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Balrampur News: खद्दर से सजाया कार्यक्रम स्थल, महात्मा गांधी ने भरा था जोश

Sun, 01 Oct 2023 10:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Oct 2023 10:52 PM IST
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The venue was decorated with Khaddar, Mahatma Gandhi had filled the enthusiasm
बलरामपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी असहयोग आंदोलन में समर्थन जुटाने बलरामपुर आए थे। 1920 से 1929 के दौरान जिले में आए तो उनके स्वागत में यूरोपियन गेस्ट हाउस (वर्तमान में माया होटल) को खद्दर से सजाया गया था। तत्कालीन महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह ने गोंडा मार्ग पर कुआनों पुल के पास स्वागत किया था।
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पहले जिले में महात्मा गांधी के आने की अनुमति तत्कालीन अंग्रेज अधिकारियों ने नहीं दी थी। उनके आने का कार्यक्रम पहले नहीं था। उनका कार्यक्रम गोंडा जिले में लगा था। स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही मौलवी अहमद जमा खां व उनके साथियों को इसकी जानकारी हुई। मौलवी गांधी को बलरामपुर लाने के लिए जुट गए। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष नामक किताब में इसका जिक्र है कि महाराज व महारानी द्वारा महात्मा गांधी के स्वागत की कमान स्वयं संभाली थी। जिसमे दर्शाया गया है की महाराज ने चार व महारानी ने महिलाओं की तरफ से दो हजार रुपये की थैली भेंट की थी। प्रसिद्ध इतिहासकार भगवती प्रसाद सिंह ने इसका उल्लेख राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष और गोंडा जनपद किताब में किया है।
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कब्रिस्तान में सभा कराने के लिए निकले थे स्वतंत्रता सेनानी
स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महात्मा गांधी की मुहिम के तहत बलरामपुर में सभा कराने की पहल मौलवी अहमद खां और उनके पांच साथियों ने की। व्यवस्था न होने पर निराश होकर मौलवी एक दिन बधना और चटाई लेकर चौक बाजार से निकले, लोगों ने उनसे पूछा आप जा कहां रहे है तो जवाब दिया कब्रिस्तान। जब शहर के अंदर लोगों में इतनी भी जिंदगी नहीं है कि महात्मा गांधी का स्वागत कर सकें तो मैं कब्रिस्तान में ही बुलाकर उनका स्वागत करूंगा। इसके बाद कार्यक्रम की तैयारी हो सकी।
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आजादी की जंग के लिए छोड़ दी राजघराने की नौकरी
1920 में बलरामपुर राज के हकीम पद पर कार्यरत अहमद जमा खां नौकरी से त्यागपत्र देकर आजादी की जंग में कूद पड़े। बलरामपुर के बलुहा मोहल्ले में रहने वाले हकीम अहमद जमा खां की बलरामपुर में असहयोग आंदोलन की सबसे पहले गिरफ्तारी हुई। उन्होंने आजादी की लड़ाई के साथ शैक्षिक विकास के लिए एक मदरसा भी स्थापित किया। वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अत्यंत करीबी थे।
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