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सूर्यकुंड में डुबकी लगाकर की मां पाटेश्वरी की पूजा
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बलरामपुर। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर सूर्यकुंड में डुबकी लगाकर श्रद्घालुओं ने मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना की। जिले के देवी मंदिरों, पूजा-पंडालों व घरों में शारदीय नवरात्र के पाचवें दिन बुधवार को विधि-विधान के साथ मां स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्घालुओं ने बिजलीपुर मंदिर सहित जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में भोर पहर से देर शाम तक पूजा-अर्चना की। कोविड-19 महामारी के चलते झारखंडी मंदिर में सामूहिक यज्ञ व कन्या पूजन कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।
मां भगवती की पांचवी शक्ति स्कंदमाता के रूप में जानी जाती है। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता का स्वरूप नारी और मातृ शक्ति का सजीव चरित्र है। स्कंदकुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। गणेश जी देवी के मानस पुत्र हैं और कार्तिकेय जी गर्भ से उत्पन्न हुए। तारकासुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्र से उत्पन्न पुत्र से ही मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती जी का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ। इससे कार्तिकेय पैदा हुए और तारकासुर का बध किया।
शंकर-पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में विवाह परंपरा का प्रारंभ माना गया है। कन्यादान, गर्भधारण इन सभी की उत्पत्ति शिव और पार्वती से हुई है। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में भोर पहर से देर शाम तक मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्घालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान किया और कतारबद्घ होकर मां पाटेश्वरी का दर्शन किया। श्रद्घालुओं ने नारियल व चुनरी चढ़ाकर देवी से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। बिजलीपुर स्थित मां बिजलेश्वरी देवी मंदिर में देवी व श्रीयंत्र की पूजा के लिए दिन भर श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा।
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झारखंडी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, सोहेलवा जंगल स्थित रहिया देवी मंदिर, सम्मय माता मंदिर, कालीथान, बड़की बहिनी मंदिर, उतरौला के ज्वाला महरानी मंदिर, पेहर बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, महुआ स्थित करिया दुर्गा मंदिर में भी माता रानी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ी। झारखंडी मंदिर के प्रधान पुजारी लाल जी गिरि ने बताया कि प्रबंध समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए शारीदय नवरात्र के अंतिम दिन मंदिर परिसर में सामूहिक यज्ञ व कन्या पूजन भोग के कार्यक्रम नहीं किए जाएंगे। एसपी देवरंजन वर्मा के निर्देश पर जिले के सभी कोतवाली व थानों की पुलिस प्रमुख देवी मंदिरों में मौजूद रहकर श्रद्घालुओं की सुरक्षा में दिन भर जुटी रही। भारत-नेपाल सीमा पर भी कड़ी चौकसी बरती गई।
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मां भगवती की पांचवी शक्ति स्कंदमाता के रूप में जानी जाती है। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता का स्वरूप नारी और मातृ शक्ति का सजीव चरित्र है। स्कंदकुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। गणेश जी देवी के मानस पुत्र हैं और कार्तिकेय जी गर्भ से उत्पन्न हुए। तारकासुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्र से उत्पन्न पुत्र से ही मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती जी का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ। इससे कार्तिकेय पैदा हुए और तारकासुर का बध किया।
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शंकर-पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में विवाह परंपरा का प्रारंभ माना गया है। कन्यादान, गर्भधारण इन सभी की उत्पत्ति शिव और पार्वती से हुई है। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में भोर पहर से देर शाम तक मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्घालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान किया और कतारबद्घ होकर मां पाटेश्वरी का दर्शन किया। श्रद्घालुओं ने नारियल व चुनरी चढ़ाकर देवी से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। बिजलीपुर स्थित मां बिजलेश्वरी देवी मंदिर में देवी व श्रीयंत्र की पूजा के लिए दिन भर श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा।
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झारखंडी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, सोहेलवा जंगल स्थित रहिया देवी मंदिर, सम्मय माता मंदिर, कालीथान, बड़की बहिनी मंदिर, उतरौला के ज्वाला महरानी मंदिर, पेहर बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, महुआ स्थित करिया दुर्गा मंदिर में भी माता रानी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ी। झारखंडी मंदिर के प्रधान पुजारी लाल जी गिरि ने बताया कि प्रबंध समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए शारीदय नवरात्र के अंतिम दिन मंदिर परिसर में सामूहिक यज्ञ व कन्या पूजन भोग के कार्यक्रम नहीं किए जाएंगे। एसपी देवरंजन वर्मा के निर्देश पर जिले के सभी कोतवाली व थानों की पुलिस प्रमुख देवी मंदिरों में मौजूद रहकर श्रद्घालुओं की सुरक्षा में दिन भर जुटी रही। भारत-नेपाल सीमा पर भी कड़ी चौकसी बरती गई।