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उद्यानी खेती से किसानों को आय दोगुनी करने का मौका
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बलरामपुर। किसानों की आय को बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग की तरफ से मदद करने का हाथ बढ़ाया गया है। उद्यानी खेती से किसानों को अपनी आय दोगुनी करने का सुनहरा मौका है। किसानों को मसाला खेती करने के लिए उद्यान विभाग ने योजना लागू की है। उद्यान विभाग पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उद्यान विभाग की फव्वारा योजना का लाभ किसानों को अन्य फसलों में सिंचाई करने का सुनहरा मौका मिलेगा।
जिला उद्यान अधिकारी लाल बहादुर मौर्य ने बीते दिन बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मसालों की खेती करने वाले किसानों का पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण शुरु कर दिया गया है। किसानों को विकास भवन स्थित उद्यान विभाग के दफ्तर में 10 नवंबर तक लहसुन अथवा प्याज का बीज दिया जाएगा। एक किसान को लहसुन या प्याज में से कोई एक प्रकार का बीज मिलेगा। पावती के साथ पहले आओ, पहले पाओ के नीति पर किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। एक किसान को अधिकतम एक हेक्टअर क्षेत्रफल का लाभार्थी बनाया जा सकता है। ऐसे किसान जो प्याज अथवा लहसुन की खेती के लिए मिनी फव्वारा से सिंचाई का संसाधन लेने चाहते हैं उन्हें छूट दी जाएगी।
मिनी फव्वारा संसाधन पर 50 हजार का खर्च आएगा जिसमें 45 हजार की छूट दी जाएगी। मात्र पांच हजार रुपये में ही मिनी स्प्रिंकलर की स्थापना हो जाएगी। एक हेक्टेयर के लिए किसानों को 10 हजार रुपये देना होगा। माइक्रो स्प्रिंकलर की स्थापना में एक एकड़ के लिए चार हजार रुपये और एक हेक्टेयर के लिए सात हजार रुपये कृषक अंशदान के रुप में देना होगा। मिनी व माइक्रो स्प्रिंकलर लगाकर प्याज व लहसुन के साथ सब्जी फसल चना, मटर, मसूर, सरसों व गेहूं की भी फव्वारा से सिंचाई कर सकते हैं। फव्वारा से सिंचाई करने पर उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि व लागत में 25 प्रतिशत की कमी आएगी। गन्ना, आम व पपीता की बागवानी, टमाटर, बैंगन व मिर्च आदि के सब्जी फसलों में ड्रिप लगाने पर 90 प्रतिशत का अनुदान किसानों को दिया जाएगा।
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जिला उद्यान अधिकारी लाल बहादुर मौर्य ने बीते दिन बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मसालों की खेती करने वाले किसानों का पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण शुरु कर दिया गया है। किसानों को विकास भवन स्थित उद्यान विभाग के दफ्तर में 10 नवंबर तक लहसुन अथवा प्याज का बीज दिया जाएगा। एक किसान को लहसुन या प्याज में से कोई एक प्रकार का बीज मिलेगा। पावती के साथ पहले आओ, पहले पाओ के नीति पर किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। एक किसान को अधिकतम एक हेक्टअर क्षेत्रफल का लाभार्थी बनाया जा सकता है। ऐसे किसान जो प्याज अथवा लहसुन की खेती के लिए मिनी फव्वारा से सिंचाई का संसाधन लेने चाहते हैं उन्हें छूट दी जाएगी।
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मिनी फव्वारा संसाधन पर 50 हजार का खर्च आएगा जिसमें 45 हजार की छूट दी जाएगी। मात्र पांच हजार रुपये में ही मिनी स्प्रिंकलर की स्थापना हो जाएगी। एक हेक्टेयर के लिए किसानों को 10 हजार रुपये देना होगा। माइक्रो स्प्रिंकलर की स्थापना में एक एकड़ के लिए चार हजार रुपये और एक हेक्टेयर के लिए सात हजार रुपये कृषक अंशदान के रुप में देना होगा। मिनी व माइक्रो स्प्रिंकलर लगाकर प्याज व लहसुन के साथ सब्जी फसल चना, मटर, मसूर, सरसों व गेहूं की भी फव्वारा से सिंचाई कर सकते हैं। फव्वारा से सिंचाई करने पर उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि व लागत में 25 प्रतिशत की कमी आएगी। गन्ना, आम व पपीता की बागवानी, टमाटर, बैंगन व मिर्च आदि के सब्जी फसलों में ड्रिप लगाने पर 90 प्रतिशत का अनुदान किसानों को दिया जाएगा।
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