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कूल्हा प्रत्यारोपण से नानबाबू के जीवन में आई खुशहाली
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बलरामपुर। कूल्हा खराब होने के कारण पिछले एक वर्ष से बिस्तर पर पड़े नानबाबू के जीवन में नई खुशहाली आई है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ ने आयुष्मान भारत योजना के तहत नानबाबू का कूल्हा बदलकर उसे अपने पैरों पर चलने के काबिल बना दिया है। जिला संयुक्त चिकित्सालय में पहली बार कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया है।
उतरौला तहसील क्षेत्र के ग्राम भैरमपुर निवासी 30 वर्षीय नानबाबू का चोट लगने तथा हिप टीबी के कारण दोनों कूल्हा पूरी तरह खराब हो गया था। कूल्हा खराब होने से उसके पैर भी क्रॉस की स्थिति में हो गए थे जिसके कारण वह पिछले एक वर्ष से बिस्तर पर पड़ा था। परिजनों ने नानबाबू को कई अस्पतालों में दिखाया लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी। अस्पतालों में उसे बताया गया कि कूल्हा बदलने में जहां ढाई से तीन लाख रुपये लगेंगे वहीं पूरी तरह से स्वस्थ होने की कोई गारंटी नहीं है।
जीवन से निराश हो चुके नानबाबू को उम्मीद की किरण तब नजर आई जब जिला संयुक्त चिकित्सालय के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ ने उसका हौसला बढ़ाते हुए कूल्हा बदलने की चुनौती स्वीकार की। इस कार्य के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय के प्रभारी सीएमएस व सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह ने अपने स्तर से हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत इम्पोर्टेड अनसीमेंटेड टीएचआर (कूल्हा) मंगाया। प्रभारी सीएमएस की उपस्थिति में आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ ने करीब डेढ़ घंटे के ऑपरेशन के बाद सफलता पूर्वक नानबाबू का कूल्हा बदल दिया।
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ऑपरेशन के दूसरे दिन ही नानबाबू का पैर चलने लगा। डॉ. आसिफ ने बताया कि स्वस्थ होने पर करीब एक महीने बाद नानबाबू के दूसरे कूल्हे को भी बदला जाएगा। दोनों कूल्हा बदलने के बाद वह अपने पैरों पर चल सकेगा। पैर ठीक होने से नानबाबू की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। उसका कहना है कि डॉ. आसिफ ने उसकी जिंदगी को नई रोशनी दी है।
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उतरौला तहसील क्षेत्र के ग्राम भैरमपुर निवासी 30 वर्षीय नानबाबू का चोट लगने तथा हिप टीबी के कारण दोनों कूल्हा पूरी तरह खराब हो गया था। कूल्हा खराब होने से उसके पैर भी क्रॉस की स्थिति में हो गए थे जिसके कारण वह पिछले एक वर्ष से बिस्तर पर पड़ा था। परिजनों ने नानबाबू को कई अस्पतालों में दिखाया लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी। अस्पतालों में उसे बताया गया कि कूल्हा बदलने में जहां ढाई से तीन लाख रुपये लगेंगे वहीं पूरी तरह से स्वस्थ होने की कोई गारंटी नहीं है।
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जीवन से निराश हो चुके नानबाबू को उम्मीद की किरण तब नजर आई जब जिला संयुक्त चिकित्सालय के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ ने उसका हौसला बढ़ाते हुए कूल्हा बदलने की चुनौती स्वीकार की। इस कार्य के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय के प्रभारी सीएमएस व सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह ने अपने स्तर से हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत इम्पोर्टेड अनसीमेंटेड टीएचआर (कूल्हा) मंगाया। प्रभारी सीएमएस की उपस्थिति में आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ ने करीब डेढ़ घंटे के ऑपरेशन के बाद सफलता पूर्वक नानबाबू का कूल्हा बदल दिया।
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ऑपरेशन के दूसरे दिन ही नानबाबू का पैर चलने लगा। डॉ. आसिफ ने बताया कि स्वस्थ होने पर करीब एक महीने बाद नानबाबू के दूसरे कूल्हे को भी बदला जाएगा। दोनों कूल्हा बदलने के बाद वह अपने पैरों पर चल सकेगा। पैर ठीक होने से नानबाबू की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। उसका कहना है कि डॉ. आसिफ ने उसकी जिंदगी को नई रोशनी दी है।