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प्रधानमंत्री के आगमन से पहले उठी राजकीय विश्वविद्यालय की मांग
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बलरामपुर। आगामी 11 दिसम्बर को सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण करने आ रहे आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जिले के लोगों की उम्मीद बढ़ने लगी है। भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की कर्मस्थली तथा राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख की तपोस्थली के व्यापारी, शिक्षक व छात्र जिले में राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग करने लगे हैं।
इन लोगों का कहना है कि तराई क्षेत्र के शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस जनपद में राजकीय विश्वविद्यालय बनने से यहां के छात्रों को अच्छा शैक्षणिक वातावरण मिलेेगा।
व्यापारी नेता संजय शर्मा, संजय गुप्ता तथा रमेश पाहवा ने कहा कि आजादी से पूर्व बलरामपुर स्थित एमएलके पीजी कालेज को तराई का आक्सफोर्ड कहा जाता था और यहां विदेशी छात्र भी पढ़ने आते थे।
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इस कालेज में शैक्षणिक वातावरण व संसाधन भी बेजोड़ है। कई बार इस कालेज को विश्वविद्यालय बनाने की मांग तो उठी लेकिन पूरी नहीं हो सकी। कालांतर में कई विश्वविद्यालय से संबद्ध होते हुए अब जिले के डिग्री कालेज सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्घार्थनगर से संबद्घ है जिसकी जिला मुख्यालय से दूरी करीब 180 किमी है।
शिक्षक डॉ. देवेन्द्र चौहान, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. लवकुश पांडेय तथा छात्र विनय कुमार सिंह, राजेश कुमार वर्मा तथा शफीक खां आदि का कहना है कि सरकार ने जिस तरह से गोंडा में राजकीय विश्वविद्यालय बनाने की कवायद शुरु की है उसी तरह बलरामपुर में राजकीय विश्वविद्यालय बनाकर बलरामपुर तथा भगवान की तपोस्थली श्रावस्ती जनपद के शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करे।
इन लोगों ने यह भी बताया कि वह लोग अपनी इस मांग को उचित माध्यम से प्रधानमंत्री व राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। यह लोग जिले के जनप्रतिनिधियों से भी इस मांग को केन्द्र तथा प्रदेश सरकार तक पहुंचाकर इसे मंजूरी दिलाने की अपील भी करेंगे।
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इन लोगों का कहना है कि तराई क्षेत्र के शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस जनपद में राजकीय विश्वविद्यालय बनने से यहां के छात्रों को अच्छा शैक्षणिक वातावरण मिलेेगा।
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व्यापारी नेता संजय शर्मा, संजय गुप्ता तथा रमेश पाहवा ने कहा कि आजादी से पूर्व बलरामपुर स्थित एमएलके पीजी कालेज को तराई का आक्सफोर्ड कहा जाता था और यहां विदेशी छात्र भी पढ़ने आते थे।
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इस कालेज में शैक्षणिक वातावरण व संसाधन भी बेजोड़ है। कई बार इस कालेज को विश्वविद्यालय बनाने की मांग तो उठी लेकिन पूरी नहीं हो सकी। कालांतर में कई विश्वविद्यालय से संबद्ध होते हुए अब जिले के डिग्री कालेज सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्घार्थनगर से संबद्घ है जिसकी जिला मुख्यालय से दूरी करीब 180 किमी है।
शिक्षक डॉ. देवेन्द्र चौहान, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. लवकुश पांडेय तथा छात्र विनय कुमार सिंह, राजेश कुमार वर्मा तथा शफीक खां आदि का कहना है कि सरकार ने जिस तरह से गोंडा में राजकीय विश्वविद्यालय बनाने की कवायद शुरु की है उसी तरह बलरामपुर में राजकीय विश्वविद्यालय बनाकर बलरामपुर तथा भगवान की तपोस्थली श्रावस्ती जनपद के शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करे।
इन लोगों ने यह भी बताया कि वह लोग अपनी इस मांग को उचित माध्यम से प्रधानमंत्री व राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। यह लोग जिले के जनप्रतिनिधियों से भी इस मांग को केन्द्र तथा प्रदेश सरकार तक पहुंचाकर इसे मंजूरी दिलाने की अपील भी करेंगे।