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मां कालरात्रि की साधना के लिए कालीथानो पर जुटी श्रद्घालुओं की भीड़
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फोटो-5-बलरामपुर के शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में पूजा अर्चना करते महंत मिथिलेश नाथ योगी व अन्य।-संव
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। नवरात्र सप्तमी के दिन तंत्र-मंत्र एवं सिद्धियों की देवी मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना विधि विधान से की गई। देवी मंदिरों के साथ-साथ कालीथानों पर भी देवी की आराधना के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी। शक्तिपीठ देवी पाटन में माता के जयकारे एवं घंटों की टंकार से पूरा नगर गूंजायमान हो गया।
नवरात्र सप्तमी के दिन मां भगवती की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है। धर्म ग्रन्थों के अनुसार शुम्भ-निशुंभ की सेना का संघार करने के लिए देवी ने अपनी सभी शक्तियों को विभिन्न रूपों में अवतरित किया। रक्तबीज नामक राक्षस का संघार रक्तदंतिका बनकर मां कालरात्रि ने ही किया था। भगवान शंकर द्वारा एकबार काली पुकारे जाने के कारण ही देवी को कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र सप्तमी की रात यज्ञ-हवन करने से साधकों के सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। तंत्र-मंत्र एवं सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां कालरात्रि की साधना की जाती है। काली माता का विधि पूर्वक पूजा करने से जहां सारी बाधायें दूर होती हैं, वहीं विभिन्न रोगों से ग्रस्त मरीज भी रोग मुक्त हो जाता है।
नवरात्र सप्तमी के दिन शुक्रवार को शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भोर पहर से भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के बाद मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की। देवी आराधना के लिए मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी, जरवा स्थित रहिया देवी, उतरौला स्थित ज्वाला देवी तथा बलरामपुर नगर स्थित झारखण्डी मंदिर, सम्मय माता मंदिर एवं सभी काली थानो पर सुबह से लेकर देररात तक काली भक्तों ने मां कालरात्रि की आराधना कर परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
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नवरात्र सप्तमी के दिन मां भगवती की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है। धर्म ग्रन्थों के अनुसार शुम्भ-निशुंभ की सेना का संघार करने के लिए देवी ने अपनी सभी शक्तियों को विभिन्न रूपों में अवतरित किया। रक्तबीज नामक राक्षस का संघार रक्तदंतिका बनकर मां कालरात्रि ने ही किया था। भगवान शंकर द्वारा एकबार काली पुकारे जाने के कारण ही देवी को कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र सप्तमी की रात यज्ञ-हवन करने से साधकों के सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। तंत्र-मंत्र एवं सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां कालरात्रि की साधना की जाती है। काली माता का विधि पूर्वक पूजा करने से जहां सारी बाधायें दूर होती हैं, वहीं विभिन्न रोगों से ग्रस्त मरीज भी रोग मुक्त हो जाता है।
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नवरात्र सप्तमी के दिन शुक्रवार को शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भोर पहर से भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के बाद मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की। देवी आराधना के लिए मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी, जरवा स्थित रहिया देवी, उतरौला स्थित ज्वाला देवी तथा बलरामपुर नगर स्थित झारखण्डी मंदिर, सम्मय माता मंदिर एवं सभी काली थानो पर सुबह से लेकर देररात तक काली भक्तों ने मां कालरात्रि की आराधना कर परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
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