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Banda News: गैर इरादतन हत्या मे 10 वर्ष का कारावास
Fri, 20 Oct 2023 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 20 Oct 2023 12:30 AM IST
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बांदा। गैर इरादतन हत्या व एक अन्य को गोली मारकर घायल करने के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमरूज्जमा खां की अदालत ने गुरुवार को 15 वर्ष बाद दोषी को 10 वर्ष का कठिन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अन्य धारा में सात वर्ष का कारावास व दोनों में 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। दोषी को 2020 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तभी से वह मंडल कारागार मे निरुद्ध है। फैसले के बाद उसका सजायावी वारंट बनाकर पुनः जेल भेज दिया गया।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील तिवारी व सहायक शासकीय अधिवक्ता श्रवण तिवारी ने बताया कि कोतवाली देहात क्षेत्र के छनेहरा लालपुर निवासी सुनील कुमार ने 30 अक्तूबर 2008 को थाने मे तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके अनुसार एक दिन पूर्व प्रातः दरवाजे के पास बने कुंए के पास से रामपाल उर्फ दिलरा निर्वस्त्र होकर खड़ा हो गया।
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इस पर उसके पिता छोटेलाल व चाचा गनेशा ने मना किया व गाली गलौज की। रात करीब पौने दस बजे बंदूक लेकर उसके दादा रामपाल आए और दरवाजे पर गाली गलौज कर रहे थे। छीना झपटी मे बंदूक से अचानक फायर हो गया जिससे चाचा गनेशा के हाथ में गोली लगते हुए पिता के पेट में गोली लग गई। दोनों गंभीर घायल हो गए। पिता की मौत हो गई।
चाचा गनेशा को गांव के बाबादीन यादव, रामदीन कुशवाहा इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए। गोली लगने से रामपाल वहां से भाग गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। आरोप पत्र अदालत मे 18 मार्च 2009 को पेश किया गया। दोषी रामपाल घटना के पूर्व भी साधू था।
इस कारण वह फरार हो गया। 2020 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। तब अदालत ने 24 सितंबर 2020 को उसके विरुद्ध आरोप बनाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सात गवाह कराए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 34 पृष्ठीय फैसले में रामपाल को सजा सुनाई।
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जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। दोषी को 2020 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तभी से वह मंडल कारागार मे निरुद्ध है। फैसले के बाद उसका सजायावी वारंट बनाकर पुनः जेल भेज दिया गया।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील तिवारी व सहायक शासकीय अधिवक्ता श्रवण तिवारी ने बताया कि कोतवाली देहात क्षेत्र के छनेहरा लालपुर निवासी सुनील कुमार ने 30 अक्तूबर 2008 को थाने मे तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके अनुसार एक दिन पूर्व प्रातः दरवाजे के पास बने कुंए के पास से रामपाल उर्फ दिलरा निर्वस्त्र होकर खड़ा हो गया।
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इस पर उसके पिता छोटेलाल व चाचा गनेशा ने मना किया व गाली गलौज की। रात करीब पौने दस बजे बंदूक लेकर उसके दादा रामपाल आए और दरवाजे पर गाली गलौज कर रहे थे। छीना झपटी मे बंदूक से अचानक फायर हो गया जिससे चाचा गनेशा के हाथ में गोली लगते हुए पिता के पेट में गोली लग गई। दोनों गंभीर घायल हो गए। पिता की मौत हो गई।
चाचा गनेशा को गांव के बाबादीन यादव, रामदीन कुशवाहा इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए। गोली लगने से रामपाल वहां से भाग गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। आरोप पत्र अदालत मे 18 मार्च 2009 को पेश किया गया। दोषी रामपाल घटना के पूर्व भी साधू था।
इस कारण वह फरार हो गया। 2020 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। तब अदालत ने 24 सितंबर 2020 को उसके विरुद्ध आरोप बनाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सात गवाह कराए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 34 पृष्ठीय फैसले में रामपाल को सजा सुनाई।