हुई थी।
आशा चयन की भर्ती को लेकर नरैनी से भाजपा विधायक ओममणि वर्मा ने सदन में मुद्दा उठाया था। मामले को लेकर अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा चित्रकूटधाम मंडल डॉ. रेखा रानी ने जांच कर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्राचार किया था। इस संबंध में मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल ने भी जांच के आदेश दिए थे। बृहस्पतिवार को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने मामले में उन्हें दोषी कराकर देकर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।