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Balrampur News: कुड़ऊ गांव की सरहद पर पहुंची राप्ती
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बलरामपुर के कड़ऊ गांव के पास की वर्तमान स्थिति।-संवाद
गैड़ास बुजुर्ग/बलरामपुर। राप्ती नदी कटान करके गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के कुड़ऊ गांव की सरहद तक पहुंच चुकी है। गांव के बगल राप्ती नदी की धारा बह रही है। गांव के 23 किसानों की 97 बीघे जमीन राप्ती नदी में समाहित हो चुकी है। नदी की कटान से ग्रामीणों को बेघर होने का डर सता रहा है। यदि बरसात से पहले गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो 125 परिवार बेघर हो जाएंगे।
जिले की तीनों तहसीलों में 75 से अधिक गांवों पर हर वर्ष राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के साथ 17 पहाड़ी नालों की बाढ़ का कहर टूटता है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ से हर वर्ष जिले की सदर, उतरौला व तुलसीपुर तहसील के 350 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। राप्ती नदी की बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के गांव झेलते हैं। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक का कुड़ऊ गांव राप्ती नदी के मुहाने पर बसा है। यह गांव बाढ़ में हर वर्ष घिर जाता है। गांव के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता है।
ग्रामीण रामजी बताते हैं कि कुड़ऊ गांव पहले सिर्फ बाढ़ की चपेट में आता था, लेकिन पिछले चार वर्षों से कटान का भी सामना करना पड़ रहा है। राप्ती नदी कटान करके गांव के बिलकुल करीब आ चुकी है। ग्रामीणों के पक्के मकान कटान की जद में आ गए हैं। कटान में रामजी की 10 बीघे, नासिर हुसैन की 15 बीघे, दिलीप की 10 बीघे, जग्गू की 10 बीघे, हनीफ की पांच बीघे, राम दुलारे की 10 बीघे, जमशेद की पांच बीघे और जफर खान की 10 बीघे सहित 23 किसानों की 97 बीघे जमीन निगल चुकी है। (संवाद)
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कई बार दिया गया प्रार्थनापत्र
ग्रामीण बताते हैं कि कुड़ऊ गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के अस्तित्व पर कटान का खतरा मंडराएगा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के कुड़ऊ गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के इंजीनियरों से कटानरोधी कार्य का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। शासन से बजट मिलने के बाद बाढ़ खंड के इंजीनियरों के माध्यम से कटानरोधी कार्य कराया जाएगा।
-राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला
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जिले की तीनों तहसीलों में 75 से अधिक गांवों पर हर वर्ष राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के साथ 17 पहाड़ी नालों की बाढ़ का कहर टूटता है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ से हर वर्ष जिले की सदर, उतरौला व तुलसीपुर तहसील के 350 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। राप्ती नदी की बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के गांव झेलते हैं। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक का कुड़ऊ गांव राप्ती नदी के मुहाने पर बसा है। यह गांव बाढ़ में हर वर्ष घिर जाता है। गांव के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता है।
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ग्रामीण रामजी बताते हैं कि कुड़ऊ गांव पहले सिर्फ बाढ़ की चपेट में आता था, लेकिन पिछले चार वर्षों से कटान का भी सामना करना पड़ रहा है। राप्ती नदी कटान करके गांव के बिलकुल करीब आ चुकी है। ग्रामीणों के पक्के मकान कटान की जद में आ गए हैं। कटान में रामजी की 10 बीघे, नासिर हुसैन की 15 बीघे, दिलीप की 10 बीघे, जग्गू की 10 बीघे, हनीफ की पांच बीघे, राम दुलारे की 10 बीघे, जमशेद की पांच बीघे और जफर खान की 10 बीघे सहित 23 किसानों की 97 बीघे जमीन निगल चुकी है। (संवाद)
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कई बार दिया गया प्रार्थनापत्र
ग्रामीण बताते हैं कि कुड़ऊ गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के अस्तित्व पर कटान का खतरा मंडराएगा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के कुड़ऊ गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के इंजीनियरों से कटानरोधी कार्य का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। शासन से बजट मिलने के बाद बाढ़ खंड के इंजीनियरों के माध्यम से कटानरोधी कार्य कराया जाएगा।
-राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला