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Balrampur News: कोईलरा में बनेगा राज्य विश्वविद्यालय
Tue, 12 Sep 2023 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 12 Sep 2023 11:57 PM IST
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बलरामपुर स्थित महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद इंटर कॉलेज।-संवाद
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बलरामपुर। देवीपाटन मंडल में मां पाटेश्वरी राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता अब साफ हो गया है। शहर के समीप कोईलरा में विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकृति मिलने से जिले को यह सौगात मिली है। सोमवार की देर शाम शासन स्तर से स्वीकृति का आदेश जारी हुआ।
राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना कि घोषणा विधानसभा के बजट सत्र - 2023 माह फरवरी में हुई थी। इसमें 50 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया था। उस समय गोंडा जिले के करनैलगंज तहसील के डोमाकल्पी में प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए भूमि चिन्हित कर मुहैय्या कराई गई थी। इस बीच बलरामपुर वासियों ने भी एक राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग सीएम से की।
यहां के लोगों का कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में बलरामपुर को प्रदेश सरकार की तरफ से अब तक कोई बड़ी सौगात नहीं मिली है। इसके बाद ही जिले में प्रस्तावित राजकीय विश्वविद्यालय को बनाए जाने के लिए 0 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हुई। जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देशन में जिला प्रशासन ने कोईलरा में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि चिह्नित की है। प्रशासन ने चिह्नित भूमि का अधिग्रहण कर इसे निर्माण कार्य के लिए अधिग्रहीत किए जाने की संस्तुति भी शासन को भेज दी है।
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बीते दिनों तुलसीपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संकेत दिया था कि जिले में जल्दी राजकीय विश्वविद्यालय की भी स्थापना होगी। डीएम ने बताया कि प्रस्तावित मां पाटेश्वरी राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि का प्रबंध हो चुका है। जल्द ही इससे जुड़ी अन्य औपचारिकताओं को भी पूरा करा लिया जाएगा।
जिले के महाविद्यालयों का संचालन सिद्धार्थ नगर विश्वविद्यालय से संबद्धता के आधार पर हो रहा है। यह विश्वविद्यालय जिले से 140 किलोमीटर दूरी पर है। इसके पहले डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों का संचालन हो रहा था। वह भी सौ किलोमीटर से अधिक दूरी पर था। अब जिले में ही राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित होने से जिले के डिग्री कॉलेजों के साथ ही यहां स्नातक व परास्नातक की शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए चयनित कोईलरा स्थल श्रावस्ती व बहराइच जिले के भी मध्य में हैं। गोंडा से भी इसकी दूरी महज 45 किमी ही होगी। डीएम अरविंद सिंह बताया कि भूमि का चयन भौगोलिक स्थितियों को देखकर किया गया है ताकि मंडल से जुड़े अधिकांश जिलों को इसका पूरा फायदा मिल सके।
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राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना कि घोषणा विधानसभा के बजट सत्र - 2023 माह फरवरी में हुई थी। इसमें 50 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया था। उस समय गोंडा जिले के करनैलगंज तहसील के डोमाकल्पी में प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए भूमि चिन्हित कर मुहैय्या कराई गई थी। इस बीच बलरामपुर वासियों ने भी एक राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग सीएम से की।
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यहां के लोगों का कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में बलरामपुर को प्रदेश सरकार की तरफ से अब तक कोई बड़ी सौगात नहीं मिली है। इसके बाद ही जिले में प्रस्तावित राजकीय विश्वविद्यालय को बनाए जाने के लिए 0 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हुई। जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देशन में जिला प्रशासन ने कोईलरा में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि चिह्नित की है। प्रशासन ने चिह्नित भूमि का अधिग्रहण कर इसे निर्माण कार्य के लिए अधिग्रहीत किए जाने की संस्तुति भी शासन को भेज दी है।
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बीते दिनों तुलसीपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संकेत दिया था कि जिले में जल्दी राजकीय विश्वविद्यालय की भी स्थापना होगी। डीएम ने बताया कि प्रस्तावित मां पाटेश्वरी राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि का प्रबंध हो चुका है। जल्द ही इससे जुड़ी अन्य औपचारिकताओं को भी पूरा करा लिया जाएगा।
जिले के महाविद्यालयों का संचालन सिद्धार्थ नगर विश्वविद्यालय से संबद्धता के आधार पर हो रहा है। यह विश्वविद्यालय जिले से 140 किलोमीटर दूरी पर है। इसके पहले डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों का संचालन हो रहा था। वह भी सौ किलोमीटर से अधिक दूरी पर था। अब जिले में ही राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित होने से जिले के डिग्री कॉलेजों के साथ ही यहां स्नातक व परास्नातक की शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए चयनित कोईलरा स्थल श्रावस्ती व बहराइच जिले के भी मध्य में हैं। गोंडा से भी इसकी दूरी महज 45 किमी ही होगी। डीएम अरविंद सिंह बताया कि भूमि का चयन भौगोलिक स्थितियों को देखकर किया गया है ताकि मंडल से जुड़े अधिकांश जिलों को इसका पूरा फायदा मिल सके।