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बुंदेलखंड के 33 पशु आश्रयगृहों के लिए मिले दस करोड़

Sun, 01 Apr 2018 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Sun, 01 Apr 2018 11:42 PM IST
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10 crores for 33 cattle shelters of Bundelkhand
cow - फोटो : demo pic

अन्ना गोवंश को संरक्षित करने के लिए बुंदेलखंड में 10 करोड़ की लागत से पशु आश्रय गृह बनाए जाएंगे। पहले चरण में सातों जिलों में 30-30 लाख रुपये की लागत से 33 पशु आश्रय गृह बनाने के लिए शासन ने धनराशि अवमुक्त की है। पैसा कम पड़ने पर इसकी भरपाई अन्य विभागों से की जाएगी। पशुपालन निदेशक ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों से डीएम की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय समिति गठित कर तत्काल निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। 

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बुंदेलखंड के सातों जिलों में इस समय 31,33,463 मवेशी हैं। इनमें से 4,56,614 गोवंश अन्ना हैं। इन्हें आश्रय देने के लिए शासन ने पहले कान्हा पशु आश्रय स्थलों के लिए करीब छह करोड़ रुपये नगर निकायों को दिए, लेकिन दो साल में एक भी कान्हा पशु आश्रय स्थल तैयार नहीं हो पाया। अब बेसहारा गोवंशों के संरक्षण में 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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पशुपालन निदेशक डॉ. चरण सिंह यादव ने 31 मार्च को इस बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को पत्र जारी किया है। कहा कि बुंदेलखंड में सातों जिलों में प्रत्येक न्याय पंचायत में पशु आश्रय गृहों की स्थापना की जानी है। प्रति पशु आश्रय गृह की लागत करीब 30 लाख रुपये होगी। इसके अतिरिक्त जो लागत आएगी, उसे मनरेगा, ग्राम पंचायत की संचित निधि, वित्त आयोग, खनिज विकास निधि, रायफल निधि, जिला पंचायत निधि, क्षेत्र पंचायत निधि, सांसद व विधायक क्षेत्र विकास निधि से खर्च किया जाएगा। पहले चरण में 33 पशु आश्रय स्थल बनेंगे। इसके लिए जल्द ही धनराशि डीएम को उपलब्ध कराई जाएगी। पशु आश्रय गृहों का निर्माण इसी वित्तीय वर्ष में पूरा किया जाना है। ग्राम पंचायतों को इनके संचालन का जिम्मा दिया जाएगा। 
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उधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय प्रताप सिंह ने बताया कि पशु आश्रय गृहों के निर्माण के लिए डीएम, मुख्य विकास अधिकारी व पशु चिकित्साधिकारी की टीम जल्द गठित की जाएगी। प्रति ग्राम पंचायत अन्ना गोवंशों की संख्या 150-200 है। पशु आश्रय गृह में करीब एक हजार गोवंशों के रखने की क्षमता होगी। इससे काफी हद तक अन्ना प्रथा पर अंकुश लगेगा। 


ये मिलेंगी सुविधाएं होंगी 
पशु आश्रय गृहों में 3500 वर्ग फीट का शेड, 500 वर्ग फीट का भूसा गोदाम, 350 वर्ग फीट में चौकीदार और औषधि कक्ष, स्टोर, 200 वर्ग फीट में चरही, 1350 वर्ग फीट में चरनियां (लरौंडी) बनेंगी। इसके लिए जमीन ग्राम समाज की ली जाएगी। पंप हाउस और बाउंड्रीवाल भी बनेगी। जमीन के अन्य हिस्से में चारागाह विकसित होगा। डीएम पशु आश्रय गृहों का संचालन ग्राम पंचायतों के जरिये कराएंगे। 

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