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Balrampur News: गोबर से बने दीपक दूर करेंगे अंधियारा, रोशन होंगे घर
Sat, 28 Oct 2023 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 28 Oct 2023 12:24 AM IST
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बलरामपुर के शेखरपुर गांव में बनाई गई रंगीन दीए।
बलरामपुर। इस दीपावली पर गोबर से बने दीपक (दिया) अंधियारा दूर कर घरों व सरकारी भवनों को रोशन करेंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की तरफ से समूह की महिलाओं गोबर से बने दिए बनाने के लिए प्रशिक्षित कर दीपक बनाने के लिए जरूरी सामग्री भी मुहैया कराई जा रही है। इसके तहत गैसड़ी व उतरौला क्षेत्र की पुरैनिया जाट गांव की दस-दस महिलाएं गोबर से दीपक तैयार करने में जुटी हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। गोबर से धूपबत्ती व अगरबत्ती बनाने के बाद अब समूह की महिलाएं गोबर से दीपक (दिया) बनाएंगी। इस बार दीपावली पर गोबर से बने दीपक से घर व सरकारी भवन जगमगाएंगे। यह जानकारी एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक अखिलेश मौर्य ने दी।
उन्होंने बताया कि दीया बनाने के लिए गोबर को पहले सूखाकर पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद गोबर के पाउडर में प्रीमिक्स पाउडर मिलाकर इसे गूंठकर दीपक का आकार दिया जाता है। एक किलो गोबर के पाउडर में 100 ग्राम प्रीमिक्स पाउडर मिलाया जाता है। दीपक को सूखने के बाद समूह की महिलाएं इसे सुंदर दिखाने के लिए पेंटिंग भी करेंगी। गोबर से बिक्री के लिए छोटे-बड़े सभी तरह के दीपक बिक्री के लिए तैयार कराए जा रहे हैं। इस बार दीपावली पर सरकारी भवनों में रोशनी के लिए भी गोबर से बने इन दीपकों को विशेष तौर पर खरीदा जाएगा।
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दीयों को आकर्षण बनाने में जुटी महिलाएं
सदर ब्लॉक के शेखरपुर गांव की समूह सखी से जुड़ी महिलाएं मिट्टी के दीयों पर विभिन्न प्रकार की कलाकृति की पेंटिंग कर उन्हें स्वरूप देने में जुटी हैं। समूह सखी सुमन उपाध्याय की टीम बाजार से दीपक खरीदकर उस पर आकर्षण पेंटिंग कर बेचने से अच्छी बिक्री होगी। समूह सखी ने बताया कि उन्हें गोबर से बने दीया सप्लाई करने का आर्डर भी मिल रहा है। अभी तक पांच सौ दीया तैयार कर उन पर पेंटिंग बनाई जा चुकी है। सात छोटे दीया व एक बड़ा दीया का सेट तैयार कर उसे 30 रुपये प्रति सेट की दर से बेचा जा रहा है।
बिक्री के लिए लगेंगे स्टाल
समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए दीयों की बिक्री के लिए विकास भवन परिसर में एक स्टाल भी लगवाया जाएगा। विकास भवन के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी समूह की महिलाओं द्वारा हाथ से तैयार किए गए गोबर के दीया खरीदने को प्रेरित किया जाएगा।
- मंजू त्रिवेदी, उपायुक्त एनआरएलएम
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। गोबर से धूपबत्ती व अगरबत्ती बनाने के बाद अब समूह की महिलाएं गोबर से दीपक (दिया) बनाएंगी। इस बार दीपावली पर गोबर से बने दीपक से घर व सरकारी भवन जगमगाएंगे। यह जानकारी एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक अखिलेश मौर्य ने दी।
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उन्होंने बताया कि दीया बनाने के लिए गोबर को पहले सूखाकर पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद गोबर के पाउडर में प्रीमिक्स पाउडर मिलाकर इसे गूंठकर दीपक का आकार दिया जाता है। एक किलो गोबर के पाउडर में 100 ग्राम प्रीमिक्स पाउडर मिलाया जाता है। दीपक को सूखने के बाद समूह की महिलाएं इसे सुंदर दिखाने के लिए पेंटिंग भी करेंगी। गोबर से बिक्री के लिए छोटे-बड़े सभी तरह के दीपक बिक्री के लिए तैयार कराए जा रहे हैं। इस बार दीपावली पर सरकारी भवनों में रोशनी के लिए भी गोबर से बने इन दीपकों को विशेष तौर पर खरीदा जाएगा।
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दीयों को आकर्षण बनाने में जुटी महिलाएं
सदर ब्लॉक के शेखरपुर गांव की समूह सखी से जुड़ी महिलाएं मिट्टी के दीयों पर विभिन्न प्रकार की कलाकृति की पेंटिंग कर उन्हें स्वरूप देने में जुटी हैं। समूह सखी सुमन उपाध्याय की टीम बाजार से दीपक खरीदकर उस पर आकर्षण पेंटिंग कर बेचने से अच्छी बिक्री होगी। समूह सखी ने बताया कि उन्हें गोबर से बने दीया सप्लाई करने का आर्डर भी मिल रहा है। अभी तक पांच सौ दीया तैयार कर उन पर पेंटिंग बनाई जा चुकी है। सात छोटे दीया व एक बड़ा दीया का सेट तैयार कर उसे 30 रुपये प्रति सेट की दर से बेचा जा रहा है।
बिक्री के लिए लगेंगे स्टाल
समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए दीयों की बिक्री के लिए विकास भवन परिसर में एक स्टाल भी लगवाया जाएगा। विकास भवन के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी समूह की महिलाओं द्वारा हाथ से तैयार किए गए गोबर के दीया खरीदने को प्रेरित किया जाएगा।
- मंजू त्रिवेदी, उपायुक्त एनआरएलएम