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Balrampur News: महिला सर्जन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा
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-डॉ. मेधावी सिंह
बलरामपुर। भगवतीगंज में बिना पंजीकरण संचालित एसपीएम अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त जिला चिकित्सालय की सर्जन डॉ. मेधावी सिंह के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस कोतवाली नगर में दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है।
घटना 31 अक्तूबर की है। शंकरपुर गांव के निवासी पवन कुमार ने बताया था कि उनकी गर्भवती पत्नी शीला देवी को सरकारी अस्पताल से रेफर कर दिया गया था। इसके बाद वह उसे नगर के एसपीएम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित संयुक्त जिला चिकित्सालय की महिला सर्जन डॉ. मेधावी सिंह ने 28 हजार रुपये लेकर ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर से महिला सर्जन को बुलाने की गुहार लगाई, लेकिन वह समय से नहीं पहुंचीं।
जब डॉ. मेधावी आईं, तो प्रसूता को रेफर करने की बात कही, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। शीला देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और कोतवाली नगर में तहरीर देकर महिला सर्जन पर लापरवाही का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच में यह सामने आया कि एसपीएम हॉस्पिटल पिछले एक वर्ष से बिना पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। इस आधार पर सीएमओ ने अस्पताल को सील कर दिया और उसके संचालक डॉ. शिवकुमार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया।
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प्रभारी निरीक्षक मनोज सिंह ने बताया कि जांच में महिला सर्जन डॉ. मेधावी सिंह की लापरवाही की पुष्टि हुई है। इसके आधार पर उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच हो रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसका नाम एफआईआर में जोड़ा जाएगा।
बिना लाइसेंस संचालित डायग्नोस्टिक सेंटर सील : बलरामपुर। एसीएमओ ने सोमवार को बिना लाइसेंस संचालित अल्ट्रा डायग्नोस्टिक सेंटर को सील किया है। सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार को उतरौला क्षेत्र के धुसवा बाजार में छापा मारा। स्वास्थ्य विभाग टीम को देखते ही कई निजी अस्पताल व क्लीनिक संचालक शटर गिराकर भाग गए। एसीएमओ ने धुसवा टैक्सी स्टैंड स्थित अल्ट्रा डायग्नोस्टिक सेंटर का निरीक्षण किया। सेंटर में चिकित्सा संसाधनों का आकलन किया। निरीक्षण के समय एसीएमओ ने संचालक से पंजीकरण अभिलेख मांगा। संचालक कोई अभिलेख नहीं दिखा सका। (संवाद)
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घटना 31 अक्तूबर की है। शंकरपुर गांव के निवासी पवन कुमार ने बताया था कि उनकी गर्भवती पत्नी शीला देवी को सरकारी अस्पताल से रेफर कर दिया गया था। इसके बाद वह उसे नगर के एसपीएम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित संयुक्त जिला चिकित्सालय की महिला सर्जन डॉ. मेधावी सिंह ने 28 हजार रुपये लेकर ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर से महिला सर्जन को बुलाने की गुहार लगाई, लेकिन वह समय से नहीं पहुंचीं।
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जब डॉ. मेधावी आईं, तो प्रसूता को रेफर करने की बात कही, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। शीला देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और कोतवाली नगर में तहरीर देकर महिला सर्जन पर लापरवाही का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच में यह सामने आया कि एसपीएम हॉस्पिटल पिछले एक वर्ष से बिना पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। इस आधार पर सीएमओ ने अस्पताल को सील कर दिया और उसके संचालक डॉ. शिवकुमार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया।
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प्रभारी निरीक्षक मनोज सिंह ने बताया कि जांच में महिला सर्जन डॉ. मेधावी सिंह की लापरवाही की पुष्टि हुई है। इसके आधार पर उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच हो रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसका नाम एफआईआर में जोड़ा जाएगा।
बिना लाइसेंस संचालित डायग्नोस्टिक सेंटर सील : बलरामपुर। एसीएमओ ने सोमवार को बिना लाइसेंस संचालित अल्ट्रा डायग्नोस्टिक सेंटर को सील किया है। सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार को उतरौला क्षेत्र के धुसवा बाजार में छापा मारा। स्वास्थ्य विभाग टीम को देखते ही कई निजी अस्पताल व क्लीनिक संचालक शटर गिराकर भाग गए। एसीएमओ ने धुसवा टैक्सी स्टैंड स्थित अल्ट्रा डायग्नोस्टिक सेंटर का निरीक्षण किया। सेंटर में चिकित्सा संसाधनों का आकलन किया। निरीक्षण के समय एसीएमओ ने संचालक से पंजीकरण अभिलेख मांगा। संचालक कोई अभिलेख नहीं दिखा सका। (संवाद)