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Balrampur News: राम बुझारत आत्मदाह प्रकरण की हाईकोर्ट में सुनवाई कल

Sat, 01 Nov 2025 10:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 10:16 PM IST
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Ram Bujhart self-immolation case to be heard in High Court tomorrow
राम बुझारत।-फाइल फोटो - फोटो : इकौना क्षेत्र में भीगी फसल को दिखाता किसान।
बलरामपुर। गैड़ास बुजुर्ग के बहुचर्चित राम बुझारत आत्मदाह प्रकरण में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई से पहले प्रशासन ने शनिवार को गोपनीय रिपोर्ट तैयार की। दो वर्ष पूर्व 23 अक्तूबर 2023 को हुई घटना में अब हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। 8 अक्तूबर को लखनऊ खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शासन से जवाब मांगा था कि आखिर अभियोजन स्वीकृति अब तक क्यों नहीं दी गई। इसी के मद्देनजर बलरामपुर प्रशासन ने शनिवार को रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने का निर्णय लिया। तीन नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह रिपोर्ट राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।
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जिला प्रशासन की ओर से तैयार रिपोर्ट में कई अहम बिंदु शामिल किए गए हैं। वहीं कार्रवाई में देरी पर बचाव का रास्ता भी निकाला गया है। यह रिपोर्ट अभियोजन स्वीकृति, विभागीय जांच और एसआईटी की अनुशंसाओं से जुड़ी है। शासन के निर्देश पर इसे लखनऊ भेजे जाने की प्रक्रिया देर शाम तक जारी रही। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में तत्कालीन थानाध्यक्ष पवन कुमार कनौजिया के खिलाफ एसआईटी की जांच टिप्पणियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जिला प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई, साक्ष्य संकलन और पीड़ित परिवार से हुई पूछताछ के बिंदुओं को भी शामिल किया है। एसपी कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के बीच दिनभर रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की कवायद होती रही। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घटना के बाद जिलाधिकारी न्यायालय पर एक प्रकरण की सुनवाई हो रही है, जो अभी विचाराधीन है। साथ ही पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर भी तत्कालीन थानाध्यक्ष ही दोषी मिले थे, जिन्हें निलंबित किया गया था। इन तथ्यों को शामिल किया गया है।
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तीन को तय होगी तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की दिशा
तत्कालीन थानाध्यक्ष पवन कुमार कनौजिया, जो वर्तमान में आईजी देवीपाटन कार्यालय में तैनात हैं, एसआईटी रिपोर्ट में आरोपी बनाए गए थे। अब हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी अभियोजन स्वीकृति का मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मृतक की पत्नी कुसुमा देवी ने कहा कि प्रशासन और शासन के रवैये से वे निराश हैं, लेकिन अब न्यायपालिका से उम्मीद है। तीन नवंबर की सुनवाई में क्या प्रशासनिक रिपोर्ट न्याय के रास्ते को आगे बढ़ाएगी, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं।
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