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भट्ठा श्रमिकों को बेरोजगार होने का डर
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बलरामपुर। ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले 25 हजार श्रमिकों को बेरोजगार होने का डर सताने लगा है। भट्ठा संचालन ठप करने की चेतावनी से श्रमिकों के बेरोजगार होने का संकट गहराया है। आठ हजार की जगह 25 हजार रुपये टन में कोयला मिल रहा है। कोयले की बढ़ी कीमतों के चलते ईंट-भट्ठा मालिकों ने अगले सीजन में संचालन ठप करने की चेतावनी दी है। एक अप्रैल से जीएसटी में संशोधन होने से ईंट-भट्ठा कारोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि ईंट-भट्ठों का कारोबार बंद होगा तो श्रमिकों को रोजगार की तलाश में भटकना पड़ेगा। साथ ही घरों के निर्माण पर भी असर पड़ेगा।
जिले में 150 ईंट-भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक ईंट-भट्ठे पर 150 से 175 परिवार रोजगार से जुड़े हुए हैं। जिले के सभी ईंट-भट्ठों पर करीब श्रमिकों का परिवार रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। मौजूदा समय में कोयला संकट होने के चलते ईंट-भट्ठा मालिकों ने अगले सीजन में कोराबार न करने का निर्णय लिया है। ईंट-भट्ठों का संचालन ठप हो जाने से सबसे पहले श्रमिकों पर असर पड़ेगा। जनवरी 2022 में आठ हजार रुपये में एक टन कोयला मिलता था जिसकी कीमत अप्रैल 2022 में 25 हजार रुपये टन पहुंच गई है। कोयले पर लगी महंगाई की आग से ईंट-भट्ठा कारोबार तप रहा है।
कोयला संकट होने से ईंटें महंगी होने के साथ गहरी आंच न मिलने से कमजोर पड़ रही हैं। ईंट की कीमत भी छह की जगह नौ रुपये तक पहुंच गई है। पहले 80 फीसदी कोयला ईंट पकाने में इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब 30 फीसदी भी नहीं हो रहा है। प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद आवंटित भट्ठों को दो साल से कोयला नहीं मिल पा रहा है। कोयला महंगा होने से भट्ठा मालिक इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। डिमांड बढ़ने से एग्रो वेस्ट का संकट भी खड़ा हो गया है। 2.5 रुपये में बिकने वाला एग्रो वेस्ट अब चार रुपये किलो बिक रहा है। जीएसटी की दरों में भी भारी वृद्घि कर दी गई है। सरकार की ओर से प्रदूषण के गलत कानूनों में सुधार न करने से भट्ठा मालिक ईंट का कारोबार करेंगे तो बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। ईंट-भट्ठों में चारा व भूसा के प्रयोग पर पाबंदी है। प्रशासन ने चेतावनी दी गई है कि चारा व भूसा से ईंट पकती मिली तो कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)
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अगले सीजन में ईंट-भट्ठा बंद करने का निर्णय
ईंट निर्माता कल्याण समिति की तरफ से कोयले के संकट व बढ़ी कीमतों को लेकर बीते दिन जिलाध्यक्ष मारुफ खां की अध्यक्षता में बैठक की गई। बैठक में मौजूद सभी ईंट निर्माताओं की तरफ से निर्णय लिया गया कि अगले सीजन में ईंट-भट्ठों पर उत्पादन कार्य पूरी तरह से ठप रखा जाएगा। कोई भी भट्ठा मालिक न तो लेबर को एडवांस में पैसे देगा और न ही कोयले का भंडारण करेगा। कोयले की महंगाई के चलते ईंट-भट्ठे का कारोबार करना आसान नहीं रह गया है।
राधा कृष्ण, कोषाध्यक्ष ईंट निर्माता कल्याण समिति
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जिले में 150 ईंट-भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक ईंट-भट्ठे पर 150 से 175 परिवार रोजगार से जुड़े हुए हैं। जिले के सभी ईंट-भट्ठों पर करीब श्रमिकों का परिवार रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। मौजूदा समय में कोयला संकट होने के चलते ईंट-भट्ठा मालिकों ने अगले सीजन में कोराबार न करने का निर्णय लिया है। ईंट-भट्ठों का संचालन ठप हो जाने से सबसे पहले श्रमिकों पर असर पड़ेगा। जनवरी 2022 में आठ हजार रुपये में एक टन कोयला मिलता था जिसकी कीमत अप्रैल 2022 में 25 हजार रुपये टन पहुंच गई है। कोयले पर लगी महंगाई की आग से ईंट-भट्ठा कारोबार तप रहा है।
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कोयला संकट होने से ईंटें महंगी होने के साथ गहरी आंच न मिलने से कमजोर पड़ रही हैं। ईंट की कीमत भी छह की जगह नौ रुपये तक पहुंच गई है। पहले 80 फीसदी कोयला ईंट पकाने में इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब 30 फीसदी भी नहीं हो रहा है। प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद आवंटित भट्ठों को दो साल से कोयला नहीं मिल पा रहा है। कोयला महंगा होने से भट्ठा मालिक इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। डिमांड बढ़ने से एग्रो वेस्ट का संकट भी खड़ा हो गया है। 2.5 रुपये में बिकने वाला एग्रो वेस्ट अब चार रुपये किलो बिक रहा है। जीएसटी की दरों में भी भारी वृद्घि कर दी गई है। सरकार की ओर से प्रदूषण के गलत कानूनों में सुधार न करने से भट्ठा मालिक ईंट का कारोबार करेंगे तो बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। ईंट-भट्ठों में चारा व भूसा के प्रयोग पर पाबंदी है। प्रशासन ने चेतावनी दी गई है कि चारा व भूसा से ईंट पकती मिली तो कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)
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अगले सीजन में ईंट-भट्ठा बंद करने का निर्णय
ईंट निर्माता कल्याण समिति की तरफ से कोयले के संकट व बढ़ी कीमतों को लेकर बीते दिन जिलाध्यक्ष मारुफ खां की अध्यक्षता में बैठक की गई। बैठक में मौजूद सभी ईंट निर्माताओं की तरफ से निर्णय लिया गया कि अगले सीजन में ईंट-भट्ठों पर उत्पादन कार्य पूरी तरह से ठप रखा जाएगा। कोई भी भट्ठा मालिक न तो लेबर को एडवांस में पैसे देगा और न ही कोयले का भंडारण करेगा। कोयले की महंगाई के चलते ईंट-भट्ठे का कारोबार करना आसान नहीं रह गया है।
राधा कृष्ण, कोषाध्यक्ष ईंट निर्माता कल्याण समिति