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Balrampur News: योग केवल आसन नहीं, जीवन को संतुलित करने की है संपूर्ण पद्धति
Tue, 16 Jun 2026 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:34 PM IST
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बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय एवं बलरामपुर फर्स्ट की तरफ से सोमवार की रात ऑनलाइन राष्ट्रीय योग व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। व्याख्यानमाला में योग के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक पक्षों पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य वक्ता एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. डीके सिंह ने योग व्याख्यानमाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वित विकास की संपूर्ण जीवन-पद्धति है। उन्होंने कहा कि यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बिना योग की पूर्णता संभव नहीं है। उन्होंने चेतना के क्वांटम सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही आत्मा की अमरता और चेतना की निरंतरता का प्रतिपादन किया था। आज आधुनिक विज्ञान भी कई स्तरों पर इन अवधारणाओं को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहाकि योग व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ मन, चित्त और व्यक्तित्व को भी संतुलित और सशक्त बनाता है। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा और योग संस्कृति के प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। व्याख्यानमाला के संयोजक एवं बलरामपुर फर्स्ट के संस्थापक सर्वेश सिंह ने अतिथियों, प्रतिभागियों और विद्वानों का स्वागत करते हुए वक्ताओं के व्याख्यान को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में देवीपाटन मंडल के चारों जनपदों के शिक्षाविद, विश्वविद्यालय के आचार्य, शोधार्थी तथा बलरामपुर फर्स्ट टीम के सदस्य शामिल रहे।
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मुख्य वक्ता एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. डीके सिंह ने योग व्याख्यानमाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वित विकास की संपूर्ण जीवन-पद्धति है। उन्होंने कहा कि यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बिना योग की पूर्णता संभव नहीं है। उन्होंने चेतना के क्वांटम सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही आत्मा की अमरता और चेतना की निरंतरता का प्रतिपादन किया था। आज आधुनिक विज्ञान भी कई स्तरों पर इन अवधारणाओं को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहाकि योग व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ मन, चित्त और व्यक्तित्व को भी संतुलित और सशक्त बनाता है। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा और योग संस्कृति के प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। व्याख्यानमाला के संयोजक एवं बलरामपुर फर्स्ट के संस्थापक सर्वेश सिंह ने अतिथियों, प्रतिभागियों और विद्वानों का स्वागत करते हुए वक्ताओं के व्याख्यान को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में देवीपाटन मंडल के चारों जनपदों के शिक्षाविद, विश्वविद्यालय के आचार्य, शोधार्थी तथा बलरामपुर फर्स्ट टीम के सदस्य शामिल रहे।
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