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Balrampur News: राज्य विश्वविद्यालय निर्माण की विधिक बाधाएं खत्म
Wed, 17 Apr 2024 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 17 Apr 2024 11:15 PM IST
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बलरामपुर। जिले के कोयलरा में मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की विधिक बाधाएं अब पूरी तरह समाप्त हो गईं हैं। जिला प्रशासन की कोशिशों और पेश किए गए दावों पर हाईकोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के बाद अब हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता की पीठ ने भी बलरामपुर के बजाय मंडल मुख्यालय गोंडा में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दायर याचिका खारिज कर दी है।
विश्वविद्यालय मामले में डीएम अरविंद सिंह ने कानूनी विशेषज्ञों एवं स्वयं के विवेक से न्यायालय में तथ्यों के साथ पैरवी की। बताया कि बलरामपुर आकांक्षी जनपद में शामिल है। इसके अलावा विश्वविद्यालय निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रजिस्ट्रार की नियुक्ति के साथ ही शिलान्यास भी हो चुका है। इसके अलावा बलरामपुर में विवि के लिए निर्धारित स्थान तीन जिलों के मध्य में स्थित है। ऐसे में अब कोई भी परिवर्तन संभव नहीं है। याचिका भी सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर नहीं निजी हित को साधने के लिए दायर की गई थी। हाईकोर्ट में तथ्यों के साथ दावा पेश किया गया कि ये याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। याचिकाकर्ता के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई अधिकार भी नहीं है। डीएम ने बताया कि हाईकोर्ट से भी याचिका खारिज होने के बाद अब बलरामपुर में विश्वविद्यालय स्थापना में किसी तरह की अड़चन नहीं है। निर्माण भी प्रक्रिया में है और तय समय पर जिले में विश्वविद्यालय आकार लेगा।
कोयलरा गांव में राज्य विश्वविद्यालय निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। 16 करोड़ 52 लाख रुपये से 20 हेक्टेयर जमीन की खरीद फरवरी में ही पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 146 करोड़ रुपये से भवन निर्माण की प्रक्रिया भी मार्च तक पूरा की जा चुकी है। 18 महीने में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि जिस तरह तैयारी हो रही है, उससे साल 2026 में विश्वविद्यालय का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद गोंडा व बहराइच के महाविद्यालयों की डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से और बलरामपुर व श्रावस्ती के महाविद्यालयों की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्धता खत्म कर राज्य विश्वविद्यालय से संचालन संभव हो सकेगा।
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विश्वविद्यालय मामले में डीएम अरविंद सिंह ने कानूनी विशेषज्ञों एवं स्वयं के विवेक से न्यायालय में तथ्यों के साथ पैरवी की। बताया कि बलरामपुर आकांक्षी जनपद में शामिल है। इसके अलावा विश्वविद्यालय निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रजिस्ट्रार की नियुक्ति के साथ ही शिलान्यास भी हो चुका है। इसके अलावा बलरामपुर में विवि के लिए निर्धारित स्थान तीन जिलों के मध्य में स्थित है। ऐसे में अब कोई भी परिवर्तन संभव नहीं है। याचिका भी सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर नहीं निजी हित को साधने के लिए दायर की गई थी। हाईकोर्ट में तथ्यों के साथ दावा पेश किया गया कि ये याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। याचिकाकर्ता के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई अधिकार भी नहीं है। डीएम ने बताया कि हाईकोर्ट से भी याचिका खारिज होने के बाद अब बलरामपुर में विश्वविद्यालय स्थापना में किसी तरह की अड़चन नहीं है। निर्माण भी प्रक्रिया में है और तय समय पर जिले में विश्वविद्यालय आकार लेगा।
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कोयलरा गांव में राज्य विश्वविद्यालय निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। 16 करोड़ 52 लाख रुपये से 20 हेक्टेयर जमीन की खरीद फरवरी में ही पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 146 करोड़ रुपये से भवन निर्माण की प्रक्रिया भी मार्च तक पूरा की जा चुकी है। 18 महीने में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि जिस तरह तैयारी हो रही है, उससे साल 2026 में विश्वविद्यालय का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद गोंडा व बहराइच के महाविद्यालयों की डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से और बलरामपुर व श्रावस्ती के महाविद्यालयों की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्धता खत्म कर राज्य विश्वविद्यालय से संचालन संभव हो सकेगा।
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