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एसी की हुई ऐसी तैसी, बर्न वार्ड में तड़पे मरीज
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जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं से मरीज और तीमारदार बेहाल हैं। भीषण गर्मी में भी कूलर बंद हैं। सबसे दयनीय स्थिति बर्न वार्ड की है।
यहां झुलसे मरीज भर्ती हैं लेकिन यहां लगा एसी खराब है। मरीज जलन में तड़प रहे हैं। अन्य वार्डों में लगे कूलर मात्र शोपीस हैं। सीलिंग फैन लू जैसी गर्म हवा दे रहे हैं।
दूसरी तरफ ई-रिक्शा और एंबुलेंस की धमाचौकड़ी तथा अन्य बेतरतीब वाहनों से अस्पताल व ट्रामा सेंटर का मुख्य द्वार अधिकांश अवरुद्ध रहता है। जिला अस्पताल में बदहाली के ये नजारे आम हैं।
यहां आठ बेड हैं। सभी भरे हैं। इस वार्ड में दो एसी लगे हैं। इनमें एक खराब है। दूसरे एसी से पर्याप्त कूलिंग न होने पर मरीज दर्द से छटपटा रहे हैं जबकि जले मरीजों को ठंडक में रखना जरूरी है।
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यहां भर्ती मनीपुर (गिरवां) निवासी संगीता (9) की मां शकुंतला व अन्य परिजनों ने व्यवस्था पर रोष जताया। कहा कि भरपूर कूलिंग न होने से मरीजों को जलन से जूझना पड़ रहा है। पंखों से गर्म हवा निकल रही है। स्टाफ नर्स से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई तवज्जो नहीं दी गई।
तीनों वार्डों में 24-24 बेड हैं। अधिकांश मरीजों से भरे हैं। प्रत्येक वार्ड में दो से तीन कूलर लगे हैं लेकिन कोई नहीं चल रहे। पंखों से निकल रही गर्म हवाओं सहते हुए मरीज बदहाल व्यवस्था को कोसते नजर आए।
रज्जन वर्मा (लामा), सुदामा (महोखर), प्रदीप सिंह (देवरथा) आदि तीमारदारों ने कहा कि दोपहर को वार्ड में रहना मुश्किल होता है। मरीजों का हाल भी बद्तर हो जाता है।
यहां सभी छह बेड डायरिया और बुखार के मरीजों से भरे हैं। एसी से ठंडक है। साथ ही गंदगी और सड़ांध का वातावरण है। तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे खोलकर रहना पड़ता है। उनका कहना है कि निरंतर सफाई न होने से गंदगी रहती है।
मुख्य द्वार पर बेतरतीब दुपहिया वाहन और ई-रिक्शों का जमघट है। प्राइवेट और सरकारी एंबुलेंस भी लाइन से खड़ी हैं। ऐसी हालत में गंभीर मरीजों का ट्रामा सेंटर तक आसानी से पहुंच पाना मुश्किल होता है।
अक्सर गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। मरीजों के तीमारदारों से रास्ते के लिए अक्सर झगड़ा भी होता है लेकिन अस्पताल प्रशासन इस अव्यवस्था पर आंखें मूंदे है।
अस्पताल में हर जगह तक पहुंचना मुश्किल है। निजी एंबुलेंस के अस्पताल परिसर में आने पर रोक लगा रखी है। ई-रिक्शों में मरीज आते हैं। इसलिए इन पर रोक नहीं लगाई जा सकती। पूरा जिला पानी संकट से जूझ रहा है। अस्पताल में भी पानी का संकट है। बिना पानी के कूलर नहीं चलाए जा सकते।
डा. किशोरीलाल
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला अस्पताल, बांदा।
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यहां झुलसे मरीज भर्ती हैं लेकिन यहां लगा एसी खराब है। मरीज जलन में तड़प रहे हैं। अन्य वार्डों में लगे कूलर मात्र शोपीस हैं। सीलिंग फैन लू जैसी गर्म हवा दे रहे हैं।
दूसरी तरफ ई-रिक्शा और एंबुलेंस की धमाचौकड़ी तथा अन्य बेतरतीब वाहनों से अस्पताल व ट्रामा सेंटर का मुख्य द्वार अधिकांश अवरुद्ध रहता है। जिला अस्पताल में बदहाली के ये नजारे आम हैं।
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यहां आठ बेड हैं। सभी भरे हैं। इस वार्ड में दो एसी लगे हैं। इनमें एक खराब है। दूसरे एसी से पर्याप्त कूलिंग न होने पर मरीज दर्द से छटपटा रहे हैं जबकि जले मरीजों को ठंडक में रखना जरूरी है।
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यहां भर्ती मनीपुर (गिरवां) निवासी संगीता (9) की मां शकुंतला व अन्य परिजनों ने व्यवस्था पर रोष जताया। कहा कि भरपूर कूलिंग न होने से मरीजों को जलन से जूझना पड़ रहा है। पंखों से गर्म हवा निकल रही है। स्टाफ नर्स से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई तवज्जो नहीं दी गई।
तीनों वार्डों में 24-24 बेड हैं। अधिकांश मरीजों से भरे हैं। प्रत्येक वार्ड में दो से तीन कूलर लगे हैं लेकिन कोई नहीं चल रहे। पंखों से निकल रही गर्म हवाओं सहते हुए मरीज बदहाल व्यवस्था को कोसते नजर आए।
रज्जन वर्मा (लामा), सुदामा (महोखर), प्रदीप सिंह (देवरथा) आदि तीमारदारों ने कहा कि दोपहर को वार्ड में रहना मुश्किल होता है। मरीजों का हाल भी बद्तर हो जाता है।
यहां सभी छह बेड डायरिया और बुखार के मरीजों से भरे हैं। एसी से ठंडक है। साथ ही गंदगी और सड़ांध का वातावरण है। तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे खोलकर रहना पड़ता है। उनका कहना है कि निरंतर सफाई न होने से गंदगी रहती है।
मुख्य द्वार पर बेतरतीब दुपहिया वाहन और ई-रिक्शों का जमघट है। प्राइवेट और सरकारी एंबुलेंस भी लाइन से खड़ी हैं। ऐसी हालत में गंभीर मरीजों का ट्रामा सेंटर तक आसानी से पहुंच पाना मुश्किल होता है।
अक्सर गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। मरीजों के तीमारदारों से रास्ते के लिए अक्सर झगड़ा भी होता है लेकिन अस्पताल प्रशासन इस अव्यवस्था पर आंखें मूंदे है।
अस्पताल में हर जगह तक पहुंचना मुश्किल है। निजी एंबुलेंस के अस्पताल परिसर में आने पर रोक लगा रखी है। ई-रिक्शों में मरीज आते हैं। इसलिए इन पर रोक नहीं लगाई जा सकती। पूरा जिला पानी संकट से जूझ रहा है। अस्पताल में भी पानी का संकट है। बिना पानी के कूलर नहीं चलाए जा सकते।
डा. किशोरीलाल
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला अस्पताल, बांदा।