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Balrampur News: अल्ट्रासाउंड जांच बंद, गर्भवती परेशान
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बलरामपुर। जिला महिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शारदा रंजन के अवकाश पर होने के चलते 19 दिन से अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। रेडियोलॉजिस्ट 15 जनवरी तक अवकाश पर रहेंगे। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी से अल्ट्रासाउंड जांच कराने में 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक गर्भवती अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के लिए आती हैं। शुक्रवार को बिजलीपुर से अपनी पत्नी की जांच कराने आए श्याम ने बताया कि चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी है, मगर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद होने की सूचना चस्पा है। ऐसे में बाहर से जांच करानी पड़ेगी। इसी तरह तबस्सुम, रेखा, नाजरीन, केवला देवी भी बाहर से अल्ट्रासाउंड जांच कराने को लेकर परेशान दिखीं।
कड़ाके की ठंड में अस्पताल पहुंचे परिजनों को गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी पैथोलॉजी का चक्कर लगाना पड़ा। यही नहीं, मुफ्त इलाज की चाह में सरकारी अस्पताल आए लोगों को मजबूरी में 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में आमजन को मुफ्त इलाज का सरकारी दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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सरकारी अस्पतालों से प्रतिदिन 100 से अधिक गर्भवती को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच के लिए भेजा जाता है। ऐसे में अगर आंकड़ों पर गौर करें तो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शारदा रंजन के अवकाश पर रहने से निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की करीब 60 हजार रुपये प्रतिदिन की कमाई बढ़ गई है।
सर्दी के मौसम में अस्पताल में खांसी, जुकाम की दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। पत्नी जाहिदा का इलाज कराने आए शहनवाज ने बताया कि अस्पताल में खांसी की दवा नहीं है। चिकित्सक ने पर्चे पर बाहर की दवा लिख दी है। वैसे अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की कमी नहीं है।
10 जनवरी से अस्पताल में केंद्रीय टीम का दौरा प्रस्तावित है। इसमें मरीजों से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद भी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में केंद्रीय टीम के सामने जिले की स्थिति किस तरह से सामने आएगी? इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र हैं।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विनीता राय ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में अलग से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। संयुक्त अस्पताल के चिकित्सक के पास ही प्रभार है। इस वक्त वह अवकाश पर हैं। जब तक पूर्ण रूप से यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो जाती, तब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। हालांकि रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए लिखा-पढ़ी चल रही है।
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जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक गर्भवती अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के लिए आती हैं। शुक्रवार को बिजलीपुर से अपनी पत्नी की जांच कराने आए श्याम ने बताया कि चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी है, मगर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद होने की सूचना चस्पा है। ऐसे में बाहर से जांच करानी पड़ेगी। इसी तरह तबस्सुम, रेखा, नाजरीन, केवला देवी भी बाहर से अल्ट्रासाउंड जांच कराने को लेकर परेशान दिखीं।
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कड़ाके की ठंड में अस्पताल पहुंचे परिजनों को गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी पैथोलॉजी का चक्कर लगाना पड़ा। यही नहीं, मुफ्त इलाज की चाह में सरकारी अस्पताल आए लोगों को मजबूरी में 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में आमजन को मुफ्त इलाज का सरकारी दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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सरकारी अस्पतालों से प्रतिदिन 100 से अधिक गर्भवती को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच के लिए भेजा जाता है। ऐसे में अगर आंकड़ों पर गौर करें तो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शारदा रंजन के अवकाश पर रहने से निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की करीब 60 हजार रुपये प्रतिदिन की कमाई बढ़ गई है।
सर्दी के मौसम में अस्पताल में खांसी, जुकाम की दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। पत्नी जाहिदा का इलाज कराने आए शहनवाज ने बताया कि अस्पताल में खांसी की दवा नहीं है। चिकित्सक ने पर्चे पर बाहर की दवा लिख दी है। वैसे अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की कमी नहीं है।
10 जनवरी से अस्पताल में केंद्रीय टीम का दौरा प्रस्तावित है। इसमें मरीजों से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद भी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में केंद्रीय टीम के सामने जिले की स्थिति किस तरह से सामने आएगी? इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र हैं।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विनीता राय ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में अलग से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। संयुक्त अस्पताल के चिकित्सक के पास ही प्रभार है। इस वक्त वह अवकाश पर हैं। जब तक पूर्ण रूप से यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो जाती, तब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। हालांकि रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए लिखा-पढ़ी चल रही है।